Ajay Kumar
Ajay studio
|||| कृष्ण जन्माष्टमी विशेष __वस्त्रहरण से रासलीला तक |||
(सन्दर्भ: विष्णु पुराण अंश 5 अध्याय 13 एवम् भागवत पुराण)
【Warning: adult contents】
चलिए शुरु करते है...
युवतियां यमुनाजल में नंगी खड़ी होकर स्नान कर रही है उनके वस्त्र घाट पर रक्खे हुए है उन्हें लेकर कृष्णा कदंब वृक्ष पर चढ़ जाते है ऊपर से कहते है _________
||भोभो गोपालिका: नग्न: इदानीं कि करिष्यथ||
ये नग्नओ! अब तुम लोग क्या करोगी ?
तब राधा सखियों को आज्ञा देती है की चलो इस रसिया को पकड़कर बांधो बस
|| सर्वाः राधाज्ञाया पूर्णं समुत्थाय
प्रजाग्यमुर्गोपिका: नग्नः योनिमाच्छाद्ध पाणिना ||
सभी युवतियां हाथ से अपने गुप्तांग ढककर उन्हें पकड़ने चलती है । परन्तु रसिया कृष्णा इस फ़ौज का सामना करने को तैयार ही थे । और बोले ----
||युष्माकमिश्वरी राधा: किं कारिस्याती मेधुना ?||
तुम लोगो की लीडरानी राधा क्या कर लेती है सो देखता हूँ।
||श्रुत्त्वा जहास सा राधा भबुह कामपीड़िता !|||
यह सुनते ही राधा का क्रोध काम में परिणित हो जाता है और उसके बाद तो...
||नग्नः क्रीडाभिरासक्ता: श्रीकृष्णार्पितमानसः ||
नायक और नायिकाओं की इच्छा पूरी होती है और कथा सुनाने वाली बालाओं की इच्छा भी पूरी इसके लिए पुराणकर्ता कहते है " कुमारिया साल भरभक्तिपूर्वक यह श्लोक सुने तो निश्चित ही कोई वैसा ही रसिया उन्हें मिल जायेगा..
#अगर आपके मन में भी रासलीला को लेकर कुछ गुढ़ तात्पर्य लगता है तो सुनिए------------
|||पुनः प्रजग्गमुस्ता:....................................... कुरु पत्रवली मिति||| (ब्रम्हवैवर्त पुराण )
पूर्णिमा की रात, यमुना का तट, एकांत स्थान, युवतियां निसंकोच केलि कर रही है , कोई मुरली छीन लेती है , कोई गोद में बैठ जाती है, कोई कूद कर कंधे पर चढ़ जाती, कोई कहती गाल में दात काटो इत्यादि
क्या हुआ मजा नहीं आया तो आगे सुनो ---------------------
||||कचित कामतुरा कृष्णं ……… दर्शयामास कामत :||||| (ब्रम्हवैवर्त पुराण )
युवतियां कामुक होकर लज्जा त्याग देती है, कोई उनको नग्न कर अपने और खीच लेती है, कोई गाल और होठ चूमती है , कोई छाती से सटा लेती है, कोई अपनी सखी को नंगी कर उनपर ठेल देती है, कोई स्वयं समर्पित हो जाती है, ऐसा लगता है इसी रास-चक्र से भैरवी - चक्र की उत्पात्ति हुयी होगी
#कुछ लोग का मानना है की कृष्णा योगीस्वर थे? तो कहूँगा उनके जैसा भोगीस्वर आज तक नहीं हुआ..
|| स्थले रतिरसं कृत्वा जगामयमुनाजलम. …कृत्वा वछासी नग्नाम च चुचुम्ब च पुनः पुनः ||(ब्रम्हवैवर्त पुराण)
इन श्लोको में कामुकता से परिपूर्ण ऐसे दृश्य का वर्णन है की वैसी आज तक कोई पोर्न मूवी भी शायद ही बनी होगी फिर भी जिन्हे लगता है की यह योग है भोग नहीं तो उनकी बुद्धि का क्या करे..
आगे क्या होता है सुनिए--------------------------
|||माधवो राधया ……… किंचित तु बभूव ह !|| (ब्रम्हवैवर्त पुराण)
लगातार तीस दिन और तीस रात रमण(सेक्स) करते रहे फिर भी मन नहीं भरा वह दृस्य देखने के लिए लिए आकाश में देवी देवताओं का मेला लग गया देवतागण विस्मय विमुग्ध हो गए देवियाँ सौतिया डाह से जलने लगी ।
इस पर पुराणकार टिप्पणी करते है जैसे घी की धारा से अग्नि की ज्वाला शांत नहीं होती उसी तरह सम्भोग से कामिनी की किसी तरह तृप्ति नहीं होती
~~आज जिस तरह से जन्माष्ठमी के दिन महिलाओ से छेड़छाड़ और अभद्र व्यवहार की घटनाएं आये दिन पढ़ने को मिलती रहती है मुझे तो यही लगता है ये कही न कही कृष्णाचरित्र से भावविभोर होकर ऐसा कर बैठते है और बाद में जेल जाकर पछताते है|
उदाहरण के लिए आशाराम और उनके बेटे नारायण ने तो हद ही कर दी खुद को ही कृष्णा समझकर रास करने लगे जिसकी वजह से आज जेल में समय व्यतीत कर रहे है वैसे तो कृष्णा का जेल से बहुत पुराना सम्बन्ध है लेकिन फर्क यह है की वह पैदा हुए जेल में और आसाराम और नारायण शायद अंतिम सास ले
आप लोगो से निवेदन है पढ़कर आनंद ले कृष्ण चरित्र में घुसने का जोखिम न उठाये..
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सागर गौतम उपद्रवी राज *****
22/04/2022
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