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05/07/2026
आज हम जिस खुशबूदार और झाग वाले साबुन का इस्तेमाल करते हैं, उसके विकास का इतिहास इस्लामी स्वर्ण युग से भी जुड़ा माना जाता है। इतिहासकारों के अनुसार, 9वीं–10वीं सदी के दौरान मुस्लिम रसायनविदों ने साबुन बनाने की तकनीकों को काफी विकसित किया।
रसायनशास्त्री जाबिर इब्न हय्यान (Geber) और अल-राज़ी के कार्यों को रसायन विज्ञान के विकास में महत्वपूर्ण माना जाता है। इसी दौर में जैतून के तेल, वनस्पति वसा और क्षारीय पदार्थ (Alkali) के उपयोग से बेहतर गुणवत्ता वाले ठोस साबुन बनाने की विधियों का उल्लेख मिलता है।
बाद में सीरिया के अलेप्पो (Aleppo) शहर का जैतून और लॉरेल ऑयल से बनने वाला साबुन दुनिया भर में प्रसिद्ध हुआ। अलेप्पो साबुन का व्यापार मध्य पूर्व से यूरोप तक फैला और इसे दुनिया की सबसे पुरानी पारंपरिक साबुन निर्माण परंपराओं में गिना जाता है।
हालांकि, इतिहासकार यह भी बताते हैं कि सफाई के लिए साबुन जैसे पदार्थों का उपयोग प्राचीन मेसोपोटामिया, मिस्र और रोमन सभ्यताओं में भी अलग-अलग रूपों में होता था। इस्लामी स्वर्ण युग का योगदान मुख्य रूप से साबुन निर्माण की तकनीक को बेहतर बनाने और उसके बड़े पैमाने पर उत्पादन में माना जाता है।
Reference: Encyclopaedia Britannica | Museum of the History of Science | Journal of Chemical Education | History of Science sources on Aleppo Soap
05/07/2026
ब्रिटेन के रहने वाले जोसेफ जॉनसन ने इस्लाम अपनाने के बाद अपने अनुभव साझा करते हुए कहा कि उनके पास जीवन में किसी चीज़ की कमी नहीं थी, लेकिन दिल का सुकून और सच्ची खुशी उन्हें तब मिली, जब उन्होंने इस्लाम को अपनाया।
जोसेफ जॉनसन के अनुसार, इस्लाम का अध्ययन करने और उसके सिद्धांतों को समझने के बाद उन्होंने यह फैसला लिया। उनका कहना है कि इस्लाम ने उन्हें जीवन का नया उद्देश्य, आत्मिक शांति और बेहतर दिशा दी।
उनका यह बयान सोशल मीडिया पर भी चर्चा का विषय बना हुआ है। कई लोगों ने उनके अनुभव पर अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं दी हैं, जबकि धार्मिक आस्था और व्यक्तिगत विश्वास को हर व्यक्ति का निजी निर्णय माना जाता है।
Reference: जोसेफ जॉनसन का सार्वजनिक इंटरव्यू/वीडियो बयान (यदि उपलब्ध)
05/07/2026
उत्तर प्रदेश के बाराबंकी से एक गंभीर मामला सामने आया है। सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो के आधार पर दावा किया जा रहा है कि कुछ लोगों ने एक मुस्लिम युवक के साथ मारपीट की और उसे कथित तौर पर बछड़े के सामने सजदा करने के लिए मजबूर किया। इस वीडियो और उससे जुड़े दावों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है।
आरोप है कि युवक ने कथित आपत्तिजनक टिप्पणी के लिए माफी भी मांग ली थी, लेकिन इसके बावजूद उसके साथ मारपीट की गई और सार्वजनिक रूप से अपमानित किया गया। यह भी दावा किया गया है कि युवक के बुजुर्ग पिता को फोन पर अभद्र भाषा का सामना करना पड़ा।
इस घटना को लेकर सोशल मीडिया पर लोगों में नाराज़गी देखी जा रही है और निष्पक्ष जांच के साथ दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग उठ रही है। कांग्रेस सांसद सैयद नसीर हुसैन ने भी इस मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए इसे मानव गरिमा और संवैधानिक अधिकारों से जुड़ा गंभीर विषय बताया तथा सरकार से कार्रवाई की मांग की है।
वहीं, बाराबंकी पुलिस का कहना है कि उसे इस घटना की जानकारी नहीं थी। फिलहाल मामले में आधिकारिक जांच और पुलिस की विस्तृत प्रतिक्रिया का इंतजार है। यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है।
Reference: वायरल वीडियो (स्वतंत्र पुष्टि शेष) | बाराबंकी पुलिस का बयान (यदि उपलब्ध) | कांग्रेस सांसद सैयद नसीर हुसैन का सार्वजनिक बयान
05/07/2026
सीरिया में लंबे समय से जारी युद्ध और तबाही के बीच आयशेगुल अक्सू का एक भावुक संदेश सामने आया है, जिसने दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींचा है। ग्राउंड जीरो से साझा किए गए अपने संदेश में उन्होंने युद्ध की भयावह तस्वीर बयान करते हुए कहा, "हम सीरिया में हैं... शायद आने वाली पीढ़ियां इस भयानक मंजर को सिर्फ इतिहास की किताबों में पढ़ेंगी।"
उन्होंने आगे कहा कि आज की पीढ़ी बमों, मिसाइलों, रॉकेटों और गोलियों के बीच गुज़रे इन कठिन दिनों को कभी नहीं भूल पाएगी। उनके मुताबिक, इस संघर्ष ने सिर्फ शहरों और इमारतों को ही नहीं, बल्कि लोगों के सपनों, परिवारों और उम्मीदों को भी गहरी चोट पहुंचाई है।
आयशेगुल अक्सू का यह संदेश युद्ध से प्रभावित लोगों की पीड़ा और उन हालात को सामने लाता है, जिन्हें लाखों लोग वर्षों से झेल रहे हैं। उनके शब्द इस बात की याद दिलाते हैं कि किसी भी संघर्ष की सबसे बड़ी कीमत आम नागरिकों को चुकानी पड़ती है।
(Reference): आयशेगुल अक्सू का सार्वजनिक वीडियो/बयान | अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स (यदि उपलब्ध)
05/07/2026
त्राल की बेटी का कमाल, मार्शल आर्ट में जीते 6 पदक
खेलो इंडिया पहल के तहत देशभर के युवा खिलाड़ी अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन कर रहे हैं। इसी कड़ी में जम्मू-कश्मीर के त्राल के बटनूर क्षेत्र की मार्शल आर्ट खिलाड़ी मुशीफा मुश्ताक ने अपनी मेहनत और बेहतरीन प्रदर्शन से सभी का ध्यान अपनी ओर खींचा है।
मुशीफा ने अब तक विभिन्न प्रतियोगिताओं में 2 स्वर्ण, 1 रजत और 3 कांस्य पदक जीतकर अपने क्षेत्र और परिवार का नाम रोशन किया है। उनकी इस उपलब्धि से पूरे इलाके में खुशी का माहौल है और लोग उन्हें लगातार बधाइयाँ दे रहे हैं।
मुशीफा की सफलता इस बात का उदाहरण है कि मेहनत, लगन और सही अवसर मिलने पर देश का हर युवा खिलाड़ी नई ऊंचाइयों तक पहुंच सकता है। खेलो इंडिया जैसी पहल युवा प्रतिभाओं को आगे बढ़ने का मजबूत मंच दे रही है।
संदर्भ (Reference): खेलो इंडिया पहल (भारत सरकार) | स्थानीय मीडिया रिपोर्ट्स | उपलब्ध स्थानीय जानकारी
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