Ananya Rai Parashar

Ananya Rai Parashar

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AUTHOR N POET
MOTIVATIONAL SPEAKER
Numerologists
REIKI HEALER
Social Worker

06/12/2023

फ़लक और भी हैं ज़मीं और भी हैं

ख़ुदा के हसीं जा-नशीं और भी हैं

मिरे ही लिए क्यों लिखो शा'इरी तुम

जहाँ में कई आफ़रीं और भी हैं

मुझे रश्क क्यों है कहानी पे अपने

मोहब्बत के क़िस्से हसीं और भी हैं

ये सूरज ये तारे ये चाँद और दुनिया

यहाँ हैं मगर क्या कहीं और भी हैं

'अनन्या' अभी साँप निकले नहीं सब

अभी बाक़ी कुछ आस्तीं और भी हैं

© Ananya Rai Parashar

06/04/2023

✌️️✌️️✌️️😉😉😍

11/10/2022

"एक महामारी ऐसी भी"

"महामारी" यह शब्द सुनते ही बिजली के तरंगों की भांति हमारे दिमाग़ में विचारों की रेस शुरू हो जाती है । किसी को किसी भयानक बिमारी के बाद का दृश्य नज़र आता है तो किसी को आपदा के बाद ज़मीन पर बिछी लाशें।
कैसा लगेगा सुनकर अगर मैं ऐसा कहूं कि एक ऐसी ही महामारी आज हम ९९% लोगों के अंदर पनप रही है और वही महामारी उनके स्वास्थय ,मान - सम्मान , विचारधारा , आत्मविश्वास, धन - दौलत सभी
मार्गों के बीच इकलौते अवरुद्ध का कारण है ।

अजीब लगना जायज़ है । शायद आप सब यह पड़कर मुझपर ज़ोर से हस सकते हैं लेकिन मैं फ़िर भी १०१% विश्वास के साथ हर बार यही कहूंगी कि आप और सफ़लता के बीच अगर कुछ रुकावट का कारण है तो वो सिर्फ़ आपके अंदर पनप रही यह महामारी जिस से आप शायद अवगत तो हैं लेकिन उसे एक महामारी के रूप में स्वीकारने को तैयार नहीं हैं ।
जी हां.... ,
और आपकी यह महामारी कुछ और नहीं बल्कि आपके अंदर पनप रहा आपका भय, आपके अंदर की घबराहट है ।

आप इस बात से अपरिचित हो सकते हैं लेकिन अंजान नहीं कि "व्यर्थ का पनप रहा भय आपके अंदर भ्रम पैदा करता है।" और इस कल्पित भय से हम अपनी परेशानी को और बढ़ा लेते हैं । और हमारा यही भय और यही भ्रम , यही घबराहट हमें महामारी से भी भीषण हानि पहुंचाता है । हमारी कामयाबी के बीच रोड़ा अटकाता है ।
हम सभी कामयाब होना चाहते हैं ,आगे बढ़ना चाहते हैं , हर किसी के लिए कामयाबी की परिभाषा उनके ज़रूरत के हिसाब से अलग हो सकती है । जैसे कि अगर मैने ज़िंदगी में आर्थिक तंगी महसूस की है तो मेरे लिए कामयाबी का मतलब ढेर सारा धन प्राप्त करना हो सकता है । ठीक उसी तरह अगर किसी की ज़िंदगी में शिक्षा का अभाव रहा है तो उसके लिए कामयाबी अच्छी शिक्षा ग्रहण करना , अपने बच्चों को अच्छी शिक्षा प्रदान करना हो सकता है । ऐसा कोई भी नहीं जो कुछ हासिल ना कर सके।
हम सभी की कुछ न कुछ इच्छा अवश्य होती है और हम उसे पूरा करने के लिए पूरी ताकत लगा देते हैं । कभी हम सफलता की सीढियों पर अव्वल खड़े होते हैं तो कभी निराशा हमारे कदम खींच लेती है । कुछ इस निराशा से ऊपर उठकर पुनः प्रयास करते हैं और कुछ के अंदर पनपने लगता है पुनः भय और होने लगता है खुद पर भ्रम । ऐसे लोगों को उस घड़ी यह नहीं भूलना चाहिए कि "एक आनंदमयी आशा और खुद पर अटल विश्वास ही उनका सबसे बड़ा पथ प्रदर्शक है ।"

लेकिन इस भय और भ्रम की महामारी से ग्रसित लोग यह भूल जाते हैं और शुरू कर देते हैं कोसना अपनी किस्मत को । इसमें उसका क्या दोष ??
भगवान ने सभी को एक सा बनाया है । और वो हम ही हैं जो नकारात्मक रवैये से अपने ओर आ रहे हर नए और सुनहरे मौके का गला घोंट देते हैं। ।
कुछ का कहना है कि हमनें अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए सब कुछ आजमा लिया लेकिन कभी सफ़लता नहीं मिलती । मेरे दोस्त , अगर आप पहले से ही मानसिक दरिद्रता को पाल -पोश कर फूलने फलने दोगे अपने जीवन में तो समृद्धि तो दूर जाएगी ही।

हर मनुष्य अपने नियम कानून तो याद रखते हैं लेकिन भूल जाते हैं कि हमारे मन का भी कोई नियम है । यह शरीर हमें उपहार स्वरूप विधाता ने प्रदान की है और इसके कुछ अपने कायदे कानून भी हैं ।

अगर इसी बात को उपनिषद् की भाषा में समझाऊं तो , "कठोपनिषद" में कहा गया है कि:-

आत्मानं रथिनं विद्धि
शरीरं रथमेव तु
बुद्धितु सारथि विध्दि
मन प्रग्रहमेव च
इंद्रियानि हयानांविषयास्तेषु गोचरान
आत्मेंद्रिय मनोयुक्तमू भोक्तेतत्याहुर्मनीषिणः।।

यानी आत्मा रथी है , बुद्धि उसका सारथी शरीर रथ है मन लगाम है । इंद्रियां घोड़े हैं , शब्दादि विषय ही मार्ग के चरागाह हैं।

सरल शब्दों में कहूं तो " मैं जो बोलती हूं मेरे विचार उस से प्रभावित होते हैं । वो विचार मेरे मन में जाते हैं । मेरा माइंड मेरे ब्रेन को बोलता है । मेरा ब्रेन मेरे बॉडी को ऑर्डर करता है और वो चीज़ ऑटोमेटिकली प्रोसेस होती है । "

" शब्दादि विषय ही मार्ग के चरागाह है ।"
यानी हम जो विचार रखते हैं, हम जैसा सोचते हैं उस से हमारा जीवन भी प्रभावित होता है और हम अपने विचारों से अपने सोच से वैसी ही चीजें आकर्षित करते हैं ।

इसी बात को अगर अंग्रेजी में कहूं तो किसी ने बहुत बेहतरीन बात कही है कि "OUR speech influences our thoughts , and our thoughts train our mind to do that . "

इसलिए सदैव अपने आप की महत्ता को समझें और अपने आस - पास इस तरह की महामारी के घेराव के लिए इक सकारात्मक घेरा तैयार कर खुद को भय ,भ्रम और नकारात्मकता की इस विशाल बीमारी से ग्रसित ना होने दें।

© Ananya Rai Parashar

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