Brij Mohan
rij Mohan is a renowned Music composer and Lyricist. He is an approved grade 1 music composer of Al
नमस्कार दोस्तों,
आज के हमारे रचनाकार हैं डॉ. अनिल महाजन जी, जिनकी एक अत्यंत प्रासंगिक रचना को संगीतबद्ध कर मैं आपकी सेवा में प्रस्तुत कर रहा हूँ। डॉ. महाजन ने मेरी विशेष फरमाइश पर, अमेरिका और ईरान के मध्य उपजे युद्ध के तनावपूर्ण हालातों को ध्यान में रखते हुए इस गीत का सृजन किया है। इसके लिए मैं हृदय की गहराइयों से उनका आभार व्यक्त करता हूँ।
रचना का सार
कवि ने इस गीत के माध्यम से युद्ध की विभीषिका और गिरते मानवीय मूल्यों पर गहरी चिंता व्यक्त की है। आज जब विश्व महाविनाश की कगार पर खड़ा है, तब कवि ने ईश्वर से 'अवतार' लेने की आर्त पुकार लगाई है। गीत के मुख्य बिंदु कुछ इस प्रकार हैं:
नैतिकता का ह्रास: कवि कहते हैं कि जब मनुष्य का विवेक मर जाता है और केवल स्वार्थ व अहंकार शेष बचता है, तब 'पाप का घड़ा' भर जाता है।
मासूमों का क्रंदन: गीत का सबसे मार्मिक हिस्सा वह है, जहाँ राजनीति और सत्ता की जंग में पिसते बेबस बच्चों और मासूमों की 'चीख-पुकार' को शब्दों में पिरोया है। यह मानवता के संहार के विरुद्ध एक करुण पुकार है।
सर्वनाश की चेतावनी: कवि आगाह करते हैं कि यदि यह संघर्ष नहीं रुका, तो यह केवल एक युद्ध नहीं बल्कि पूरी सृष्टि का अंत होगा। केवल ईश्वरीय हस्तक्षेप ही दुनिया को 'बेमौत' मरने से बचा सकता है।
स्वर की मधुरता
इस मर्मस्पर्शी रचना में प्राण फूँकने का अद्भुत कार्य किया है आदरणीया लवली चंद्रा जी ने। लवली जी की आवाज़ में जो ठहराव, मिठास और भावपूर्ण गहनता है, वह इस रचना को सीधे श्रोता के हृदय तक ले जाती है। उनके स्वर-माधुर्य ने शब्दों को एक नई ऊँचाई और आत्मिक रस प्रदान किया है।
आइये, साहित्य और संगीत की इस अनूठी जुगलबंदी का आनंद लेते हैं।
प्रिय मित्रो,
सादर नमस्कार।
आज मैं एक ऐसी कालजयी रचना को संगीतबद्ध कर आपके समक्ष उपस्थित हुआ हूँ, जिसकी रचयिता पद्मश्री से सम्मानित आदरणीया बहन पद्मा सचदेव जी हैं।
इस रचना में कवयित्री ने अपने अतीत के सुनहरे झरोखों से उन दिनों को याद किया है, जो अब एक मधुर स्वप्न की भाँति प्रतीत होते हैं। वे कहती हैं कि वो भी क्या समय था, जब हौसलों के पंख लगाकर स्वप्न में ही सारे आकाश की परिक्रमा कर ली जाती थी और यह विशाल धरती भी कदमों से नापी जा सकती थी। दिन-रात का सम्मोहन, पर्वत के टीलों पर मीठी थपकियों के साथ आती वो बेफिक्र नींद और बावली के दर्पण में खुद को निहारते हुए आंखों में चोरी-छिपे सुरमा लगाना—ये यादें आज भी अचंभित कर देती हैं।
इस रचना की आत्मा लवली चंद्रा जी का भावपूर्ण गायन है, जिन्होंने अपनी आवाज़ से शब्दों में प्राण फूँक दिए हैं। यदि इस रचना की धुन आपको हृदयस्पर्शी लगे, तो इसका संपूर्ण श्रेय बहन पद्मा जी की लेखनी को जाता है; क्योंकि रचना स्वयं में इतनी उत्कृष्ट थी कि संगीत का बेहतर होना स्वाभाविक था।
आपसे विनम्र अनुरोध है कि इस कालजयी कृति को अवश्य सुनें और अपनी प्रतिक्रियाओं से हमारा मार्गदर्शन करें।
धन्यवाद।
प्रिय दोस्तों,
नमस्कार।
आप सभी को शिवरात्रि की बहुत-बहुत बधाई। आज इस पावन अवसर पर मैं आपकी सेवा में पद्मश्री से सम्मानित महान व्यक्तित्व पद्मा सचदेव बहिन जी द्वारा रचित एक विशेष भजन को संगीतबद्ध करके प्रस्तुत कर रहा हूं।
इस भजन को भक्ति भाव में डूबकर बेहद कुशल गायिका लवली चंद्रा जी ने गाया है और अपनी सुरीली आवाज से इसके साथ पूरा न्याय किया है।
पद्मा सचदेव जी का नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं है, फिर भी उनकी गौरवशाली साहित्यिक यात्रा की कुछ मुख्य उपलब्धियां और कालजयी रचनाएं यहाँ साझा कर रहा हूँ:
पद्मा सचदेव जी: एक गौरवशाली परिचय
डोगरी की प्रथम आधुनिक कवयित्री: उन्होंने अपनी मातृभाषा डोगरी को विश्व पटल पर मान-सम्मान दिलाया।
विशाल साहित्य सृजन: उनकी हिंदी और डोगरी को मिलाकर कुल 37 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं।
प्रतिष्ठित सम्मान: वे 'पद्मश्री', 'साहित्य अकादमी पुरस्कार' और देश के सर्वोच्च साहित्यिक सम्मान 'सरस्वती सम्मान' से विभूषित हैं।
उनकी कुछ प्रमुख कालजयी रचनाएं:
'मेरी कविता, मेरे गीत': (साहित्य अकादमी पुरस्कृत काव्य संग्रह)
'तवी ते चन्हाऽ': (डोगरी कविताओं का प्रसिद्ध संग्रह)
'बूंद बावड़ी': (उनका प्रसिद्ध हिंदी गद्य संग्रह/आत्म -कथात्मक कृति)
'चित्त-चेते': (सरस्वती सम्मान प्राप्त संस्मरण)
पद्मा जी के शब्द और लवली चंद्रा जी के स्वर का यह संगम महादेव की भक्ति का एक अनूठा अनुभव है।
मेरा आप सभी से विनम्र अनुरोध है कि इस भजन को एक बार ज़रूर सुनें और भक्ति के इस पावन प्रवाह का आनंद लें।
Dear friends,
Good evening.
Today, I am presenting to you a musical composition based on the work of a remarkable personality, the respected Aparajita Pujari.
Aparajita Poojari, an award-winning film critic, poet, translator, and author, has over two decades of distinguished contribution to cinema and literary criticism. A recipient of the Assam State Film Awards, Prag Cine Awards (Northeast), and Assam Sahitya Sabha Award, she is a member of the International Federation of Film Critics.
Lovely Chandra, who has given voice to captivating poetry of Aprajita Poojari is a gifted and expressive singer, is known for her soulful voice, emotional depth, and refined musical sensibility, bringing lyrical nuance and artistic grace to every performance.
Let's listen to this beautiful composition.
प्रिय दोस्तो,
नमस्कार।
आज मैं जिस शख्सियत की रचना को संगीतबद्ध करके आपकी सेवा में उपस्थित हो रहा हूं, वे हैं कवि/साहित्यकार श्री बलनील देवम् जी।
इन्होंने 1971में अपनी लेखन- प्रक्रिया का शुभारंभ किया। इन्हें उस समय के दिग्गज साहित्यकारों विशेष कर अशोक जेरथ और ओ.पी.शर्मा जी का भरपूर सानिध्य प्राप्त हुआ और उनसे सीखने का सुअवसर भी मिला। इनके तीन काव्य संग्रह 'अंतिम युद्ध की चाह','आग जल रही है 'और' धूप की तरह खिला वसंत', और एक कहानी संग्रह 'उल्कापात' प्रकाशित हो चुके हैं। इनके 'वर्तमान की तरह खिला वसंत''काव्य-संग्रह को जे.एंड कल्चरल अकैडमी द्वारा 1982 में पुरस्कृत भी किया जा चुका है।
आज इनकी एक रचना को संगीतबद्ध करके मैं स्वयं को गौरवान्वित महसूस कर रहा हूं।
इनकी रचना को अपने दिलकश अंदाज़ और मधुर स्वर से संवारा है लवली चंद्रा जी ने।
आइये सुनते हैं बलनील देवम् जी की ये सुंदर रचना।
Dear Friends,
Warm greetings to you all.
Today, I feel deeply honored to present a heartfelt composition by a remarkable literary personality—a distinguished poet and scholar of Hindi, Urdu, and English, and my dear childhood friend, Yog Rahi Gupta. With nine published works to his credit and four more soon to enrich the literary world, his creative journey is both inspiring and profound.
Although he now resides in Canada for almost five decades, his heart remains forever bound to Jammu. It is often said that while he lives abroad, his soul continues to wander through the streets and memories of his homeland.
The Dogri poem we present today is a soulful expression of that very longing and nostalgia. The composition has been brought to life by the divine and melodious voice of the renowned singer, Lovely Chandra whose rendition adds depth and emotion to every word.
This song gently carries us through the nostalgic lanes of Jammu—filled with the warmth of a mother’s love and the echoes of laughter shared with childhood friends. Truly, Jammu’s charm is eternal, untouched by distance or time.
I invite you all to listen, feel, and relive this beautiful melody.
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