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14/04/2026
कोटी-कोटी नमन! 🙏
आज हम आधुनिक भारत के शिल्पकार डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर जी की जयंती मना रहे हैं। अक्सर लोग उन्हें सीमाओं में बांध देते हैं, लेकिन सच तो यह है कि बाबासाहेब का संघर्ष हर उस व्यक्ति के लिए था जिसे समाज की मुख्यधारा से दूर रखा गया।
चाहे वो किसानों के अधिकार हों, फैक्ट्रियों में काम करने वाले मजदूरों के काम के घंटे तय करना हो, या महिलाओं को संपत्ति में अधिकार दिलाना—बाबासाहेब की दूरदृष्टि ने हम सबको सशक्त बनाया।
उन्होंने सिखाया कि "एक सफल क्रांति के लिए केवल असंतोष का होना काफी नहीं है, बल्कि न्याय और राजनीतिक अधिकारों में अटूट विश्वास का होना आवश्यक है।"
आइए, आज जाति और पंथ के भेदों को भुलाकर एक ऐसे भारत के निर्माण में जुट जाएं, जहाँ 'मानवता' ही सबसे बड़ा धर्म हो।
रमज़ान के महीने में रोज़ों की समाप्ति का प्रतीक त्योहार, ईद-उल-फ़ित्र, आज मनाया जा रहा है।
यह त्योहार एकजुटता, शांति, करुणा, त्याग, सत्य और मानवता का प्रतीक है। हालाँकि, यह अत्यंत निराशाजनक है कि यह त्योहार आज युद्ध की छाया में मनाया जा रहा है।
इसलिए यह अत्यंत महत्वपूर्ण है कि संयुक्त राष्ट्र (UN) सहित सभी देशों की वैश्विक एकजुटता, अमेरिका और इज़राइल के इस अवांछित गठबंधन की निंदा करे और इसे रोके।
हमारा देश अतीत में साम्राज्यवादी महाशक्तियों की प्रवृत्तियों की निंदा करने में अग्रणी रहा है। लेकिन आज, यह अपने उस महान अतीत की एक कमज़ोर परछाई मात्र बनकर रह गया है। इसने न तो ईरान पर हुए कायरतापूर्ण हमले की निंदा की, और न ही उस घटना की, जब हमारे देश की यात्रा से लौटते समय हिंद महासागर में ईरान का एक नौसैनिक जहाज़ डूब गया था।
आइए, इस ईद के अवसर पर, हम शांति की स्थापना हेतु युद्ध-पिपासु देशों पर दबाव बनाने के लिए मज़दूर वर्ग की एकता को सुदृढ़ करें।
आप सभी को ईद मुबारक... निजीकरण और श्रम संहिताओं (Labour Codes) के विरुद्ध संघर्ष करें।
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