Pratap Rao
Pratap Rao is Content Head in RITAM DIGITAL MEDIA FOUNDATION, New Delhi.
10/07/2025
गुरुर्ब्रह्मा गुरुर्विष्णु र्गुरुर्देवो महेश्वरः ।
गुरुः साक्षात् परब्रह्म तस्मै श्रीगुरवे नमः ॥
आप सभी को गुरुपूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएं 🙏🏻🚩
#गुरु_पूर्णिमा
21/04/2025
जहाँ निर्णय में नीति हो और नीयत में देश, वहाँ जन्म लेते हैं सच्चे सिविल सेवक..!! 🧘
सिविल सेवा दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ🥳
20/04/2025
कांग्रेस का land zihad
08/01/2024
ये बिलोची के नंदलाल जी डागर हैं, 1990 में कारसेवा में हमारे साथ अयोध्या में थे। कारसेवा के लिए जन्मभूमि की और बढ़ते हुए पुलिस गोलीबारी में इनके भी जांघ में गोली लगी थी। उस समय किसान संघ में विस्तारक थे।
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चार सौ बानवे वर्ष का वनवास
मंदिर के लिए संघर्ष
2 नवम्बर , 1990। यहां जयपुर से और कई कारसेवक आ चुके थे। सतीश पूनिया जी, संजय सुरोलिया जी के साथ कुछ और विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ता वहां मिल गए। लगभग 10 बजे मनीराम छावनी का गेट खुला और कारसेवकों की वाहिनी राम भक्ति करते हुए आगे बढ़ चली। निर्मोही अखाड़े से आगे बढ़े, हनुमान गढ़ी की और सामने पुलिस आ गई पहले लाठी बरसाई, कारसेवक नहीं रुक। पुलिस वाले पत्थर बरसाने लगे, बस आंदोलन का अभ्यास काम आया उन्ही का पत्थर उन्ही पर बरसाने लगे। गुस्साई पुलिस ने भजन गा रहे रामभक्तो पर अश्रु गैस के गोले दागे। अभ्यास फिर काम आया, गोलो को उठाकर वापस उनकी तरफ फेंक दिया, इससे पुलिस बौरा गई, आपा खो बैठी। एक साथ कई गोले दाग दिए, लोग जलती आंखों को पास के हैंडपंप पर धो रहे थे, सतीश पूनिया जी के साथ आए हमारे एक साथी रामवतार सिंघल हैंडपंप चला रहे थे चारो और धुआं था। इतने में पुलिस ने दनादन गोलियां बरसानी शुरू कर दी हम पीछे हटने लगे धुएं में कोई दिखाई नहीं दे रहा था। जिस तरफ जगह मिली लोग उस तरफ हो लिए। कुछ देर बाद गोलियां थमी, तो सामने देखा, किसान संघ के नंदलाल डागुर जी की जांघ में गोली लगी थी खून बह रहा था, मैने और राकेश वर्मा ने एक ठेले में उन्हें डाला एक स्थानीय कार्यकर्ता उन्हें अस्पताल ले गया । वापस मुडे तो देखा सड़क पर निढाल लोग पड़े है ,उनके गोलियां लगी थी, शायद वे बलिदान हो गए थे। सामने से पुलिस आगे बढ़ रही थी हम भी कुछ और लोग जो वहां थे, बचने के लिए निर्मोही अखाड़े के सामने एक मंदिर में घुस गए, संजय सुरोलिया साथ थे। मंदिर के अंदर से किवाड़ बंद कर लिए, लेकिन कुछ समय में ही पुलिस वहां पहुंच गई, गेट तोड़ दिया हमें नीचे उतार कर ले आए और एक पेड़ के नीचे बैठा दिया। लगा, अब राम नाम सत्य है। मंदिर निर्माण के लिए फिर जन्म लेना होगा । लेकिन होय सोई जो राम रची राखा। विदेशी मीडिया जो मंदिर आंदोलन के खिलाफ जहर उगल रहा था, अचानक एक ट्रक में वहां पहुंच गया। पुलिस अधिकारी उन्हें बाइट देने लगे और पुलिस के सिपाही राम दूत बन गए ,जो कुछ देर पहले ऑर्डर पर गोली चला रहे थे, वे अब इशारे कर रहे थे, गली की तरफ वहा से हम निकल भागे। पहुंच गए मनीराम छावनी। पता चला आज कई कारसेवक बलिदान हो गए। हमने अपने लोगो को ढूंढा तो रामवतार सिंघल का पता नहीं चला, खोज शुरू हुई। अगले दिन खबर थी कई शहीदों की लाशे सरयू में डूबो दी है। सरयू पहुंचे, वहां कुछ लाशे तैर रही थी। किनारे पर दुर्गंध फेली थी। आखिर वापस आ गए। अगले दिन कारसेवा स्थगित कर दी गई कारसेवक सत्ता के मद में चूर शासकों को सबक सिखाने का राम से वादा कर अयोध्या से रवाना हो गए। इससे पहले राम भक्त मुलायम के दंभ को तोड चुके थे, उसने कहा था, परिंदा भी पर नहीं मार सकता। लेकिन हजारों कारसेवक देश भर से अयोध्या पहुंच गए।
इस नर संहार ने राम के प्रति देश के विश्वास को और दृढ़ किया, और राम के भव्य मंदिर का निर्माण हर रामभक्त का जीवन लक्ष्य हो गया।
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