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"देस दिसावर” वेब पॉर्टल राजस्थान और राजस्थान से बाहर रह रहे प्रवासियों का साझा मंच है।

www.deshdisavar.com 03/06/2022

गृहस्थी,खेती,पशु व निजू शब्दावली(क वर्ग)
https://www.deshdisavar.com/?p=1760

1.कंकेड़ो = कांटेदार रेगिस्तानी वृक्ष।
2.कंटाळियो = ऊंट का चार जामा विशेष जो बोझा लादने के समय उपयोग में लिया जाता है।
3.कंटाळी = एक प्रकार की वनस्पति।
4.कंतेर = खलिहान में पड़ा रहने वाला भूसा।
5.कंथड़ी = चिथड़ों को जोड़कर बनाया हुआ पहनने का वस्त्र।
6.कूंद = गोल लकड़ी के बने चक्र पर लंबा पड़ा रहने वाला लट्ठा, जिसके एक सिरे पर बैल जोतते हैं।
7.कऊ = सर्दी में तपने के लिए जलाया जाने वाला पुवाल।
8.कड़च = पहाड़ों की तलहटी के पास की जमीन।
9.कड़पो = खेत में काम करने वाले मजदूरों को दिया जाने वाला गेहूं का पूआल।
10.कड़ब/कड़बी = ज्वार या बाजरे का पौधा जिस पर से अनाज की बाल काट दी गई हो, जो पशुओं के चारे के रूप में काम में लिया जाता है।
11.कड़ी = छत पर लगाया जाने वाला मोटा-लम्बा काठ। एक गहना
12.कड़ै/माकड़ै = मस्ती में आए हुए ऊँट का पेशाब करते समय पूंछ झटकना।
13.कटकियो = गांव-गांव फिर कर फुटकर व्यापार करने वाला बिसाती।
14.कटखड़ी = कुवे से पानी निकालने का काठ का पात्र।
15.कटड़ियो/काटड़ो/पाडो = भैंस का बच्चा।
16.कटहड़ो = हाथी के पीठ पर रखा जाने वाला काठ का चार जामा।
17.कढावणी = मिट्टी की हांडी जिसमें उबलने के लिए दूध चढ़ाया जाता है।
18.कणवारियो = राज के समय खेती की पैदावार की वसूली करने वाला एक कर्मचारी।
19.कणसारो = गोबर व बांस की खपचियों का बना अनाज भरने का कोठा।
20.कठाई/कोडी =होठों व दांतों पर जमने वाला मैल।
21.कणियो = पतंग की खड़ी खपची में बांधकर त्रिकोण बनाने वाला डोरा।
22.कतारियो = ऊंटों के काफिले से सामान ढोने वाला व्यक्ति।
23.कथीर = बर्तनों पर कलई करने का एक सफेद नर्म धातु।
24.कन्यावळ = कन्या के विवाह के दिन घर के बड़े -बुजुर्ग द्वारा रखा जाने वाला व्रत।
25.कपणियो = दीपक की लौ से काजल बनाने का मिट्टी का बना उपकरण।
26.कमरी = ऊंट का एक प्रकार का वात रोग/
थर्राते हुए बैठने वाला ऊंट।
27.कमाद = गन्ने की फसल।
28.करबो = छाछ या दही में उबले हुए चावल डालकर बनाया जाने वाला पदार्थ।
29.कराळी/करावो/गोड़ी = भूमि को समतल बनाने का उपकरण।
30.कलाहक = युद्ध के समय बजाया जाने वाला बाजा।
31.कळण = बड़े -पकोड़े बनाने हेतु मूंग- मोठ आदि को भिगोकर बनाई हुई चटनी।
32.कळपो = फसल युक्त जोती हुई भूमि में से बैल जोत कर घास काटने का उपकरण।
33.कळी = एक विशेष प्रकार का हुक्का/ चूने से बनाई हुई सफेदी।
34.कसार = थोड़े से घी में भुने आटे में गुड़ या चीनी मिलाकर बनाया हुआ खाद्य पदार्थ।
35.कांकड़ = गांव की सीमा
36.कांकरी =कठोर मिट्टी का छोटा कंकड़।
37.कांकरो =कठोर मिट्टी का बड़ा कंकड़।
38.कांगरो = औढ़ने के अग्रभाग पर लगाई जाने वाली बड़ी पट्टी
39.कांगसी/कांगसियो = केश संवारने की कंघी,कंघा।
40.कांचळी = सांप की केंचुली/ औरतों के पहनने का एक वस्त्र।
41.कांदो =प्याज।
42.कांप = तालाब आदि का पानी सूखने के बाद जमने वाली गीली पपड़ी।
43.कांस = एक ऊंचा लंबा खराब घास जो खत्म होने में ही नहीं आता।
44.कामड़ी =छोटी लाठी।
45.कामड़ो = पतली लम्बी लाठी।
46.काठकोरड़ो = अपराधियों को दंड देने का काठ का यंत्र।
47.कातर = कपड़े की कतरन
48.कातरो = खरीफ की फसल के समय उत्पन्न होने वाला कीड़ा जो फसल को खा खाकर हानि पहुंचाता है।
49.काहल = युद्ध में बजने वाला ढोल।
50.किसारी= घरों और खेतों में पाया जाने वाला एक जीव जो रात को चीं-चीं की आवाज करके बोलता है/ झींगुर।
51.कुंडाळो = सूर्य के इर्द गिर्द बना वृत ,जो वर्षा या वायु का सूचक माना जाता है।
52.केंगार = मोर के बोलने की आवाज।
53.कुड़/कुड़को = हरिण पकड़ने का लोहे का यंत्र।
54.कुड़णो = पकी फसल का अत्यधिक सूख जाना।
55.कुठार = मुश्किल से दूध देने वाली गाय, भैंस।
56.कुतर = ज्वार बाजरी के पुवालों के कटे हुए टुकड़े, जो पशुओं को खाने हेतु दिए जाते हैं।
57.कुरकरी = लाव के छोर पर लगाई जाने वाली वह कील जो लाव को बैलों के जुए से जोड़ती है।
58.कुश/स्यारो/हळबेणी/फाळी = लोहे का लंबा नुकीला कीला जो हल के अग्रभाग में लगता है।
59.कूंचळा = दाढ़ एवं दांतो के बीच के नुकीले दांत।
60.कैजम्म = युद्ध के समय घोड़े को धारण कराया जाने वाला कवच या पाखर।
61.कोठो = घर के अंदर का कमरा/वेश्यालय।
62.कोरमो = चने का मोटा पीसा हुआ चूरा जो पशुओं को खिलाने में काम में लिया जाता है।
63.कोस = प्राय: दो मील की दूरी का नाप।
64.कौड़ी = सबसे कम मूल्य का एक प्राचीन सिक्का।

65.खरखरियो = बिना मजदूरी लिए केवल भोजन के लिए जागीरदार के खेतों में काम करने वाला व्यक्ति।
66.खरळ = औषधियां कूटने की पत्थर आदि की नावनुमा कुंडी।
67.खळो = खलियान,खलिहान में पड़ा हुआ अनाज।
68.खाखरो = चना या मोठ की बेहद पतली रोटी।
69.खारियो = पशुओं के को घास डालने का टोकरा।
70.खाळो = खेतों में सिंचाई करने के लिए बनाया गया कच्चा- पक्का नाला।
71.खीस = गाय या भैंस का प्रथम बार का उबलकर फटा हुआ दूध।
72.खुरचण = भोजन का वह अंश जो बर्तन के चिपका रह जाता है और जिसे खुर्च कर उतारा जाता है।
73.खुर्रो = पशुओं की पीठ से मैल उतारने का उपकरण।
74.खेलरी = काकड़िए को काटकर छुपाया हुआ कड़ा।
75.खेस/खेसलो = सूत का बना चद्दर की तरह का ओढ़ने का वस्त्र।
76..खोखा = खेजड़ी वृक्ष का पका फल।
77.खोटण = बाजरी आदि की बालियों को कूटकर अनाज निकालने का मोटा डंडा।
78.खोबा= हाथ से की गई मोटी सिलाई।
79.खोरो =बालों में जमनेवाली रूंसी।
80.खोळीड़ो/बीजोळियो = बीज की थैली जो बिजाई के वक्त किसान की कमर में बंधी रहती है।
81.खुडी = कच्ची दीवारों का छान डाला हुआ छपरा।
82.खूंसड़ो = फटा पुराना जूता।
83.खोड़ = सुनसान रोही।

84.गंजी = कपड़े की सिली हुई बनियान
85.गंडासी = झाड़ी आदि काटने का लोहे का फरसानुमा उपकरण।
86.गरगज = किले की बुर्ज जहां तोपें रहती हैं।
87.गरड़ू/गरेड़ो = खेजड़ी की टहनियों की ग्रंथि।
88.गळतंग = पिलाण कसने के लिए ऊँट के गले में बाधा जाने वाला तंग।
89.गल्लो = दुकानदार की पैसा रखने की पेटी।
90.गळांवंडो = पशुओं के गले में बंधी हुई रस्सी।
91.गवाड़ी = मकानों के सामने या बीच का खुला हुआ भाग।
92.गांगळी/आंधळी = सावण या आषाढ़ मास में चलने वाली दक्षिण पश्चिम की हवा।
93.गाडूलो = तीन पहियों का बच्चों का खिलौना जिसके सहारे बच्चा चलना सीखता है।
94.गाडो = ऊंट के पीछे जोड़ी जाने वाली दूपहिया गाड़ी।
95.गामेठ = मोहल्ले में एकत्र होकर बहने वाला वर्षा का पानी।
96.गारड़ू = सांप का जहर उतारने वाला/ जिस पर जहर का असर न हो।
97.गुज्जी = छाछ में दूध मिला पेय जिसके साथ भोजन किया जाता है।
98.गुल्ली = चार-पांच इंच की काठ की किल्ली जिसे डंडे से खेला जाता है।
99.गूगरी/घूघरी = गेहूं या बाजरे के उबले दाने जिसमें गुड़ शक्कर आदि मिलाकर मांगलिक अवसरों पर बांटा जाता है।
100.गूणियो = पीतल का छोटी टोकणीनुमा बर्तन जो दूध और घी के लिए काम में लिया जाता है।
101.गूणो = मूंग, मोठ,चने आदि के सुख के डंठल।
102.गेगरी/घेघरी/साट = चने के पौधे पर लगने वाला कच्चा फल जिसमें दाने पड़ते हैं।
103.गोदल = रहट में लगा मोटा लट्ठ जिसके एक सिरे पर बैठकर बैल हांके जाते हैं।
104.गोफण/गोफियो = चमड़े या गूंथे हुए सूत की दो छोटी रस्सियों के बीच बनी सांप के फन जैसी पट्टी, जिस पर छोटा पत्थर रखकर घुमा कर फेंका जाता है। यह फसल की रखवाली के काम आता है।
105.गोयड़ = पशुओं का खून चूसने वाला चींचड़ से बड़ा परजीवी।
106.गोरबंद = ऊँट के गले का का आभूषण विशेष/ एक लोकगीत।
107.गोळालाठी = दोनों हाथों को पांव से बांधकर बीच में लकड़ी फंसा कर दिया जाने वाला कठोर दंड।

108.घांणी = तेल निकालने का कोल्हू।
109.घटोलियो/घटुलियो = छोटी चक्की।
110.घाघड़ा = खट्टे बेर।
111.घाम= तेज चिलचिलाती धूप।
112.घासियो = फटी बोरी का टुकड़ा, ऊँट के पलाण के नीचे लगाई जाने वाली गद्दी।
113..घिलोड़ी/तावणियो = घी रखने का छोटा पात्र।
114.धींसोड़ी/फट्टो = खेत को समतल करने का फट्टा जो ऊंट या बैल पीछे जोड़कर चलाया जाता है।
115.घेसळो =आगे से मोटा पीछे से पतला मुगदर नुमा लट्ठ।
116..घोबा = आंख और सिर के बीच होने वाला दर्द। च वर्ग की शब्दावली अगले अंक में-
अपने सुझाव/प्रतिक्रिया कॉमेंट बॉक्स में लिखें।

डॉ. भरत ओला
रचनाकार रचनाएं निम्न पते पर भेजें
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www.deshdisavar.com 25/05/2022

राजस्थानी रीति-रिवाजों की शब्दावली (प वर्ग)
https://www.deshdisavar.com/?p=1744

1.पंचकंवळ = कुत्ते आदि के लिए निकाले जाने वाला ग्रास।
2.पंचकेस = यज्ञोपवीत संस्कार में बटुक के सिर में रखी जाने वाली पांच शिखाएं।
3.पंचपीर = पांच लोक देवता यथा पाबू, हड़बू, रामदेव, मांगळिया मेहा और गोगादेव।
4.पंचवाणी = कबीर, दादू, हरिदास, रामदास, दयालदास की वाणियां।
5.पंटतरड़ = पाट बैठते समय और औढ़ाई जाने वाली चादर।
6.पंथवारी = तीर्थ यात्रियों की याद में बोए जाने वाले गेहूं जौ आदि।
7.पगधोई = शादी के अवसर पर वर के पिता के पांव धोने की एक प्रथा।
8.पगपडण = वधू द्वारा बड़ी बूढ़ियों के चरण स्पर्श की एक प्रथा।
9.पगल्यो = किसी देवता या पीर के सोने चांदी या पत्थर आदि पर खुदे पद चिन्ह।
10.पगपांवडा = किसी का स्वागत करने के लिए रास्ते में बिछाया जाने वाला वस्त्र।
11.पड़/फड़ = कपड़े पर चित्रित किसी लोक नायक का जीवन चरित्र।
12.पड़जान = गांव या नगर के बाहर कन्या पक्ष की ओर से की जाने वाली बारात की अगवानी।
13.पड़दायत = पर्दे में रहने वाली स्त्री/ राजा या सामंतों की उप पत्नी/ रखैल।
14.पटरंगणा = विवाह उपरांत वर वधू को खेलाया जाने वाला एक खेल।
15.पटियार = विवाह योग्य कन्या को पाट पर बैठने की प्रथा।
16.पट्टाबींटी = पाणिग्रहण से पूर्व वर की ओर से वधू को पहनाई जाने वाली मुद्रिका।
17.पड़गौरव = विवाह उपरांत वधू पक्ष की ओर से श्रीमाली ब्राह्मणों को दिया जाने वाला भोज।
18.पधरावणी = किसी महंत को घर बुला कर दी जाने वाली भेंट।
19.परछन = तोरण पर आए दूल्हे का स्त्रियों द्वारा किया जाने वाला स्वागत।
20.परूसो = आमंत्रित व्यक्ति के न आ सकने की दशा में उनके घर भेजा जाने वाला भोजन या थाल।
21.पला = मृतक के पीछे रुदन के साथ गाया जाने वाला बिरह गीत।
22.पसायत = सेवा या नौकरी के बदले दी जाने वाली भूमि या जागीर।
23.पहरावणी = विवाह के बाद विदाई के समय कन्या के पिता की ओर से दिया जाने वाला वस्त्र आदि/वृद्ध
मृतक के पीछे उसकी संतान को उसके ससुराल पक्ष द्वारा दी जाने वाली वस्त्र आदि भेंट।
24.पांचको = प्रसव के पांचवें दिन किया जाने वाला संस्कार।
25.पाणिग्रहण = वर द्वारा कन्या का हाथ थाम कर ग्रहण करने की क्रिया।
26.पांभड़ी = दुल्हन को विवाह मंडप में औढ़ाने का वस्त्र।
27.पागड़ाछांक = बरात प्रस्थान के समय मेहमानों से की जाने वाली शराब की मनुहार।
28.पारणो = व्रत के दूसरे दिन किया जाने वाला भोजन/ तत संबंधी कृत्य।
28.पिट्ठी = शरीर की त्वचा को कोमल व सुंदर बनाने का एक उबटन विशेष /विवाह के समय ऐसा उबटने की
रस्म।
29.पुंसवन = गर्भाधान के तीसरे माह में किया जाने वाला एक संस्कार।
30.पुष्णट्ठा = जैनियों के मतानुसार मृत्यु भोज का भोजन लेने से होने वाला दोष।
31.पुरणाई = मांगलिक अवसरों पर गोबर आदि से आंगन लेपने की क्रिया।
32.पैसारो = विवाह उपरांत दूल्हा दुल्हन के गृह प्रवेश की रस्म विशेष।
33.पोहल = गुरु नानक की वाणी सुनने के बाद पिलाया जाने वाला शरबत।
34.फाग = होली के अवसर पर रंग आदि से खेलने का खेल।
35.फातड़ो = किन्नरों के साथ रहने व लाग वसूल करने वाला व्यक्ति।
36.फूहली = बहन की राखी प्राप्त होने पर भाई द्वारा बहन को भेजी जाने वाली पोशाक।
37.फूलेरी = विवाहित कन्या के प्रथम राजोदर्शन शुद्धि पर उसकी माता द्वारा मनाया जाने वाला उत्सव।
38.फैंटो = कमर पर लपेट कर बांधने के वस्त्र का छोर/ दूल्हे की कमर पर बांधने का वस्त्र।
39.फेरा = विवाह के समय होने वाली भंवरी या अग्नि परिक्रमा।
40.बंदोळी = विवाह के पहले दिन की संध्या को होने वाला उत्सव।
41.बंदोरो/बंदोळो = विवाह के पूर्व वाले दिनों में ईस्ट मित्रों या सगे संबंधियों द्वारा दूल्हे या दुल्हन को दिया जाने वाला भोज एवं शोभायात्रा।
42.बड़ो = गरासिया जाति का मृतक के पीछे किया जाने वाला भोज।
43.बडहार = विवाह के समय का विशेष भोज।
44.बडोवेस/बरी = विवाह के समय वधू के लिए बनाई गई विशिष्ट पोशाक।
45.बराड़ = गांव के हर घर से लिया जाने वाला चंदा।
46.बरोटी = विवाह के बाद वधू के स्वागत में किया जाने वाला भोज/ बहु बंदळी
47.बळांणो = राजकीय खर्च या राजा की इच्छा तक किसी को सवारी के लिए दिया जाने वाला घोड़ा।
48.बांद /बान= दूल्हे दुल्हन को इष्ट मित्रों, सगे संबंधियों द्वारा भेंट किया जाने वाला द्रव्य।
49.बाईबराड़ = राजकुमारी के विवाह पर प्रजा से लिया जाने वाला कर।
50.बार = मृतक के पीछे किया जाने वाला रुदन।
51.बार रुकाई = बारात प्रस्थान के वक्त बहन द्वारा भाई का रास्ता रोकने की एक रस्म और उसको दिया जाने
वाला धन।
52.बारह हजारी= शहजादे को दिया जाने वाला एक मनसब।
53.बाळूंजो = प्रथम प्रसव के समय पिता के घर से मिलने वाला धन।
54.बिड़द = विवाह आदि मांगलिक कार्य/ इस अवसर पर बनाया जाने वाला मिष्ठान/ गणेश जी को चढ़ाया जाने वाला भाग।
55.बिड़लो = संबंध या सगाई के लिए आने वाला श्रीफल आदि।
56.बिनोटा = दूल्हे या दुल्हन की जूती।
57.बिहांणा= विवाह के दिनों में प्रातः काल गाए जाने वाले मांगलिक गीत।
58.बेमजो = गाने के समय कन्या को दिया जाने वाला द्रव्य वस्त्र आदि।
59.बैठ्यो ब्याह = वर पक्ष व कन्या पक्ष का एक ही स्थान, गांव या नगर में रहकर या आकर किया जाने वाला विवाह।
60.बैरणो = दूल्हे का अपने इष्ट मित्रों व संबंधियों के यहां भोजन करना।
61.बोलवां = किसी देवता के चढ़ावे, पूजा, फेरी आदि की घोषणा।
62.भड़भोलयो/भड़कुलियो = होली के साथ जलाने के लिए बनाई गई गोबर की गोल टिकिया।
63.भात = वर वधु के ननिहाल वालों की तरफ से दिया जाने वाला वस्त्र, आभूषण, द्रव्य आदि/ इस अवसर
पर गाए जाने वाला लोकगीत।
64.भातवी = वर कन्या के ननिहाल पक्ष के लोग।
65.भूरसी = यज्ञ, विवाह आदि की समाप्ति पर ब्राह्मणों को दी जाने वाली दक्षिणा।
65.भौंडेरू = विवाह आदि मांगलिक अवसरों पर कुछ उपहार लेने वाली जाति समूह।
66.मंगळियो = मृतक के द्वादशे की क्रिया में काम लेने का मिट्टी का पात्र।
67.मांडो = विवाह के लिए बनाया हुआ मंडप।
68.मांडेती = विवाह में कन्या पक्ष के लोग।
69.माटो = विवाह के बाद कन्या के साथ भेजा जाने वाला बड़ी-पापड़ आदि सामान।
70.माथा धोवण = प्रसव के कुछ दिन बाद जच्चा को कराया जाने वाला स्नान।
71.मारखाई = मध्य युग में चोरी के माल का पता लगाने वाले को दिया जाने वाला धन।
72.मायरो = विवाह में वर वधू के नाना या मामा की ओर से दिया जाने वाला सामान, वस्त्र, धन आदि।
73.मारोट = विवाह के समय दूल्हे या दुल्हन के मुख पर की जाने वाली सुनहरी चित्रकारी।
74.मासवारी = महीने के बाद होने वाला प्रसूता का स्नान।
78.मासीसो = मृतक के पीछे प्रति माह किया जाने वाला भोज।
79.रेहाण = मांगलिक अवसरों पर सगे- संबंधियों, परिजनों एवं इष्ट मित्रों को अमल आदि पिलाए जाने की
एक प्रथा।
80.मिलणी = विवाह के समय कन्या पक्ष की ओर से संबंधियों को बांटी जाने वाली राशि।
81.मूंगदड़ो/मूंधणो = विवाह आदि मांगलिक अवसरों पर लाया जाने वाला इंधन की लकड़ियों का गट्ठर/कैर आदि
82.मुंह दिखाई = वधु को मुंह दिखाने की रस्म पर दिया जाने वाला धन।
83.मुहपल्लो = मृतक के पीछे रोते समय मुंह ढकने की रस्म।
84.मुकलावो = शादी के बाद व्यस्क होने पर ससुराल जाने हेतु कन्या की विदाई की एक रस्म।
85.मुंकाण = मृतक के पीछे उनके संबंधियों के पास संवेदना प्रकट करने जाने की रस्म।
86.मुजरो = किसी राजा या रईस को किया जाने वाला अभिवादन।
87.मुसल्लो = नमाज पढ़ते समय बिछाने की चद्दर।
88.मोड़ = दूल्हे दुल्हन के सिर पर बांधने का सेहरा।
89.मौसर = मृतक के पीछे किया जाने वाला मृत्यु भोज।
……शेष अगले अंक में।
अपने सुझाव/प्रतिक्रिया कॉमेंट बॉक्स में अवश्य लिखें।

डॉ. भरत ओला
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