Manoj poetry

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it's all about the deep thinking of my mind

07/07/2024

मैं खो गया तेरे अघोष में
अब न रहा मैं होश में

वक्त गुजर गया बहुत
तुझे से बिछड़े हुए
तेरी याद है कि जाती नहीं

याद न भी करना चाहूँ
तो भी तू याद आती है
याद से पहले याद के बाद
तू नही जाती है

महसूस एशा होता हैं
तू मेरी रूह का साथी है

पहचान इतनी गहरी है तेरे और
मेरे बीच
जैसे जन्म जन्म का हमारा नाता है

हीरे की तलाश में,अक्सर कर सोना हाथ से फिसल जाता है

पुरानी कहावतों का सच होने कभी कभी
बहुत पछतावा दिलाता है

दिल से चाहने वालों के हिस्से में हमेशा
धोखा ही आता है

फिर भी रह जाता है कोई बच्चा प्यार में
याद में
जो रह रह के वक्त वक्त पर तड़पता हैं

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