Shankar DOON
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जब से डॉलर का मूल्य 90 रुपया हुआ है तब से सोशल मीडिया उसी से रंगा पड़ा है..
मानो कि हमलोग डॉलर में ही हल्दी, धनिया और सब्जियाँ खरीदते हैं जिससे कि कल से हमारे लिए महँगाई बढ़ जानी है...
तथा, हमारे भूखे मरने की नौबत आ जायेगी.
फिर भी, चूँकि सारे विपक्षी इस पर रन्नी रोना मचा रहे हैं इसीलिए डॉलर vs रुपये की थोड़ी जानकारी दे देता हूँ ताकि वैसे लोगों का पोस्ट पढ़ते समय हमलोगों को ये समझ आ सके कि वास्तव में आंकड़ों के साथ खेल कर आख़िर आमलोगों को कैसे बेवकूफ बनाया जाता है और हमारी भावनाओं का दोहन किया जाता है.
इसे समझाने के लिए मैं कोई टेक्निकल या उसके कारण की बात नहीं करूँगा क्योंकि सबको जिओ पॉलिटिक्स अथवा ट्रेड डिफिजिट, ट्रेड बैलेंस आदि समझ नहीं आते हैं.
इसीलिए, इसे हम आसानी से समझने के लिए एक सामान्य सा 35 साल का इतिहास उठा लेते हैं ताकि समझ आ सके कि किसने कैसा काम किया है...
अगर हम 35 साल पहले अर्थात 1991 से बात करें तो...
1991 से 1996 के अपने 5 साल में कार्यकाल में प्रधानमंत्री नरसिंह राव और वित्त मंत्री मनमोहन सिंह जी डॉलर को 22 से 42 तक ले गए..
जो कि, 90% की बढ़ोत्तरी दर्शाती है.
अर्थात, देश के सर्वश्रेष्ठ वित्त मंत्री और बहुत विद्वान प्रधानमंत्री कहलाने वाले लोगों के कार्यकाल में डॉलर लगभग दुगुना महंगा हो गया वो भी महज 5 साल के कार्यकाल में.
जिसके बाद वाजपेई जी आये जिनके 1996 से लेकर 2004 तक के कार्यकाल में डॉलर 42 से 43 तक हुआ..
जो कि महज 0.2% की बढ़ोत्तरी है.
ध्यान रखने वाली बात ये है कि बाजपेई जी के कार्यकाल में पोखरण विस्फोट के बाद अमेरिका समेत अन्य देशों द्वारा आर्थिक प्रतिबंध लगाए जाने के बावजूद भी बढ़ोत्तरी मात्र 0.2% की थी.
फ़िर, आए मनमोहन सिंह जी..
और, सर्वाधिक पढ़े लिखे और भारत के पूर्व गवर्नर होने के बावजूद भी 2004 से 2014 तक के 10 साल के कार्यकाल में उन्होंने डॉलर 46% का ग्रोथ देते हुए डॉलर को 43 से 63 तक पहुंचा दिया..!
और, अभी मोदी जी के 2014 से 2025 के 11 वर्षों के कार्यकाल में 2 साल के कोरोना एवं अमरीकी टैरिफ वार के बावजूद भी डॉलर 63 से 90 तक पहुंचा है.
जो कि महज 42% की बढ़ोत्तरी दिखाती है.
और, अगर इसे सिर्फ मनमोहन जी के 10 साल से तुलना करें तो ये ग्रोथ 38% आती है. (क्योंकि, 42% का ग्रोथ 11 साल में है जबकि तुलना 10 साल vs 10 साल की होनी है).
इसीलिए, इन आंकड़ों से साफ पता चलता है कि यदि डॉलर vs रुपये को भी विकास का पैमाना मान लिया जाए तो किसके राज में स्थिति ज्यादा अच्छी है.
लेकिन, फिर भी एक हाइप फैलाया जा रहा है कि डॉलर 90 का हो गया.
असल में खांग्रेसिये टूलकिटियों को लगता है कि उतना इतिहास खंगालने और प्रतिशत निकालने की फुर्सत किसे रहती है यार...
आराम से जो मर्जी लिखते रहो और जनता को तूतिया बनाते रहो.
लेकिन, एक बात जो वे बार-बार भूल जाते हैं कि अब वो जमाना चला गया जब गधे भी जलेबी खाया करते थे क्योंकि अब आंकड़ों का जबाब आंकड़ों से तथा इतिहास का जबाब इतिहास से दिया जाने लगा है.
जय महाकाल...!!! fans Bhajanlal Sharma BJP Rajasthan
जय श्री राम
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