Karuna Rani Vlog

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Hi everyone. I'm Karuna and a food lover like you Cooking has always been my passion and to purse

31/05/2026

"ज़माना समझता है कि औरतें सिर्फ शौक के लिए या पैसों के लिए घर से बाहर निकल रही हैं। लेकिन सच तो यह है कि वो अपनी शर्तों पर जीने का हक कमा रही हैं। जब घर की बंदिशें हद से ज़्यादा बढ़ने लगती हैं, तो आत्मसम्मान के लिए काम का बोझ भी एक राहत जैसा लगने लगता है। खुद के पैरों पर खड़े होना शौक नहीं, आज के दौर की सबसे बड़ी ज़रूरत है। 💯✨ "

31/05/2026

क्योंकि सम्मान सिर्फ कमाई से जुड़ जाएगा, तो लोग योगदान नहीं, आय को महत्व देने लगेंगे।जिस दिन एक गृहिणी को हर दिन यह महसूस कराया जाए कि घर संभालना कोई उपलब्धि नहीं है, उसका काम कोई काम नहीं है, उसका योगदान अदृश्य है...

तो एक दिन वह भी अपनी पहचान वहीं ढूंढेगी जहां समाज सम्मान देता है।
विडंबना यह है कि समाज एक तरफ अच्छे संस्कार वाले बच्चे, मजबूत परिवार और खुशहाल रिश्ते चाहता है...

और दूसरी तरफ उन लोगों के काम को महत्व नहीं देता जो इन्हें बनाने में अपना पूरा समय लगा देते हैं।

शायद समस्या महिलाओं के बदलने की नहीं, सम्मान के पैमाने बदल जाने की है। ❤️

जब घर संभालने को त्याग नहीं, निर्भरता समझा जाए... जब बच्चों की परवरिश को योगदान नहीं, फर्ज़ कहकर नजरअंदाज किया जाए... तब करियर सिर्फ एक विकल्प नहीं, आत्मसम्मान का रास्ता बन जाता है। 💯

31/05/2026

दुनिया में सबसे ज़्यादा गलत समझे जाने वाले शब्दों में से एक है—आत्मसम्मान।

कई लोग अपने अहंकार को आत्मसम्मान का नाम दे देते हैं।

वे माफ़ नहीं करते, और कहते हैं—"मेरा स्वाभिमान है।"

वे किसी की बात नहीं सुनते, और कहते हैं—"मुझे अपनी कीमत पता है।"

वे हर असहमति को अपमान समझ लेते हैं, और उसे आत्मसम्मान की रक्षा का नाम दे देते हैं।

लेकिन सच इससे बिल्कुल अलग है।

आत्मसम्मान कभी किसी को छोटा करके खुद को बड़ा नहीं बनाता।

उसे अपनी ऊँचाई साबित करने के लिए किसी और को नीचा दिखाने की ज़रूरत नहीं पड़ती।

अहंकार को पड़ती है।

आत्मसम्मान शांत होता है,
अहंकार शोर करता है।

आत्मसम्मान भीतर की शक्ति है,
अहंकार भीतर की असुरक्षा।

आत्मसम्मान कहता है
"मैं अपने मूल्य को जानता हूँ।"

अहंकार कहता है
"तुम मेरे मूल्य को मानो।"

यही वह महीन रेखा है जिसे लोग अक्सर देख नहीं पाते।

आत्मसम्मान इंसान को गरिमा देता है,
अहंकार उसे अकेला कर देता है।

आत्मसम्मान रिश्तों में सम्मान पैदा करता है,
अहंकार रिश्तों में दीवारें।

और सबसे बड़ी बात

आत्मसम्मान को किसी की स्वीकृति की ज़रूरत नहीं होती,
लेकिन अहंकार दूसरों की प्रशंसा पर ही जीवित रहता है।

क्योंकि आत्मसम्मान अपनी कीमत जानता है, अहंकार दूसरों की कीमत भूल जाता है।

इसलिए हर बार जब आपको लगे कि आप अपने सम्मान की रक्षा कर रहे हैं,
एक प्रश्न स्वयं से पूछिए

"मैं अपनी गरिमा बचा रहा हूँ, या सिर्फ़ अपने अहंकार को?"

क्योंकि कई रिश्ते अपमान से नहीं टूटते,
अहंकार को आत्मसम्मान समझ लेने की भूल से टूटते हैं।

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