Manu
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, Bihar, 19 Aug 2020
1. #नेहा, सुमन, निक्की, दीपा! समस्तीपुर के नए पंख बिहार को गति देने के लिए तैयार! राह चलते नई यंग लेडीज़ मुस्कुराई भीं, ऑटोग्राफ़ भी लिया और बहुत बड़ी ज़िम्मेदारी का एहसास भी दिलाती चली गयीं। आपके लिए ही बिहार बदलना है, जो हमारे जेनरेशन को नहीं मिला वो लाइफ़ आप एंजॉय करें!
2. #समस्तीपुर के मोहिउद्दीननगर प्रखंड के चापर गाँव में शासन की विफलता के कई आयाम - बाढ़ के कारण ख़रीफ़ की फसल नहीं हो पाती, आर्सेनिक युक्त पानी से बढ़ती कैंसर की समस्या, और पूरे मोहिउद्दीन नगर में हेल्थ सिस्टम चौपट होने से 40000 जनसंख्या प्रभावित! लोगों और शासन के बीच नये सिरे से रिश्ते बनाने का समय है जहां ज़िंदगी की वैल्यू समझी जाय और भावनाओं की भी!
3.“ #रुसि चलली भवानी तेजि महेस....” मैथिल कवि-कोकिल के धाम में बिहार “तोहर शपथ...!”
4.“ #सभी नेता एक ही थैली के चट्टे-बट्टे हैं। मैडम, इस बार युवाओं ने मन बना लिया है कि परिवर्तन ज़रूरी है।” समस्तीपुर के विद्यापतिनगर प्रखंड के बढौना ग्राम में कार्यकर्ताओं के साथ।
5. #मिथिला की स्वागत-परंपरा से बच पाना मुश्किल है, वो भी मिथिला की मुखर देवियाँ! कुबौलीराम, पूसा में स्टेट टीईटी परीक्षा के गड़बड़झाले को ठीक करने से लेकर टूटे सड़क के निर्माण तक, महिलाओं को अब पता है कि उन्हें असली वाला विकास और खुशहाल परिवार चाहिये।
6. #पूसा में बिहार के युवा क्रांतिकारी शहीद खुदीराम बोस के साथ! आज बिहार को वैसे ही युवा खून की ज़रूरत है जो जाति-धर्म आधारित राजनीति के नफ़ा-नुक़सान वाले खेल के नियम को बदलें!
7. #काग़ज़ की फ़ैक्ट्री न काग़ज़ पर बची न ज़मीन पर! 1954 में जितवारपुर में स्थापित समस्तीपुर का ऐतिहासिक ‘ठाकुर पेपर मिल’ के काग़ज़ का बाज़ार कभी पूरे देश में था। करोड़ों की इकॉनॉमी, हज़ारों परिवार का रोज़गार, लेकिन श्रमिकों को बकाया तक नहीं मिला और आज खंडहर भी नहीं बचा। इनसे तो कुछ सम्भाला नहीं, पर समस्तीपुर के इंडस्ट्रीज की वापसी का समय है 2020-30!
8. की समस्तीपुर सेंट्रल सुगर मिल 1998 में मार दी गई। 808 टन प्रतिदिन गन्ना क्रशिंग वाला इम्पोर्टेड प्लांट, 20 एकड़ ज़मीन और बकाये वेतन, पीएफ की आस में हज़ारों श्रमिकों-कर्मियों के परिवारों का जीवन - सब बर्बाद हुए - बिहार की तरह! पहला 15 साल तो कुशासन था, दूसरे 15 के तथाकथित सुशासन में क्या हुआ? औने-पौने दाम में अरबों की ज़मीन अभी लीज़ पर दे दी गई और स्थानीय लोग आशंकित कि इंडस्ट्री की जगह रियल एस्टेट आएगा! अब असली शासन और इंडस्ट्री की वापसी का समय!
9. #मुक्तापुर, समस्तीपुर का रामेश्वर जूट मिल, उत्तर बिहार का सबसे बड़ा, दरभंगा महाराज द्वारा 1926 में स्थापित, 91 साल बाद 2017 के 'सुशासन' में बंद! कुल 80 एकड़ का विशाल कैम्पस, महँगा ऐतिहासिक प्लांट, 5000 कामगारों के परिवारों की ज़िंदगी का आसरा, अक्षम बिहार सरकार ने मिल के करोड़ों रुपए नहीं दिए, और आज यह बियावान जंगल बन रहा है। मज़दूरों को चार साल से वेतन नहीं, हज़ारों परिवार असहाय और बिहार सरकार अपने आर्थिक लॉकडाउन का ग्लोबल मॉडल पेश कर रही। सरकार हटाने और मिल को खोलने का वक्त आ गया है, एक ही साथ, और हाँ, शोषित मज़दूरों की मज़दूरी बढ़ाकर ही!
~ 📝 पुष्पम प्रिया चौधरी
Plurals Party के खिलाफ धर्म के नाम पर हो रहे भ्रामक प्रचार पर पर विशेष लाइव-
अतिथि श्री सौरभ श्रीवास्तव जी (Assistant Secretary) Public Liasion Team और Lokesh Pushkar जी।
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