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16/08/2024
संजय राय ने नहीं सिस्टम ने किया है बलात्कार और नृशंस हत्या !
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माता-पिता के लिए उनका बच्चा महज पुत्र या पुत्री ही नहीं होता, वह एक सपना होता है, जिसके लिए उन्होंने न जाने कितनी रातें जागकर बिताई होती हैं और न जाने कितना पसीना बहाया होता है। इस एक सपने में माता-पिता अपने बच्चों के भविष्य को लेकर सैंकड़ों सपने देखते हैं और जब ऐसे जवान सपनों का नरसंहार होता है तो उनकी मनोस्थिति की कल्पना भी डराती है।
कोलकाता के आरजी कर मेडिकल कॉलेज में अपनी 31 वर्षीय ट्रेनी डॉक्टर पुत्री को लेकर भी उनके अभिभावक उस रात चैन की नींद सोते हुए संभवत: अनेक सुनहरे सपने देख रहे होंगे। अचानक उन्हें हॉस्पिटल से सूचना आती है कि उनकी पुत्री ने आत्महत्या कर ली है। वे नंगे पैर हॉस्पिटल दौड़ते हैं लेकिन अस्पताल प्रशासन रोने गिड़गिड़ाने के बावजूद तीन घंटे तक उन्हें पुत्री का शव नहीं दिखाता है और तीन घंटे बाद केवल पिता को शव देखने की अनुमति दी जाती है।
परिजनों के अनुसार शव पूर्ण नग्न अवस्था में था। निजी अंगों सहित शरीर के कई हिस्सों से खून बह रहा था तथा दोनों टांगे अलग-अलग दिशा में थी यानी कि शरीर को चीर दिया गया था।
दिल्ली में निर्भया बलात्कार कांड में जो कुछ हुआ था लगभग वैसी ही भयावह स्थिति इस शव की भी थी।
कहा जाता है कि इस अस्पताल के प्रिंसिपल प्रोफेसर डॉक्टर संदीप घोष बड़े राजनीतिक रसूख वाले व्यक्ति हैं (करोड़ों रुपए के निर्माण कार्य और खरीद में मिलने वाले कमिशन को मिल बांटकर खाने से ऊपर तक मधुर संबंध बन ही जाते होंगे) और उन्होंने इस मामले को शुरू में कवरअप कर आत्महत्या का रंग देने का प्रयास किया। मामला इतना गंभीर था कि वे समझ गए होंगे कि अब कवरअप नहीं चलेगा। शुरू में अस्पताल प्रशासन ने इसे आत्महत्या बताया। प्रिंसिपल ने यहां तक कहा कि रात एक बजे सेमिनार रूम में जाने की जोखिम लेना लेडी डॉक्टर की मूर्खता थी। मृतका को मनोरोगी बताने का भी प्रयास किया गया।
इस मामले में छात्रों के भारी विरोध और हाई कोर्ट की सख्त टिप्पणियों के बाद मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ संदीप घोष ने इस्तीफा दिया लेकिन सरकार ने उन्हें कुछ ही घंटे में एक अन्य मेडिकल कॉलेज का प्रिंसिपल बना दिया। इस पर हाईकोर्ट ने दोबारा अप्रसन्नता व्यक्त करते हुए डॉ घोष को लंबी छुट्टी पर जाने का आदेश दिया। कोर्ट ने कहा-आप बहुत ताकतवर हैं, "आपके पद पर रहते निष्पक्ष जांच हो पाना मुश्किल है।"
हाई कोर्ट की कड़ी टिप्पणी के बाद इस निर्लज्ज डॉ घोष ने लंबी छुट्टी के नाम पर 15 दिन की छुट्टी का आवेदन करके इसकी प्रतिलिपि हाई कोर्ट में भेज दी।
इस घटना ने पूरे देश के हर संवेदनशील इंसान को अंदर तक हिला दिया है।यह बात अलग है कि इससे बेशर्म प्रिंसिपल डॉ संदीप घोष ,पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री तथा बहुत सारे नेता और छोटी-छोटी बातों पर सरकार से बड़े-बड़े सवाल पूछने वाले पत्रकारों के कान पर जूं तक नहीं रेंगी। इस मामले में चुप्पी साधने वाले लोग अपनी विरोधी पार्टी विशेष के राज्य में बलात्कार की घटना पर गिद्ध की तरह कैमरे लेकर संवेदना प्रकट करने पहुंच जाते हैं।
अपनी तल्ख जुबान से सवाल पूछने वाली पत्रकार पार्टी ने इस मुद्दे पर पश्चिम बंगाल सरकार से कोई सवाल नहीं पूछे लेकिन आज एक आम जन के मन में सवाल उठते हैं :
बड़े शहरों की आवासीय सोसाइटी में औसत दर्जे की सिक्योरिटी एजेंसी भी सुरक्षा का इतना इंतजाम कर लेती हैं कि सामान्यतः सोसाइटी के अंदर घुसकर किसी की अपराध करने की हिम्मत नहीं होती। फिर आरजी कर मेडिकल कॉलेज में सुरक्षा के नाम पर क्या मजाक हो रही थी ? (सिक्योरिटी के नाम पर अस्पताल किसी एजेंसी को करोड़ों रुपए का भुगतान जरूर कर रहा होगा।)
संजय राय का नाम का जो कथित अपराधी पकड़ा गया है वह सिविक कार्यकर्ता था लेकिन वह अस्पताल में रोगियों को भर्ती करवाने के लिए दलाली करता था और उसे पूरे अस्पताल में कहीं भी घुसकर कुछ भी करने की आजादी थी। एक बाहर के व्यक्ति को सिस्टम के भीतर तक घुसने और स्वच्छंद विचरण की अनुमति कैसे थी ?
जब शव को देखकर कोई अनपढ़ व्यक्ति भी यह कह सकता था कि यह हिंसक अपराध , बलात्कार और हत्या का मामला है, तब फिर अस्पताल के प्रशासन ने पीड़िता के परिवार को आत्महत्या की सूचना क्यों दी ?
अस्पताल में आने के बाद भी माता-पिता को तीन घंटे तक शव देखने की अनुमति क्यों नहीं दी गई ?
कुल मिलाकर यह मामला बताता है कि सिस्टम के लिए डॉक्टर की जान की कोई कीमत नहीं थी तथा सिस्टम ने इस जघन्य हत्या और बलात्कार को आत्महत्या का रूप देकर कवर अप करने की कोशिश की लेकिन मामला इतना गंभीर था कि इसे छुपाना उनके लिए संभव नहीं था।
कोलकाता में आरजी कर मेडिकल कॉलेज में ट्रेनी लेडी डॉक्टर का बलात्कार और हत्या किसी सिरफिरे संजय राय ने नहीं सिस्टम ने की है।
अब इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपे जाने से पीड़िता को मृत्युपरांत न्याय मिलने की संभावना पैदा हुई है लेकिन जांच का दायरा सिर्फ हत्यारे को पकड़ने तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए वरन इस बात की भी तहकीकात होनी चाहिए कि इस मामले को कौन और क्यों करने की कोशिश कर रहा था ?
क्या अपनी आवाज उठाकर सरकार को कार्रवाई के लिए मजबूर करने के लिए आपका किसी ऐसी जाति से संबंधित होना जरूरी है जो संख्या और वोटों की दृष्टि से सरकार या राजनीतिक पार्टियों के लिए महत्वपूर्ण हो?
कब तक मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉक्टर घोष जैसे दलाली और घूसखोरी करने वाले लोग राजनीतिज्ञों की गोद में बैठकर न केवल जूनियर डॉक्टरों का वरन संपूर्ण समाज का शोषण करते रहेंगे ?
कब तक प्रतिदिन लाखों लोगों की जान बचाने वाले डॉक्टरों की खुद की जान खतरे में रहेगी ?
डॉ आकाश माथुर
गेस्ट्रोएंट्रोलॉजिस्ट
14/08/2024
In response, it has been collectively agreed that residents and fellows at SGPGIMS will continue the protest by suspending elective outpatient clinics, academic activities and elective procedures/surgeries. However, patients in the non-essential service areas will be attended by the faculty members. All emergency services/surgeries, intensive care units and ward services will continue to operate.
12/11/2021
सिर्फ सुपरस्पेशलिस्ट नियुक्त कर खानापूर्ति करने से जनता को फायदा पहुंचना मुश्किल है, उम्मीद है कि जहाँ जहाँ सुपरस्पेशलिस्ट चिकित्सक भेजे जा रहे हैं वहाँ उनकी विशेषज्ञता के अनुरूप आधारभूत संरचना भी उपलब्ध होगी । ताकि उनकी सेवाओं का अधिकाधिक लाभ आमजन को मिल सके । ✌️😊
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