SSY Poetry
Poetry of Principal Sumer Singh Yadav
चौहा
आते जाते राहों में तो, कई मिलाते रहते हाथ।असल हाथ तो वो होता है, जो दुर्दिन में देवे साथ।चलते चलते राहों में तो, कई पूछते रहते हाल।हाल पूछना वो होता है, जो विपति में लेय संभाल।
बसन्त पचॅंमी की बधाई
मेरे सारे मित्रों के ,जीवन में सदा बसंत रहे।
सरस्वती की कृपा,उन पर सदा अनंत रहे।
वीणावादिनी के पुजारी, वे जीवन पर्यंत रहें।
उनके कर्मों से देश का, नाम सदा जीवंत रहे।
कर्मों से वे कृष्ण रहें , स्वभाव से सब संत रहें।
बलवंत रहें, दयावंत रहें ,जयंत रहें ,यशवंत रहें।
ग्रीष्म रहे हेमंत रहे, पर वे सदा ही कंत रहें।
सेवक रहें ,सावंत रहें ,पर हरदम तेजवंत रहें।
उनके सम्मुख आने से, पहले बाधा का अंत रहे।
हे हंस वाहिनी माते, आशीष तेरा बेअंत रहे ।
वाणी पिक की जब भी चाहे, बेशक कागा देय दबाय।लेकिन अपने कॅंठ को मीठा, किसी तरह भी कर नहीं पाय।
निंदक कितना चाहे कर लो, सज्जन प्राणी को बदनाम।खुद सज्जन वो नहीं बन सके,बदले ना छल से परिणाम
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