Panth Foundation

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Our mission focuses on empowering these women through education.

Photos from Panth Foundation's post 18/06/2026

युवा और मानसिक स्वास्थ्य: एक अनकही सच्चाई

युवाओं के साथ काम करना हमेशा से मेरे लिए सबसे प्रिय विषयों में से एक रहा है। लेकिन आज के समय में यह सबसे चिंताजनक क्षेत्रों में भी बदलता जा रहा है, जब हम अपने देश के भविष्य को लेकर युवाओं में बढ़ती निराशा देखते हैं।

आज का युवा भारी मानसिक दबाव से गुजर रहा है। यह दबाव केवल पढ़ाई, कौशल या आर्थिक स्थिति की वजह से नहीं है, बल्कि अवसरों की कमी और नौकरी के अनिश्चित माहौल के कारण है। वे अपने करियर की शुरुआत करना चाहते हैं, लेकिन कहाँ से और कैसे शुरू करें—यही सबसे बड़ी चुनौती बन जाती है। और जब वे पहला कदम उठा भी लेते हैं, तब भी असुरक्षा और डर उनका पीछा नहीं छोड़ते।

हाल ही में मुझे रुड़की के MCD Trust में छात्रों के साथ बातचीत करने का अवसर मिला। यह संस्था खासकर ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के युवाओं को सरकारी नौकरियों की दिशा में मार्गदर्शन देने का महत्वपूर्ण काम कर रही है। लेकिन आज की अनिश्चितता—जैसे परीक्षा में देरी और पेपर लीक—इन युवाओं को गहराई से प्रभावित कर रही है। उनमें से कई इतने लंबे इंतज़ार का बोझ नहीं उठा सकते।

इसी ज़रूरत को समझते हुए, Panth Foundation की टीम को छात्रों के साथ मानसिक स्वास्थ्य पर सत्र लेने के लिए आमंत्रित किया गया।

इस सत्र के दौरान एक बात बहुत स्पष्ट हुई—जहाँ शहरी क्षेत्रों में हमें लगता है कि मानसिक स्वास्थ्य एक सामान्य और समझा जाने वाला विषय है, वहीं ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं के लिए यह अब भी एक अनजान दुनिया है। ये छात्र पढ़ाई में अच्छे हैं, लेकिन उन्हें कभी यह समझने का अवसर नहीं मिला कि मानसिक स्वास्थ्य क्या होता है।

Usman Mehandi ने सत्र की शुरुआत एक सरल सवाल से की:
"मानसिक स्वास्थ्य क्या है?"

छात्रों ने कई जवाब दिए, लेकिन ज़्यादातर जवाब दो बातों तक सीमित थे—बीमारी का न होना या भावनाएँ।

हम अक्सर सोचते हैं कि आज के डिजिटल युग में हर जानकारी आसानी से उपलब्ध है। लेकिन असली सवाल यह है—क्या इन युवाओं के पास इतना समय और मानसिक स्थान है कि वे अपने भावनात्मक स्वास्थ्य के बारे में सोच सकें? जब वे प्रतियोगिता, परिवार की अपेक्षाओं और अनिश्चित भविष्य के बीच फँसे हों?

जवाब है—नहीं।

उनके संस्थानों में भी इस विषय पर बहुत कम बात होती है। उनसे केवल अच्छा प्रदर्शन करने और अधिक अंक लाने की उम्मीद की जाती है।

सत्र के अंत में जब हमने सवाल-जवाब का समय रखा, तो एक अलग ही दृश्य सामने आया। कई छात्रों ने पहली बार खुलकर अपनी भावनाओं—जैसे गुस्सा, निराशा और चिड़चिड़ापन—के बारे में बात की। वे अपनी बात कहना चाहते थे, लेकिन अपनी भावनाओं को सही शब्दों में व्यक्त नहीं कर पा रहे थे।

यही सबसे बड़ी सीख थी।

मानसिक स्वास्थ्य केवल जानकारी देने का विषय नहीं है, बल्कि सुरक्षित माहौल बनाने, भावनाओं को समझने और उन्हें व्यक्त करने की क्षमता विकसित करने का विषय है।

हम MCD Trust का आभार करते हैं, जिन्होंने इस ज़रूरत को समझा और युवाओं के लिए लगातार ऐसे सत्र आयोजित करने का निर्णय लिया। अगर हमें एक मजबूत और संवेदनशील भविष्य बनाना है, तो युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देनी ही होगी।

02/11/2025

🌸 पंथ फाउंडेशन के साथ जुड़िए – लड़कियों की शिक्षा का साथी बनिए! 🌸
हर साल सैकड़ों लड़कियाँ स्कूल छोड़ देती हैं — ऐसा नहीं कि वो पढ़ना नहीं चाहतीं, बल्कि इसलिए क्योंकि उन्हें कोई सहारा देने वाला नहीं मिलता। आइए, हम मिलकर इसे बदलें!

हमारा उद्देश्य:
8वी के बाद लड़कियों को स्कूल से बाहर (ड्रॉपआउट) होने से रोका जा सके जो लड़कियाँ कक्षा 8 के बाद पढ़ाई छोड़ चुकी हैं, उन्हें दोबारा पढाई से जोड़ा जा सके
1) उन्हें रेमेडियल (अतिरिक्त) शिक्षा और काउंसलिंग सपोर्ट दिया जा सके
2) परिवारों और समुदाय को जागरूक किया जा सके कि “लड़कियों की शिक्षा ही समाज की प्रगति है।”

🤝 आप वालंटियर के रूप में क्या कर सकते हैं?
आपके छोटे से प्रयास से बहुत सी लड़कियों की ज़िंदगी बदल सकती है:
 अपने गांव में लड़कियों को 8वी के बाद ड्रॉपआउट होने से रोकें
 अपने गांव में परिवारों और लड़कियों को पढ़ाई जारी रखने के लिए प्रेरित करें
 ऐसी लड़कियों की चिन्हित करके पंथ फॉउंडेशन की टीम को सूचित करें
 स्कूल से बाहर हुई लड़कियों को दोबारा पढ़ाई से जोड़ने में मदद करें
 अपने गांव में जागरूकता कार्यक्रम करने में हमारा सहयोग करे
इससे आपको क्या मिलेगा?

यह कार्यक्रम पूर्णरूप से समाज में योगदान देने व अपने कौशल में विकास करने पर आधारित हैं। जो भी लोग इस कार्यक्रम के लिए चुने जायेंगे उनको पंथ फाउंडेशन की तरफ से निःशुल्क इंग्लिश स्पीकिंग/आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस/ माइक्रोसॉफ्ट ऑफिस की ट्रेनिंग करवायी जाएगी।

🕒 समय की कोई बाध्यता नहीं
सिर्फ हर हफ़्ते 2 घंटे का समय देकर भी आप बड़ा बदलाव ला सकते हैं (पंथ फाउंडेशन की टीम द्वारा प्रशिक्षण दिया जाएगा।)

👥 कौन जुड़ सकता है?
 कॉलेज के छात्र-छात्राएँ
 युवा जो समाज में बदलाव लाना चाहते हैं
 शिक्षक, प्रोफेशनल या गृहिणी जो कुछ समय निकालकर मदद कर सकती हैं
 हर वो व्यक्ति जो मानता है — “एक लड़की की शिक्षा, एक पूरी पीढ़ी की रोशनी है।”

🌟 पंथ फाउंडेशन से क्यों जुड़ें?
-) सीधे सामाजिक बदलाव में योगदान का मौका
-) कम्युनिटी डेवलपमेंट का अनुभव
-) वालंटियर सर्टिफिकेट
-) जेंडर समानता और शिक्षा के अभियान का हिस्सा बनने का अवसर
-) स्वयं के कौशल में वृद्धि करने के लिए

📍 कार्य क्षेत्र:
पुरकाज़ी ब्लॉक के सभी 84 गांव (http://bit.ly/4ogJ6w8), ज़िला मुज़फ्फरनगर (उत्तर प्रदेश)

📞 आज ही जुड़े और नीचे दिए गए लिंक के द्वारा अपना फॉर्म भरें। आवेदन की अंतिम तिथि 15 नवम्बर 2025
आवेदन के लिए लिंक: https://bit.ly/4hzM7oF

अधिक जानकारी के लिए संपर्क करे
रानी – 9926264560; वसी – 9548808276
📧 ईमेल: [email protected]
🌐 वेबसाइट: www.panthfoundation.com

‘They felt like they weren’t upto the mark’: TISS scholar helps girls to clear obstacles on way back to schools: fear, trauma 18/08/2025

Happy to share-our work featured first time in national media. Please have a look. Thanks, Indian Express

‘They felt like they weren’t upto the mark’: TISS scholar helps girls to clear obstacles on way back to schools: fear, trauma Mahendi, the founder of Uttar Pradesh-based Panth Foundation, said that there are multiple reasons for this including fear of getting dropped out again or "not being upto the mark".

Photos from Panth Foundation's post 28/07/2025

"हम अकेले ही चले थे जानिब-ए-मंज़िल मगर,
लोग आते गए और कारवाँ बनता गया।”

ये दो लाइने सिर्फ सफ़र की बात नहीं करती बल्कि ये इंसान की सोच, संघर्ष और विश्वास की ताक़त को बयान करती है। इंसान सफर में अकेला महसूस कर सकता हैं, संघर्ष के समय डगमगा सकता हैं लेकिन अगर इरादा सच्चा हो, तो लोग धीरे-धीरे जुड़ते जाते हैं – और वही अकेला सफ़र एक कारवां बन जाता है। जैसे की आज हम भी महसूस कर रहे हैं।

जो सफर हमने पिछले वर्ष 15 ड्रॉपआउट लड़कियों से शुरू किया था वो आज एक बड़े समूह में बदलता जा रहा हैं और 27 जुलाई को पंथ फाउंडेशन ने पुरकाज़ी कस्बे में अपने पहले वार्षिकोत्सव में 'ज़किया बेगम एजुकेशन सेंटर' का उद्घाटन किया।

यह सेंटर उन बेटियों के लिए समर्पित है, जो किसी कारणवश स्कूल से बाहर रह गईं और अब दोबारा पढ़ाई शुरू करना चाहती हैं। ज़किया बेगम जी के नाम पर बना यह केंद्र शिक्षा, प्रेरणा और आत्मनिर्भरता का प्रतीक है।

इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि प्रोफेसर तलत अज़ीज़ (सेनानिवृत्त), जामिया मिल्लिया इस्लामिया और विशिष्ट अतिथि डॉ. रूही फातिमा, जो जामिया मिलिया इस्लामिया के शिक्षक प्रशिक्षण विभाग में प्रोफेसर के रूप में कार्यकर्त हैं की उपस्थिति ने हमारे इस आयोजन में चार चाँद लगा दिए।

लड़कियों द्वारा प्रस्तुत नुक्कड़ नाटक, समूह गीत, और समुदाय की भागीदारी ने यह साबित किया कि जब सपनों को समर्थन मिलता है, तो वे ज़रूर उड़ान भरते हैं। आइए, इस मिशन का हिस्सा बनें – ताकि हर लड़की अपनी शिक्षा और आत्मसम्मान को पा सके।

सभी समर्थकों और शुभचिंतको का बहुत बहुत धन्यवाद! मुख्यरूप से Mohammad Faizan Zafar bhai, Prakhar ji, Soban ji, Faimida ji, and Khalid sir

Photos from Panth Foundation's post 28/05/2025

क्या आप जानते हैं कि भारत में हर 5 में से 1 लड़की किशोरावस्था में पहुँचने के बाद स्कूल छोड़ देती है?
मासिक धर्म से जुड़ी समस्याएं और शर्म इसके प्रमुख कारणों में से एक हैं।
मासिक धर्म अभी भी एक ऐसा विषय है जिस पर बात करने से लोग हिचकिचाते हैं। लेकिन यह एक स्वाभाविक प्रक्रिया है, न कि कोई शर्म की बात। जब लड़कियाँ मासिक धर्म के कारण स्कूल जाना छोड़ती हैं, तो उनका भविष्य अधूरा रह जाता है।

इस समस्या के मूलभूत कारण इस प्रकार भी है

!) स्कूलों में स्वच्छ शौचालय न होना; कई लड़कियाँ सिर्फ इसलिए स्कूल नहीं जातीं क्योंकि वहां स्वच्छ शौचालय नहीं होते।
!) सेनेटरी पेड्स का आसानी से उपलब्ध न होना; सेनेटरी पैड्स या तो आसानी से उपलब्ध नहीं होते या बहुत महंगे होते है ।
!) समाज में आज भी मासिक धर्म को गंदा या शर्मनाक माना जाना; कुछ सामाजिक कुरीतियों के चलते लड़कियों को आज भी सेनेटरी पेड्स खरीदने के लिए समावेशी माहौल नहीं मिल पाना भी इसका एक मूलभूत कारण है।

मासिक धर्म की सही जानकारी और सुविधाएं न होने के कारण जब एक लड़की हर महीने स्कूल नहीं जाती, तो वह साल में लगभग 20% दिन पढ़ाई से दूर रहती है।
धीरे-धीरे वह स्कूल छोड़ देती है — और फिर आती है जल्दी शादी, सीमित अवसर और गरीबी का चक्र।

यह सिर्फ स्वास्थ्य का नहीं, शिक्षा और सम्मान का सवाल है।

पंथ फाउंडेशन में हमारा सपना है कि कभी भी कोई भी लड़की सिर्फ मासिक धर्म की वजह से स्कूल न छोड़े।

इस सपने के साथ ही पंथ फाउंडेशन की टीम समुदायों के साथ मिलकर जागरूकता फैलाने, स्वच्छता सुविधाएं सुधारने और लड़कियों को सशक्त बनाने के लिए अपनी सभी संभव कोशिश लगातार कर रही है।

इस पर आइए मिलकर संकल्प लें:
✔ मासिक धर्म पर खुलकर बात करें
✔ बदलाव के लिए साथ आएं
✔ और हर लड़की को उसका शिक्षा का अधिकार दिलाएं

पीरियड्स कभी भी किसी लड़की की पढ़ाई को रोकें _ ऐसा नहीं होना चाहिए।

29/04/2025

हमे आप पर गर्व हैं!

14/04/2025

“मैं ऐसे धर्म को मानता हूँ जो स्वतंत्रता, समानता और भाईचारा सिखाए।” – डॉ. भीमराव अंबेडकर

आज अम्बेडकर जयंती के अवसर पर, पंथ फाउंडेशन डॉ. अंबेडकर के विचारों और उनके संघर्षों को नमन करता है। उन्होंने हमें यह सिखाया कि शिक्षा, सामाजिक न्याय और समान अधिकार ही किसी भी समाज की असली ताकत हैं।

पंथ फाउंडेशन डॉ. अंबेडकर के दिखाए मार्ग पर चलते हुए हाशिए पर रह रही महिलाओं और बच्चियों को शिक्षा और स्वास्थ्य के माध्यम से सशक्त करने का कार्य कर रहा है।

आइए, इस दिन को सिर्फ एक उत्सव नहीं, एक संकल्प बनाएं—समानता, न्याय और शिक्षा की अलख को समाज के हर कोने तक पहुँचाने का।

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30/03/2025

Eid Mubarak to Everyone from Panth Foundation Team!

14/03/2025

पंथ फाउंडेशन की ओर से आप सभी को रंगों से भरी,
खुशियों से सजी, प्यार और उमंग से महकी होली की रंगीन शुभकामनाएँ!
खुश रहें, सुरक्षित रहें, साथ मिलकर रंगों की तरह समाज में प्रेम और सौहार्द फैलाएं l

Photos from Panth Foundation's post 10/03/2025

आज दिनाँक 10 मार्च 2025 को शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल करते हुए, पंथ फाउंडेशन ने आज पुरकाज़ी कस्बे में एक रेमेडियल कोचिंग सेंटर का उद्घाटन किया। यह केंद्र उन छात्राओं को शैक्षणिक सहायता प्रदान करने के लिए समर्पित है जो किसी भी कारणवश आठवीं और दसवीं कक्षा के बाद शिक्षा से वंचित रह गई हैं।
इस कोचिंग सेंटर का उद्घाटन अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में मुख्य अतिथि महताब आलम बी.आर.सी. पुरकाज़ी द्वारा किया गया, जिसकी थीम "सभी महिलाओं और लड़कियों के लिए: अधिकार, समानता, सशक्तिकरण" रखा गया है। यह पहल उन सभी लड़कियों के लिए आशा की किरण बनेगी, जो सामाजिक और आर्थिक कारणों से अपनी पढ़ाई जारी नहीं रख पाईं थी परन्तु पंथ के 'एड्रेसिंग नीड्स - प्रमोटिंग सोल्यूशन' मॉडल के तहत शिक्षा में वापसी कर रही हैं।
इस अवसर पर कन्या जूनियर हाई स्कूल की प्रधानाध्यापिका मिनाक्षी व शिक्षिका सहित कई शिक्षाविद, समाजसेवी मुकुल, सुमैला, सुमैया, इल्मा, और गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। मुख्य अतिथि ने अपने संबोधन में सरकारी योजनाओं के बारे में बताया और कहाँ कहा, "शिक्षा महिलाओं के सशक्तिकरण की नींव है। पंथ फाउंडेशन का यह प्रयास समाज में सकारात्मक बदलाव लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।"
पंथ फाउंडेशन के संस्थापक व सीईओ उस्मान मेहंदी ने कहा, "हमारा उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी लड़की सिर्फ संसाधनों की कमी के कारण शिक्षा से वंचित न रहे। यह रेमेडियल कोचिंग सेंटर उन्हें सीखने और आगे बढ़ने का अवसर देगा।" वही पंथ की सह-संस्थापक व निर्देशिका रानी ने कहाँ, "हम इस केंद्र को उन सभी महिलाओं व लड़कियों को समर्पित करते हैं जो हमारे समाज़ की रूढ़िवादी सोच से झूझती हुई अपनी आकांशाओ को पूरा करने का प्रयास कर रही हैं।"
इस कोचिंग सेंटर में अनुभवी शिक्षकों द्वारा नि:शुल्क शिक्षा, पाठ्यपुस्तक सहायता और परीक्षा तैयारी, व करियर काउंसलिंग कराई जाएगी, जिससे छात्राएं अपनी पढ़ाई सिर्फ फिर से शुरू ही नहीं बल्कि भविष्य में अपनी शिक्षा के माध्यम से रोज़गार भी उत्सर्जित कर सके।
इस पहल से न केवल शिक्षा को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि यह समाज में लैंगिक समानता और महिला सशक्तिकरण को भी मजबूत करेगा। पंथ फाउंडेशन आने वाले वर्षों में इस मॉडल को अन्य क्षेत्रों में भी लागू करने की योजना बना रहा है।



Ilma Rani Usman Mehandi

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