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अपने लिए तो सभी जीते हैं कभी दूसरे के लिए भी तो जी लेना सीखो

27/03/2026

aas24news.in

19/03/2026

बड़ू क्षेत्र में जल शक्ति विभाग की योजनाओं के पानी के सैंपल पाए गए हैं सही
पेयजल योजनाओं के पानी की लगातार हो रही है सैंपलिंग एवं टैस्टिंग : अधीक्षण अभियंता
जलस्रोतों के अलावा लोगों को घरों की टंकियां साफ रखने के लिए भी किया जा रहा जागरुक
बड़ू और इसके आस-पास के गांवों में तीन दिनों से सामने नहीं आया पीलिया का कोई नया मामला

हमीरपुर 19 मार्च। बीते दिनों हमीरपुर के निकटवर्ती क्षेत्र बड़ू के कुछ गांवों में पीलिया के कई मामले सामने आने पर जल शक्ति विभाग ने त्वरित कदम उठाते हुए इस क्षेत्र में अपनी चारों पेयजल योजनाओं के स्रोतों और टैंकों से पानी के सैंपल लिए हैं और ये सभी सैंपल सही पाए गए हैं।
जल शक्ति विभाग के अधीक्षण अभियंता नीरज भोगल ने बताया कि विभाग के एसडीओ, जेई और अन्य कर्मचारी लगातार फील्ड में हैं। इन अधिकारियों और कर्मचारियों ने चारों पेयजल योजनाओं के स्रोतों और सभी टैंकों की सफाई और पानी की सैंपलिंग एवं टैस्टिंग सुनिश्चित की है।
अधीक्षण अभियंता ने बताया कि राजकीय प्राथमिक पाठशाला स्वाहल की टंकी के पानी का सैंपल ठीक पाया गया है, लेकिन राजकीय उच्च पाठशाला स्वाहल के हैंडपंप का सैंपल सही नहीं है और इसी स्कूल में पीलिया के लगभग 13 मामले सामने आए हैं।
उन्होंने बताया कि बहुतकनीकी कालेज में भी पीलिया के लगभग 13 मामले पाए गए हैं। इस संस्थान के हैंडपंप का सैंपल तो ठीक पाया गया है, लेकिन संस्थान के कई छात्र बड़ू और इसके आस-पास के गांवों में पीजी में रहते हैं। इसलिए, पीलिया फैलने का कारण अन्य जलस्रोत, भवनों की टंकियों में गंदगी या फिर कोई अन्य कारण हो सकता है।
अधीक्षण अभियंता ने बताया कि इस क्षेत्र में 17, 18 और 19 मार्च को पीलिया का कोई नया मामला सामने नहीं आया है। लेकिन, विभाग के एसडीओ, जेई और अन्य कर्मचारी इसके कारणों का पता लगाने के लिए लगातार सक्रिय हैं। इसके अलावा वे सभी लोगों को घरों में अपनी टंकियों को साफ रखने और पेयजल की स्वच्छता के प्रति भी जागरुक कर रहे हैं।

Photos from AAS Foundation's post 16/03/2026

लोक निर्माण विभाग विश्राम गृह घुमारवीं में आज दिनांक 16 मार्च, 2026 को जन समस्याएं सुनते नगर व ग्राम नियोजन, आवास, तकनीकी शिक्षा, व्यावसायिक तथा औद्योगिक प्रशिक्षण मंत्री श्री राजेश धर्माणी जी ...........👇👇👇👇
Er Rajesh Dharmani राजेश धर्मानी

Photos from AAS Foundation's post 14/03/2026

बिलासपुर में मादक द्रव्य एवं मनोप्रभावी पदार्थ अधिनियम के प्रावधानों पर एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित

बिलासपुर, 14 मार्च: बचत भवन बिलासपुर में आज अभियोजन निदेशालय हिमाचल प्रदेश द्वारा मादक द्रव्यों से जुड़े मामलों में कानूनी प्रक्रियाओं को सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में मादक पदार्थों की जब्ती के बाद अपनाई जाने वाली सीलिंग, नमूना संग्रहण तथा विधिसम्मत नष्ट करने की प्रक्रिया पर विस्तार से चर्चा की गई। यह कार्यशाला मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में गठित छठी राज्य स्तरीय एनकॉर्ड समिति के तत्वावधान में आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता उपायुक्त बिलासपुर राहुल कुमार ने की।

कार्यशाला में अभियोजन निदेशक हिमाचल प्रदेश संजीव कटोच, पुलिस अधीक्षक बिलासपुर संदीप धवल, संयुक्त संयुक्त निदेशक अभियोजन रणधीर परमार, जिला न्यायवादी बिलासपुर सी. एस. भाटिया, जिला न्यायवादी मंडी, कांगड़ा, कुल्लू, हमीरपुर, ऊना, सोलन व शिमला तथा इन जिलों के जिला न्यायवादी व सहायक जिला न्यायवादी और सैमिनार के विशेषज्ञ राकेश सोनी तथा भीष्म चंद जिला न्यायवादी हायर एजुकेशन शिमला उपस्थित रहे।

कार्यशाला को संबोधित करते हुए उपायुक्त बिलासपुर राहुल कुमार ने बताया कि जिले में एनडीपीएस अधिनियम के अंतर्गत वर्तमान में 570 मामले लंबित हैं, जबकि अब तक 51 मामलों का निपटारा किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि इन मामलों के प्रभावी निपटान के लिए सभी संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय अत्यंत आवश्यक है।

अभियोजन निदेशक हिमाचल प्रदेश संजीव कटोच ने अधिनियम के क्रियान्वयन में आने वाली कमियों को दूर करते हुए यदि सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करें तो एनडीपीएस अधिनियम से जुड़े मामलों के निपटान में और अधिक प्रगति सुनिश्चित की जा सकती है।

कार्यशाला में विशेषज्ञ अधिकारियों ने प्रतिभागियों को बताया कि मादक द्रव्य एवं मनोप्रभावी पदार्थ अधिनियम, 1985 के अंतर्गत इन प्रक्रियाओं का सही ढंग से पालन करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि कि जब्त किए गए मादक पदार्थों के सुरक्षित संरक्षण, नमूनों के सही तरीके से संग्रहण तथा निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के अनुसार उनके निस्तारण की व्यवस्था न्यायिक प्रक्रिया को मजबूत बनाने में अहम भूमिका निभाती है। यदि इन प्रक्रियाओं का विधिसम्मत तरीके से पालन किया जाए तो अदालत में मामलों की सुनवाई के दौरान साक्ष्यों की विश्वसनीयता बनी रहती है और दोषियों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित की जा सकती है।

विशेषज्ञों ने यह भी बताया कि मादक पदार्थों से जुड़े मामलों में जांच के दौरान साक्ष्य संरक्षण, दस्तावेजीकरण और निर्धारित कानूनी औपचारिकताओं का पालन अत्यंत आवश्यक है। इससे जांच प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और प्रभावी बनती है तथा न्यायालय में मामलों के निपटारे में भी सुविधा होती है।

कार्यशाला के माध्यम से अधिकारियों को अधिनियम के प्रावधानों और उनसे संबंधित प्रक्रियाओं की व्यावहारिक जानकारी प्रदान की गई, ताकि भविष्य में ऐसे मामलों के प्रभावी निपटान में सहायता मिल सके।

बैठक में सभी जिलों के संबंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

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