Mathurawasi
मथुरा तीन लोक ते न्यारी
मथुरा तीन लोक ते प्यारी
जो रस बरस रहो या ब्रज मे
वो रस तीन लोक में नाय ।।
🦚|| ब्रज तीर्थ प्रोहित ||🦚
🚨अंकित चतुर्वेदी🚨
09/06/2026
🪷 यमुना तट जागरूकता अभियान 🪷
(मथुरावासियो की एक पहल)
"चलो घाट की ओर कदम बढ़ाएं, अपनी माँ यमुना को स्वच्छ बनाएं।" 🙏
कल ही हमारे इस अभियान की शुरुआत हुई है और देखते ही देखते 8 जागरूक सदस्य हमारे साथ जुड़ चुके हैं। माँ यमुना केवल एक नदी नहीं, बल्कि हम सभी मथुरावासियों के जीवन की जीवनरेखा हैं। उनके घाटों को स्वच्छ और सुंदर बनाए रखना किसी एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि हम सबकी सामूहिक ज़िम्मेदारी है।
हमारा उद्देश्य किसी बड़ी संस्था को दिखाना नहीं, बल्कि ज़मीनी स्तर पर बदलाव लाना है। अभी शुरुआत है, और इस पावन कार्य को आगे बढ़ाने के लिए हमें आप जैसे और भी साथियों की ज़रूरत है।
📌 आप हमारा साथ कैसे दे सकते हैं?
🚫 प्लास्टिक को कहें ना: घाटों पर प्लास्टिक या कचरा न फेंकें।
🗑️ सही निपटान: पूजन सामग्री को नदी में प्रवाहित करने के बजाय तय स्थान पर रखें।
👥 अभियान से जुड़ें: एक स्वयंसेवक (Volunteer) बनकर हमारे इस छोटे से परिवार को बड़ा बनाएं।
🤝 सदस्य बनने के लिए अभी हमें इनबॉक्स (DM) में मैसेज करें। आपका एक छोटा सा प्रयास बड़ा बदलाव ला सकता है!
#मथुरावासी
पुराने व्यक्तियों से कहते सुना था कि यमुना जल इतना शुद्ध हुआ करता था जब कोई सिक्का डाले तो जल में साफ दिखाई देता यमुना की रेती सोने कि सी चमकती थी सोचो ऐसा क्या हुआ जो कुछ ही सालों में यमुना का जल इतना दूषित होता चला गया और जिम्मेदार आंख मुदे कर मूक बने बैठे रहे है यह ज्यादा वर्ष पुरानी बात नहीं शायद सरकार की लापरवाही रही जो रुपये के लिए फैक्ट्रियों को उनका वेस्ट पवित्र नदियों में बिना ट्रीटमेंट के प्रभावित करवाया और खुद सरकार भी भारत की नदियों को दूषित करने में पीछे नहीं रही नगर निगम के नाले आज भी सीधे यमुना में प्रवाहित होते जनता से करोड़ों टैक्स के नाम पर रूपये वसूलने के बाद भी सरकार ना तो नदिया ही शुद्ध कर सकी ना ही नदियों किनारे शुद्ध वातावरण ही बना सकी घाटों किनारो को सजा देने से जल शुद्ध होगा नहीं गंदगी से बीमारी फैलना तय है और जब जनता को बीमारी लगे तब सरकारी अस्पतालों में इलाज नहीं स्वास्थ के लिए जब वह प्राइवेट अस्पताल जायेगी जनता तभी तो गवर्मेंट को टैक्स और प्राइवेट अस्पतालों को जनता से रुपय चूसने का मौका मिलगा अगर नदियों का जल शुद्ध हुआ तो कोई RO water नहीं लेगा , सरकारी अस्पताल में अच्छा इलाज हुआ तो जनता प्राइवेट अस्पताल नहीं जाएगी और सरकार को पैसा नहीं मिलेगा इसीलिए भारत में सरकारी स्कूलों की दुर्दशा है और प्राइवेट स्कूल यूनिवर्सिटी फल फूल रहे जबकि सरकार चाहे तो स्वास्थ,शिक्षा,और पर्यावरण संरक्षण के लिए ठोस कदम उठा इन्हीं को आय का श्रोत बना सकती है
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