Hasan Waseem

Hasan Waseem

Share

Social Worker

04/03/2026

इनके लिए कुछ ?

02/03/2026

जो भी मसरूफ़ ए सलाम ए शोहदा रहता है, वो तो रहता नहीं मगर नाम सदा रहता है।

02/03/2026

अयातुल्लाह सैय्यद अली हुसैनी खमेनेई की शहादत भी दुश्मनों के मुंह पर ज़ोरदार तमाचा मार गई।

दुनिया ने सोचा था कि वे डर जाएंगे, दुनिया ने सोचा था कि वे छुप जाएंगे। लेकिन दुनिया यह भूल गई कि जिसका नेता इमाम हुसैन (अ.स) हो, वह मौत से नहीं, बल्कि ज़िल्लत की ज़िंदगी से डरता है।

अयातुल्लाह सैय्यद अली खमेनेई की शहादत महज़ एक मौत नहीं, बल्कि ज़ालिमों के मुँह पर एक ऐसा तमाचा है जिसकी गूँज सदियों तक सुनाई देगी।
मैदान नहीं छोड़ा, इतिहास रच दिया
दुश्मन उनके खून का प्यासा था, ख़तरा सर पर मंडरा रहा था। सुरक्षा प्रमुखों ने मिन्नतें कीं, सुरक्षित स्थानों (Safe Locations) पर जाने की सलाह दी गई, बंकरों के विकल्प दिए गए। लेकिन वह 'सैय्यद' जिसने अपनी पूरी उम्र मौलए कायनात अली इब्ने अबी तालिब (अ.स) के नक़्शे-कदम पर गुज़ारी हो, वह पीठ दिखाकर कैसे भाग सकता था?

वे चाहते तो महलों में छुप सकते थे।
वे चाहते तो दूसरे मुल्कों में शरण ले सकते थे। मगर उन्होंने 'मैदान' को चुना। उन्होंने अपने घर की दहलीज पर शहादत को गले लगाया ताकि दुनिया को बता सकें कि "हक का रास्ता बुज़दिली का रास्ता नहीं है।"

दुश्मन की हार, मज़लूमों की जीत
अमेरिका, इसराइल और पूरा पश्चिम जो यह ख्वाब देख रहे थे कि वे एक रहबर को डरा देंगे, आज अपनी हार पर मातम मना रहे हैं।

उनकी शहादत ने यह साबित कर दिया कि "हौसले बंकरों में नहीं, हुसैनियत के जज़्बे में होते हैं।"

उनकी इस कुर्बानी ने दुनिया के हर कमज़ोर और मज़लूम इंसान को एक नई ताक़त दी है।

आज ज़ालिमों के दिल दहल चुके हैं क्योंकि उन्होंने एक इंसान को तो मार दिया, पर उस 'विचार' (Ideology) को अमर कर दिया जो कभी झुकना नहीं जानती।

शहादत मुबारक हो ऐ सैय्यद! आपने बता दिया कि हम 'हैदर-ए-करार' के चाहने वाले हैं, जो शहीद तो हो सकते हैं पर सर नहीं झुका सकते।
सलाम हो तुम पर ऐ शहीद-ए-राह-ए-हक! 🫡

01/03/2026

"आज...
दुनिया फिर से करबला की याद में डूब गई है।
हमारा आध्यात्मिक पिता, उम्मत का रहबर-ए-आज़म, हक़ की मिसाल...
अयातुल्लाह सैय्यद अली ख़ामेनेई (रहमतुल्लाह अलैहि) शहीद हो गए।
दिल फट रहा है।
आँखें बह रही हैं, सीना जल रहा है।
वो जिसकी आवाज़ में फ़लस्तीन की सिसकियाँ गूंजती थीं,
जिसकी हिम्मत से ज़ुल्म काँपता था,
जिसकी एक मुस्कान से करोड़ों को सब्र मिलता था...
आज वो अल्लाह की राह में शहीद होकर जा मिले।
वे कभी नहीं झुके।
वे कभी बयअत नहीं की किसी यज़ीद की।
वे इमाम हुसैन (अ.स.) की तरह खड़े रहे, और कहा –
न सिर्फ़ ज़बान से, बल्कि अपनी ज़िंदगी और शहादत से:
'मुझ जैसा कभी तुझ जैसा की बयअत नहीं करेगा।'
यह जुमला सिर्फ़ यज़ीद के लिए नहीं था...
यह क़यामत तक के हर यज़ीद के लिए था।
हर ज़ालिम के लिए था, जो हक़ को कुचलना चाहता है।
और आज हमारे रहबर ने इसे अपनी शहादत से साबित कर दिया।

वे कहते थे: 'शहादत अल्लाह के रास्ते में जद्दोजहद का इनाम है... और यह सौदा कभी घाटा नहीं देता।'
शायरी (दिल को चीर देने वाली):
ख़ामेनेई शहीद हुए, मगर उनकी रूह तो करबला में बस गई,
जैसे हुसैन (अ.स.) ने कहा था – 'मुझ जैसा तुझ जैसा की बयअत नहीं करेगा।'

ख़ून बहा है उनकी राह पर, अब इंक़लाब की लौ जलेगी हर तरफ़,
शहीद मरते नहीं... वे अमर हो जाते हैं, हर सीनों में हुसैनी जज़्बा जगाते हैं।
ऐ मेरे रब...
उनकी शहादत को क़बूल फ़रमा।
उन्हें जन्नतुल फ़िरदौस में हुसैन (अ.स.) के साथ आला मक़ाम अता फ़रमा।
उनके ख़ून को करबला के शहीदों की क़तार में शामिल कर।
और हमें उनकी तरह हुसैनी जज़्बा दे – कि कभी भी किसी यज़ीद की बयअत न करें, बल्कि हक़ के लिए सीना तानकर खड़े रहें।
आज हम रो रहे हैं... मगर ये आंसू कमज़ोरी नहीं।
ये आंसू हुसैनी जज़्बे की निशानी हैं।
ये आंसू अब जिहाद की पुकार बनेंगे।
ये आंसू इंसाफ़ का सैलाब लाएंगे – फ़लस्तीन तक, यमन तक, हर ज़ुल्मग्रस्त जगह तक।

इन्ना लिल्लाहि व इन्ना इलैहि राजिऊन।
अल्लाहुम्मा सल्लि अला मुहम्मद व आलि मुहम्मद।
शहादत मुबारक हो, ऐ हमारे प्यारे रहबर...
आपने हुसैन (अ.स.) की राह को ज़िंदा रखा।
हम तैयार हैं... आपकी और हुसैन (अ.स.) की राह पर।
कभी बयअत नहीं करेंगे किसी यज़ीद की।
🤲🖤😭💔
#शहादत_ए_इमाम_खामेनेई
#मुझ_जैसा_तुझ_जैसा_की_बयअत_नहीं
#हुसैनी_राह_पर
#करबला_की_मिसाल

Want your public figure to be the top-listed Public Figure in Lucknow?
Click here to claim your Sponsored Listing.

Category

Telephone

Website

Address


Lucknow