Gaur Rajput's -pamsa

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Suryvanhi dharm rakshak

30/03/2025

गौड़ाटी के महाराजा रघुनाथ सिंहजी पुनलौता के ठाकुर सांवलदास मेड़तिया का छोटा पुत्र व मीरा बाई के भाई व मेड़ता के राजा राव जयमल के पुत्र गोविन्ददास का पोता था। वह जयपुर के खास बारह कोटड़ी राजघराने बगरू के चत्रभुज राजवातों का भांजा था और उसकी दूसरी रानी रेवासा कि लाड्खानोत शेखावत राजकुमारी थी। वो दक्षिण में औरंगजेब के साथ था और उत्तराधिकार के उज्जैन और धोलपुर के युद्धों में भी उनके पक्ष में लड़ा था। उसने राजवात व शेखावत कछवाहों के साथ मिलकर संयुक्त शक्ति से गौडों के ठिकानों पर आक्रमण कर संवत 1717 (1659 ई) में उनकी पैत्रिक जागीरें छीन ली। मारोठ, पांचोता, पांचवा, लूणवा, मिठडी, भारिजौ, गोरयां, डूंगरयां, दलेलपुरो, घाटवौ, खौरंडी, हुडील, चितावा आदि को मेड़तीयों, राजवतों और शेखावतों ने बाँट लिया। तत्पश्चात बादशाह औरंगजेब ने महाराजा की पदवी व गौडावाटी का परगना ठाकुर रघुनाथ सिंह मेड़तिया को 140 गावों के वतन के रूप में दियागौड़ाटी के महाराजा रघुनाथ सिंहजी पुनलौता के ठाकुर सांवलदास मेड़तिया का छोटा पुत्र व मीरा बाई के भाई व मेड़ता के राजा राव जयमल के पुत्र गोविन्ददास का पोता था। वह जयपुर के खास बारह कोटड़ी राजघराने बगरू के चत्रभुज राजवातों का भांजा था और उसकी दूसरी रानी रेवासा कि लाड्खानोत शेखावत राजकुमारी थी। वो दक्षिण में औरंगजेब के साथ था और उत्तराधिकार के उज्जैन और धोलपुर के युद्धों में भी उनके पक्ष में लड़ा था। उसने राजवात व शेखावत कछवाहों के साथ मिलकर संयुक्त शक्ति से गौडों के ठिकानों पर आक्रमण कर संवत 1717 (1659 ई) में उनकी पैत्रिक जागीरें छीन ली। मारोठ, पांचोता, पांचवा, लूणवा, मिठडी, भारिजौ, गोरयां, डूंगरयां, दलेलपुरो, घाटवौ, खौरंडी, हुडील, चितावा आदि को मेड़तीयों, राजवतों और शेखावतों ने बाँट लिया। तत्पश्चात बादशाह औरंगजेब ने महाराजा की पदवी व गौडावाटी का परगना ठाकुर रघुनाथ सिंह मेड़तिया को 140 गावों के वतन के रूप में दिया
गौड़ाटी के महाराजा रघुनाथ सिंहजी पुनलौता के ठाकुर सांवलदास मेड़तिया का छोटा पुत्र व मीरा बाई के भाई व मेड़ता के राजा राव जयमल के पुत्र गोविन्ददास का पोता था। वह जयपुर के खास बारह कोटड़ी राजघराने बगरू के चत्रभुज राजवातों का भांजा था और उसकी दूसरी रानी रेवासा कि लाड्खानोत शेखावत राजकुमारी थी। वो दक्षिण में औरंगजेब के साथ था और उत्तराधिकार के उज्जैन और धोलपुर के युद्धों में भी उनके पक्ष में लड़ा था। उसने राजवात व शेखावत कछवाहों के साथ मिलकर संयुक्त शक्ति से गौडों के ठिकानों पर आक्रमण कर संवत 1717 (1659 ई) में उनकी पैत्रिक जागीरें छीन ली। मारोठ, पांचोता, पांचवा, लूणवा, मिठडी, भारिजौ, गोरयां, डूंगरयां, दलेलपुरो, घाटवौ, खौरंडी, हुडील, चितावा आदि को मेड़तीयों, राजवतों और शेखावतों ने बाँट लिया। तत्पश्चात बादशाह औरंगजेब ने महाराजा की पदवी व गौडावाटी का परगना ठाकुर रघुनाथ सिंह मेड़तिया को 140 गावों के वतन के रूप में दिया
धर्मत के युद्ध के बाद जब औरंगजेब दिल्ली की गड्डी पर बैठा तो रघुनाथ मेड़तिया को मारोठ का परगना इनाम में दे दिया क्योकी गौड़ आखिरी तक औरंगजेब के खिलाफ लड़ते रहे

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गौड़ रॉयल राजपूत

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