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16/08/2020

*अटल बिहारी वाजपेयी जी के व्यक्तित्व से जुड़ी दिलचस्प कहानियां*
चमत्कारिक व्यक्तित्व

बात 1957 की है जब अटल ब‍िहारी वाजपेयी बलरामपुर लोकसभा सीट से 10 हजार वोटों से जीतकर पहली बार लोकसभा पहुंचे थे. पिछली हार से सबक लेते हुए 1962 के आम चुनाव में कांग्रेस ने अटल बिहारी वाजपेयी को हराने के लिए गांधीवादी शुभद्रा जोशी को उनके ख‍िलाफ मैदान में उतारा था. दोनों ही भारत छोड़ो आंदोलन का हिस्सा रहे थे, लेकिन विचारधारा के स्तर पर अलग थे.

पहली बार संसद पहुंचे युवा अटल का भाषण सुनकर तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू बेहद प्रभावित हुए. वे उन्हें भविष्य का प्रधानमंत्री मानते थे. वाजपेयी को बलरामपुर सीट से कांग्रेस की जीत के लि‍ए उन्होंने बड़ा खतरा माना. मतदाताओं पर अपना प्रभाव जमाने के लिए उन्होंने शुभद्रा जोशी के पक्ष में लोक्रप्रिय फिल्म अभ‍िनेता बलराज साहनी से चुनाव प्रचार कराया. नतीजतन, वाजपेयी चुनाव हार गए.

अटल बिहारी वाजपेयी अपनी हाजिर जवाबी से हमेशा सुर्खियों में रहते थे. एक बार जब संसद में इंदिरा गांधी ने चर्चा के दौरान वाजपेयी के बारे में कहा कि वो हिटलर की तरह भाषण देते हैं और हाथ लहरा-लहरा कर अपनी बात रखते हैं. इसका जवाब देते हुए बाद में अटल ने कहा कि 'इंदिरा जी, हाथ हिलाकर तो सभी भाषण देते हैं, क्या कभी आपने किसी को पैर हिलाकर भाषण देते हुए भी सुना है?' इंदिरा गांधी जैसी शख्सियत को ऐसा जवाब देने का साहस सिर्फ अटल ही दिखा सकते थे.
*1998 में पोखरण II*

यह बात हैं सन्न 1998 की जब अटल बिहारी वाजपेयी देश के प्रधानमंत्री थे, पहली बार परमाणु परिक्षण सन्न 1995 में फेल होने के बाद वो अटल जी ही थे जिनके शासनकाल के दौरान भारत ने एक बार फिर से परमाणु परिक्षण किया और सन्न 1998 में भारत एक परमाणु संपन्न राष्ट्र बना.यह सम्पन्नता भारत को विश्व के सभी विकसित देशों की क़तर में लाकर खड़ा कर दिया. पोखरण में सफलतापूर्वक हुए इस टेस्ट ने अमेरिकी राष्ट्रपति का गुरुड़ भी चकनाचूर कर दिया था जो कभी नहीं चाहते थे की भारत एक परमाणु शक्ति बने.

खासकर ठंडई से तो उनका लगाव जगजाहिर है. मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल गौर याद करते हैं कि जब वो नेता प्रतिपक्ष थे तो इंदौर से उज्जैन कार से आए. उज्जैन में अटलजी कहने लगे कि गोपाल मंदिर ले चलो.

गौर ने इस घटना का जिक्र करते हुए बताया, "अटल जी ने कहा तांगे में ले चलो कार में नहीं. कोई देख ना पाए. बंद तांगे होते हैं. कहने लगे भांग का घोंटा तीन गिलास ले आओ. दो गिलास मैं पीयूंगा और बादाम-किशमिश डाल दो. एक ग्लास तुम पीना. मस्त आदमी, बहुत बड़े दिल के आदमी. उनसे हंसी-मजाक कुछ भी कर सकते थे आप. इतना बड़ा आदमी आज हिन्दुस्तान में कोई नहीं है."
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11/08/2020

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