pankaj pandit

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आध्यात्म आयुर्वेद और धर्म

13/01/2025

🕉️ शिव महिमा और रुद्राविषेक🕉️
1. जल से रुद्राभिषेक करने पर — वृष्टि होती है।
2. कुशा जल से अभिषेक करने पर — रोग, दुःख से छुटकारा मिलता है।
3. दही से अभिषेक करने पर — पशु, भवन तथा वाहन की प्राप्ति होती है।
4. गन्ने के रस से अभिषेक करने पर — लक्ष्मी प्राप्ति होती है।
5. मधु युक्त जल से अभिषेक करने पर — धन वृद्धि होती है।
6. तीर्थ जल से अभिषेक करने पर —मोक्ष की प्राप्ति होती है।
7. इत्र मिले जल से अभिषेक करने से —बीमारी नष्ट होती है ।
8. दूध से अभिषेक करने से — पुत्र प्राप्ति,प्रमेह रोग की शान्ति तथा मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं।
9. गंगाजल से अभिषेक करने से — ज्वर ठीक हो जाता है।
10. शर्करा मिश्रित दूध से अभिषेक करने से — सद्बुद्धि मिलती है।
11. घी से अभिषेक करने से — वंश का विस्तार होता है।
12. सरसों के तेल से अभिषेक करने से — रोग तथा शत्रु का नाश होता है।
13. शुद्ध शहद से रुद्राभिषेक करने से — पाप क्षय होता है।
इस प्रकार शिव के रूद्र रूप के पूजन और अभिषेक करने से जाने-अनजाने होने वाले पापाचरण से भक्तों को शीघ्र ही छुटकारा मिल जाता है।🙏🏼

17/11/2024

*अनजाने में किये हुए पाप का प्रायश्चित कैसे होता है ??*

आइए जानते हैं .........

बहुत सुन्दर प्रश्न है...... यदि हमसे अनजाने में कोई पाप हो जाए तो क्या उस पाप से मुक्ती का कोई उपाय है ??

श्रीमद्भागवत जी के षष्ठम स्कन्ध में महाराज राजा परीक्षित जी ने श्री शुकदेव जी से ऐसा प्रश्न किया था !

बोले भगवन आपने पञ्चम स्कन्ध में जो नरकों का वर्णन किया उसको सुनकर तो गुरुवर रोंगटे खड़े हो जाते है !

प्रभूवर मैं आपसे ये पूछ रहा हूँ कि यदि कुछ पाप हमसे अनजाने में हो जाते है जैसे चींटी मर गयी हम लोग स्वास लेते हैं तो कितने जीव श्वासों के माध्यम से मर जाते है !

भोजन बनाते समय लकड़ी जलाते है उस लकड़ी में भी कितने जीव मर जाते है और ऐसे कई पाप हैं जो अनजाने में हो जाते है तो उस पाप से मुक्ती का क्या उपाय है भगवन ??

आचार्य शुकदेव जी ने कहा...

राजन ऐसे पाप से मुक्ती के लिए रोज प्रतिदिन पाँच प्रकार के यज्ञ करने चाहिए !

महाराज परीक्षित जी ने कहा...

भगवन एक यज्ञ यदि कभी करना पड़ता है तो सोचना पड़ता है आप पाँच यज्ञ रोज कह रहे है !

यहां पर आचार्य शुकदेव जी हम सभी मानव के कल्याणार्थ कितनी सुन्दर बात बता रहे है !

'पहला यज्ञ' है -जब घर में रोटी बने तो पहली रोटी गऊ ग्रास के लिए निकाल देना चाहिए !

🔸️'दूसरा यज्ञ' है राजन -चींटी को दस पाँच ग्राम आटा रोज वृक्षों की जड़ों के पास डालना चाहिए !

'तीसरा यज्ञ' है राजन्-पक्षियों को अन्न रोज डालना चाहिए !

🔸️'चौथा यज्ञ' है राजन् -आटे की गोली बनाकर रोज जलाशय में मछलियो को डालना चाहिए !

🔸️'पांचवां यज्ञ' है राजन् भोजन बनाकर अग्नि भोजन रोटी बनाकर उसके टुकड़े करके उसमे घी शक्कर मिला कर अग्नि को भोग लगाओ ! राजन् अतिथि सत्कार खूब करे कोई भिखारी आवे तो उसे जूठा अन्न कभी भी भिक्षा में न दे !

राजन् ऐसा करने से अनजाने में किये हुए पाप से मुक्ती मिल जाती है ! हमें उसका दोष नही लगता ! उन पापो का फल हमे नहीं भोगना पड़ता !

राजा ने पुनः पूछ लिया भगवन यदि गृहस्थ में रहकर ऐसे यज्ञ न हो पावे तो और कोई उपाय हो सकता है क्या।

तब यहां पर श्री शुकदेव जी कहते है ....

राजन् ....

कर्मणा कर्मनिर्हांरो न ह्यत्यन्तिक इष्यते !

अविद्वदधिकारित्वात् प्रायश्चितं विमर्शनम् !!

नरक से मुक्ती पाने के लिए हम प्रायश्चित करे कोई व्यक्ति तपस्या के द्वारा प्रायश्चित करता है कोई ब्रह्मचर्य पालन करके प्रायश्चित करता है कोई व्यक्ति यम नियम आसन के द्वारा प्रायश्चित करता है लेकिन मैं तो ऐसा मानता हूँ राजन् !

केचित् केवलया भक्त्या वासुदेव परायणः !

राजन् केवल हरी नाम संकीर्तन से ही जाने और अनजाने में पाप किये हुए को नष्ट करने की सामर्थ्य है !

इसलिए हे राजन् ! ----- सुनिए...!

स्वास स्वास पर कृष्ण भजि बृथा स्वास जनि खोय !

न जाने या स्वास की आवन होय न होय !!

इसलिए हे राजन् ! ----- सुनिए...!

स्वास स्वास पर कृष्ण भजि बृथा स्वास जनि खोय !

न जाने या स्वास की आवन होय न होय !!

16/11/2024

शनिवार को शनिदेव की पूजा के महत्व
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शनि देवता को न्याय का देवता कहा जाता है। ऐसी मान्यता है कि वह सभी के कर्मों का फल देते हैं। कोई भी बुरा काम उनसे छिपा नहीं, शनिदेव हर एक बुरे काम का फल मनुष्य को जरूर देते हैं। इसलिए उनकी पूजा का बहुत महत्व है।

माता छाया और सूर्य देव के पुत्र शनिदेव को आमतौर पर केवल नकारात्मकता के रूप में ही देखा जाता है लेकिन व्यक्ति के जीवन में शनि के बहुत से सकारात्मक प्रभाव भी होते हैं। शनि को संतुलन और न्याय का ग्रह कहा जाता है। माना जाता है व्यक्ति द्वारा किये गए सभी अच्छे बुरे कर्मों का फल देने का काम शनिदेव ही करते हैं। इस वजह से उन्हें कर्मफलदाता भी कहा जाता है।’

हर शनिवार शनि देवता कि पूजा की जाती है। मान्यता है कि अगर पूजा सही तरीके से की जाए तो शनिदेव की असीम कृपा मिलती है और ग्रहों की दशा भी सुधरती है। हर शनिवार मंदिर में सरसों के तेल का दीया जलाएं। ध्यान रखें कि यह दीया उनकी मूर्ति के आगे नहीं बल्कि मंदिर में रखी उनकी शिला के सामने रखे।

अगर आस-पास शनि मंदिर ना हो तो पीपल के पेड़ के आगे तेल का दीया जलाएं। अगर वो भी ना हो तो सरसों का तेल गरीब को दान करें।

शनि पूजा के बाद हनुमान जी की पूजा करें। उनकी मूर्ति पर सिन्दूर लगाएं और केला अर्पित करें।

शनिदेव को प्रसन्न करने के लिए दान बहुत अच्छा माना जाता है खासकर काली वस्तुओं का। अगर आप भी शनिदेव के किसी दंड को भोग रहे हैं तो काली वस्तुओं का दान करना शुरू कर दें। इसमें आप काले कपड़े, काले तिल, काली उड़द और सरसों का तेल आदि को सम्मिलित कर सकते हैं। अगर आप सामथ्र्यवान हैं तो इस दिन लोहा भी दान करें। शनि देव इससे बहुत प्रसन्न होते हैं।

इस दिन पीपल के वृक्ष की पूजा करने से विशेष लाभ मिलता है। माना जाता है हर शनिवार पीपल के वृक्ष के नीचे सरसों के तेल का दीपक जलाने से शनिदेव प्रसन्न होते है।

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04/10/2024

नवरात्री के नौ दिन माँ के अलग-अलग भोग
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१) प्रथम नवरात्रि पर मां को गाय का शुद्ध घी या फिर सफेद मिठाई अर्पित की जाती है।

२) दूसरे नवरात्रि के दिन मां को शक्कर का भोग लगाएं और भोग लगाने के बाद इसे घर में सभी सदस्यों को दें। इससे उम्र में वृद्धि होती है।

३) तृतीय नवरात्रि के दिन दूध या दूध से बनी मिठाई, खीर का भोग मां को लगाएं एवं इसे ब्राह्मण को दान करें। इससे दुखों से मुक्ति होकर परम आनंद की प्राप्ति होती है।

४) चतुर्थ नवरात्र पर मां भगवती को मालपुए का भोग लगाएं और ब्राह्मण को दान दें। इससे बुद्धि का विकास होने के साथ निर्णय लेने की शक्ति बढ़ती है।

५ ) नवरात्रि के पांचवें दिन मां को केले का नैवेद्य अर्पित करने से शरीर स्वस्थ रहता है।

६ ) नवरात्रि के छठे दिन मां को शहद का भोग लगाएं, इससे आकर्षण शक्ति में वृद्धि होती है।

७ ) सप्तमी पर मां को गुड़ का नैवेद्य अर्पित करने और इसे ब्राह्मण को दान करने से शोक से मुक्ति मिलती है एवं अचानक आने वाले संकटों से रक्षा भी होती है।

८ ) अष्टमी व नवमी पर मां को नारियल का भोग लगाएं और नारियल का दान करें। इससे संतान संबंधी परेशानियों से मुक्ति मिलती है।

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