Radhey Ror -Loser No.1
“Log muje ‘Bura’ kahete hai, Par muje bharosa hai ki Mein ‘Sabse Bura’ hu.”
ये क्या सूरज पे घर बनाना और उसपे छाँव तलाश करना..
खड़े भी होना तो दलदलों पे फिर अपने पाँव तलाश करना !
निकलकर शहरों में आ भी जाना चमकते ख्वाबों को साथ लेकर..
बुलंद ओ बाला इमारतों में फिर अपने गांव तलाश करना !
बसताड़ा
वो साहिलों पे गाने वाले क्या हुए
वो कश्तियाँ चलाने वाले क्या हुए
वो सुब्ह आते आते रह गई कहाँ
जो क़ाफ़िले थे आने वाले क्या हुए
मैं उन की राह देखता हूँ रात भर
वो रौशनी दिखाने वाले क्या हुए
ये कौन लोग हैं मिरे इधर उधर
वो दोस्ती निभाने वाले क्या हुए
वो दिल में खुबने वाली आँखें क्या हुईं
वो होंट मुस्कुराने वाले क्या हुए
इमारतें तो जल के राख हो गईं
इमारतें बनाने वाले क्या हुए
अकेले घर से पूछती है बे-कसी
तिरा दिया जलाने वाले क्या हुए
ये आप हम तो बोझ हैं ज़मीन का
ज़मीं का बोझ उठाने वाले क्या हुए
Par yeh munn mayoos hai bohot
Hungamay mein girift
Iss shorr mein, iss bheer mein
Akela hai munn
Akela hoon main
In the midst of chaos, I find myself lost and alone.
The world around me is a blur, but my heart remains steadfast.
Amongst the crowd, I stand solitary, yet unwavering.
Tumne Naraz Hona Chhod Diya,
Itni Narazgi Bhi Theek Nahi.
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Karnal