B.I.G
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दरअसल हुआ यह कि मैं ठाकुर जी की सेवा में गोलोकधाम मे था।
वहां बैठे-बैठे दूर पृथ्वी की चकाचौंध कर देने वाली बनावटी जगमगाहट मुझे अपनी ओर आकर्षित करने लगी।मुझे लगा एक बार तो जाकर देखना चाहिए।
मैंने ठाकुर जी से कहा कि मुझे भी उस लोक को देखने की लालसा हैं।
ठाकुर जी बोले :- बाबा वो लोक तुझ जैसे जीवों के लिए नहीं है।तू तो यही आनंद कर।
मैंने कहा :- केवल एक बार भेज दो।बस थोड़ा सा देख कर वापिस आ जाऊंगा।
ठाकुर जी :- वहाँ देख कर आने वाला काम नहीं है।वहाँ तो फिर भोग कर ही आना पडता हैं।
परन्तु मैं तो जैसे बाल हट ही करें बैठा था।
" जाना है तो जाना हैं "
ठाकुर जी ने चलते समय फिर कहा :- बाबा एक बार और सोच लें।वहाँ माया बडी प्रबल प्रभाव डालती है.
मैंने कहा :- सोच लिया।मुझे माया नहीं सताएगी।
और अंततः ठाकुर जी ने मेरी हट स्वीकार कर मुझे इस धरा पर भेज दिया।
अब जैसे-जैसे मैं इस लोक के निकट आता जा रहा था।सारी चीजें स्पष्ट नजर आने लगी थी।वो जो उपर से चमचमाते तारे लग रहे थे वो केवल कचरे के ढेर पर पडे रंग बिरंगे खाली पोलोथिन थें।
जो जीव दूर से इतने दयालु और सुभाव से विनम्र लग रहे थे।उनमें निरा छलकपट भरा था।
बात धीरे-धीरे समझ में आने लगी थी।और अपनी हट पर पछतावा भी हो रहा था।परन्तु ठाकुर जी वो बात भी ध्यान में थी कि "वहाँ देख कर आने वाला काम नहीं है।वहाँ तो फिर भोग कर ही आना पडता हैं।"
थोड़ी देर में ही दम सा घुटने लगा।अब वापसी जाने की छटपटाहट थी।परन्तु उस समय भेजने वाला सामने था।अब पहले तो भेजने वाले को ढूंढना था।सो इस संसारिक जीवन के इक्यावन वर्ष लग गए उसे ढूंढने में।और आखिरकार उस दीनदयाल को मझ पर दया आ ही गई।और वो मिल गया मुझे कदम वृक्ष के नीचें।
उसे देखते ही मुझे अपने पिछले जीवन की सारी समृतिया आने लगी।
मुझे देखते ही ठाकुर जी मुख पर एक ही प्रश्न था :- बता बाबा क्या पाया ?
मैं चरणों में गिर कर फूट-फूट कर रोने लगा।और क्षमा याचना करने लगा :- गलती हो गई नाथ।वापिस अपनी सेवा में बुला लो।अब कभी ऐसी जिद्द नहीं करूंगा।
बस क्षमा याचना करते-करते ना जाने कब ठाकुर जी को मुझ पर दया आ गई और मेरा शरीर यही रह गया और मेरे प्राण निकल कर उनके श्रीचरणों मे विलीन हो गए।
सच में तुम बहुत दयालु हो नाथ।
(जय जय श्री राधे)
06/05/2026
শাশুড়ি মায়ের অধিকার ( গল্প হলেও সত্যি!)
গৈলে সাঁজাল জ্বালার কালে ছোট ঠাকুমা বিড়বিড় করা শুরু করতেন। আর অমনি বাঁশ বাগানের ভেতর দিয়ে সুউউউউ... শব্দ তুলে দখিনা বাতাস উঠতো। আমাদের গোটা উঠোন ম-ম করত ধুনো আর অম্বুরি গুলের গন্ধে। বাড়ির সবাই মাথায় হাত ঠেকাত! দাদারা বৈঠকখানার পাশার ছক ছেড়ে চলে আইতেন। রাশভারি মানুষগুলোর চোখ বেয়ে টপটপ করে জল পড়ত।
দাদার মা অর্থাৎ আমাদের প্রপিতামহী কুমুদাসুন্দরী দেবী ছোট ঠাউর্দার জন্ম দিতে গিয়ে মারা যান। দিনটা ছিল দুর্ভিক্ষের সনের তেসরা বৈশাখ। যারে দশমাস দশদিন বয়ে বেড়ালেন, তাকে না দেখেই চলে যেতে হল।
তারপর থেকেই শুরু হল তার আনাগোনা। ছোট দাদা দোলনায় কাঁদছেন। রান্নাঘরে সবার হাতজোড়া। ছুটে এসে যে ধরবেন তার জো নেই... আচমকাই দেখা যেত শিশু চুপ করে গেছে৷ আর উঁ উঁ করে আওয়াজ তুলছে৷ দুধের গোঁদল ফাঁকা। দাদারও পেট ভর্তি। সারা উঠোনময় ম-ম করছে অম্বুরি গুলের গন্ধ। এই গুল দিয়ে তিনি দাঁত মাজতেন।
সবাই শান্তি-স্বস্তয়নের কথা বলেছিলেন কিন্তু বড়দাদা অর্থাৎ আমাদের প্রপিতমহ গা করেননি। স্ত্রীকে ভীষণ ভালোবাসতেন। মা যে সন্তানের ক্ষতি করতে পারে, তা তিনি প্রাণে ধরে বিশ্বাস করতে পারেননি। সব্বাইকে নাকি বলতেন, বাপ-মায়ের স্বপ্নই থাকে তার নাড়ি ছেঁড়া ধন বড় হোক। পরিচয় পাল। সে কোনদিন তাকে নিয়ে চলে যেতে পারেনে। কুমুদা ও পারবে নে...
এইভাবেই সব চলছিল। সারা বাড়ি তার অস্তিত্বের কথা জেনে গিয়েছিল।
ছোটঠাকুরদার বিয়ে হয় ষোলো বছর বয়সে ঠাকুমার বয়স তখন কেবল দশ। আমাদের বড়দাদাকে নাকি কুমুদাসুন্দরী দেবী দেখা দিয়ে বলেন, এইবার তোমার ছেলের একটা হিল্লে হয়েছে। এইবার আমি আসি।তমোঘ্ন
কিন্তু চাইলেই কি আর যাওয়া যায়! তিনি ততদিনে আটকে গিয়েছিলেন এই মায়ার টানে। তার ছোট বউমাটি একেবারেই কাদার তাল। শিল বাটতে গিয়ে আঙুল থেঁতো করে। মাছ কাটতে গিয়ে হাত কাটে। জ্বর এলে ঠোঁট ফুলিয়ে কাঁদে। মায়ের মন আর কত সইতে পারে। তিনি এলেন, শাশুড়ি নয় মা হয়ে।
ছোট ঠাকুমা প্রথম প্রথম ভয় পেতেন। কিন্তু তারপর আস্তে আস্তে সকলেই সয়ে গেল। মায়ের মমতার কাছে তিনি নিজেকে সমর্পণ করে দিয়েছিলেন। মাঝেমধ্যেই নাকি তিনি বিড়বিড় করতেন ছায়ার সাথে...
দিন গেল। মা- মেয়ের সম্পর্ক একইরকম। ঠাকুমার তখন চার ছেলে বড় হচ্ছে। অশরীরি মায়ের প্রশ্রয় ছিল বলে, ঠাকুমাও ডাকাবুকো ছিলেন। রাতের বেলা পূব পাড়ার মাঝিরা ইলিশ এনে দিত। ঠাকুমা কেটে ধু
06/05/2026
আমি খুব অল্প জানি। কিন্তু যতটুকু জেনেছি এতদিনের উপাসনায় জেনেছি এই মহিলা ভয়ংকর ধরনের স্ক্রিপ্ট রাইটার! সেই সৃষ্টির আদি থেকে লিখে চলেছে, মনে জিজ্ঞাসা আসে তখনো কি এরকম পুঁথি কলম ছিল? হয়তো নয়। ঐ যে গানেই থাকে "ব্রহ্মাণ্ড ছিলনা যখন, মুণ্ডমালা কোথা পেলি?"
এই মহিলা নিজে থেকে মধু কৈটভকে তৈরি করেছে, আবার নিজেই তাদের পতনকেও দেখিয়েছে। নিজের হাতে উত্থান ঘটিয়েছে লক্ষ লক্ষ অসুরদের , আবার নিজেই তাদের নাশ করেছে।
তাই খুব খুব সাবধান! এই মহিলা বহু উত্থান-পতনের সাক্ষী। গতকাল যাকে উঠিয়েছিল আজ নামিয়েছে। আবার আজ যাকে উঠিয়েছে তাকেও , না থাক। সে কথা সময় বলবে। যদিও সময়টাই এনার মূল ডিপার্টমেন্ট।
আবার বঙ্গে এনার প্রচুর হেড অফিস। তাই নিজেদেরকে সামলে থাকতে হয়। কারণ ভাগ্যে থাকলে ইনি ক্ষমতা দেবেন, সতর্কও করবেন আবার নির্মমভাবে ধরাশায়ীও করবেন।
হ্যাঁ, পতনের আগে সতর্কও করেন, চালাক উপাসকরা ধরতে পারেন। বাকিরা নয়।
তাই সামলে! আমরা করি প্ল্যান, ইনি করেন মাস্টারপ্ল্যান!
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