Success point Computer Education Naharpur

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17/06/2023

हम माफ तो बार बार कर सकते हैं..
लेकिन भरोसा बार -बार नही कर सकते हैं.. 🖤
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17/06/2023

हम सब लहू , निचोड़ दें खिदमत में बाप की

उतरेगा सर से फिर भी न एहसान बाप का 💯🤲🏻

Success Point Computer Education 🔥🌹🔥

17/06/2023

किसी को अपने जख्म मत दिखाना मेरे शहर में ,
सारा का सारा शहर नमक का कारोबार करता है !!

01/04/2023

ये वो समय था जब कॉमिक्स पढ़ पढ़ कर या यह कह लीजिए, उन्हे चाट चाट कर मेरी क्रियेटिव इंद्रियां पूरे शबाब पर थी.पैरलली फिल्में भी इस क्रिएटिविटी में दाल में तड़के का काम कर रही थी.
उस समय यह तो महसूस हो गया था कि कहानी सुनाने वाला भूखा नही कर सकता. गर्मी की छुट्टियां आते ही शाम के होते ही हम बच्चों का जमघट लग जाता था.लाइटें अक्सर गुल रहा करती थी और छोटे घरों के भीतर भभकने से बेहतर बच्चे छुपन छुपाई के लिए बाहर आ जाते थे पर इससे पहले कहानियों का एक सेशन होता था.
वो सेशन मेरे या मेरे एक दोस्त के द्वारा हेड किया जाता था. उस सेशन में भयावह कहानियां सुनाई जाती थी और इन कहानियों की खास बात यह होती थी कि इन्हे सच बताकर पेश किया जाता था.
इन कहानियों के बदले हम बड़े स्टाइल से अपने साथी मित्रों से दस, बीस, पच्चीस, पचास पैसे तक ऐंठ लिया करते थे.जिनके पास पैसे ना हों वो अपने हिस्से की टॉफी या कुछ कंचे हमे लाकर दे दिया करते थे.
किसी भी साथी बच्चे को यह एहसास नहीं दिलाया जाता था कि हम उसे लूट रहे हैं.उसके दिलोदिमाग पर कहानियों का कब्जा जमाकर हम इंस्टालमेंट में यह लूट मचाते थे.
उस भीड़ में हमारा एक असिस्टेंट भी होता था जो केवल हमारी बातों पर हामी भरता था.उसे उसके हिस्से का कट हम दे दिया करते थे.
कहानियों का ऐसा रहता था कि मान लीजिए फलां फलां दिन हम फलां फलां फिल्म देखकर उठते थे, जैसे कि नागिन तो हमारी शाम की कहानी का मुख्य पात्र होती थी नागिन और ये कहानियां हम ऑन द स्पॉट सुनाते थे और कुछ इस तरह सुनाते थे कि सुनने वाले को लगे कि हमने उस नागिन से मुठभेड़ की है या हमारे पिताजी नागिन के चक्कर में थे.
फिर उसमें नागिन का आंखों से फोटो खींचना, उसका बदला लेना, उससे हमारा बच निकलना इत्यादि बातें हुआ करती थी.
कुल मिलाकर हम सुनने वालों की नजरों में खुद को तिलिस्मी शक्तियों से लैस साउंड करवाते थे और अब मान लीजिए उस भीड़ में कोई एकाध होशियारचंद यदि हमारी बातों पर उंगली उठाते नज़र आता तो हम उस ग्रुप के कान भरकर ही उसको भगवा दिया करते क्योंकि ऐसे लोग हमारे धंधे के लिए सबसे हानिकारक होते थे.
हां, ये भी था कि हम कहानियां चुराते नहीं थे, सब अपनी बनाते थे.आज पेज के एक भाई ने ईमानदारी से अपनी सोनी लिव की आईडी और पासवर्ड जब मुझे दी तो उस ज़माने के दोस्त याद आ गए जिनसे हम दस बीस पैसे या चवन्नी ऐंठा करते थे.
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