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Sandeep Kumar

04/02/2026

एक लड़का शहर में बेफिक्र ज़िंदगी जी रहा था, पढ़ाई में मन नहीं लगता था और दिनभर दोस्तों के साथ घूमता रहता था। पिता उसे रोज समझाते, लेकिन लड़के पर कोई असर नहीं होता। एक दिन गुस्से में पिता ने कह दिया, “जब तक अपनी पहचान नहीं बना लेता, इस घर में कदम मत रखना।”

लड़के को यह बात दिल पर लग गई। वह घर छोड़कर चला गया। शुरुआत में बहुत मुश्किलें आईं, कई बार भूखा भी सोना पड़ा, लेकिन उसने हार नहीं मानी। दिन-रात मेहनत की, पढ़ाई की, काम किया और तीन साल बाद अपनी एक छोटी सी कंपनी खड़ी कर ली।

कामयाब बनकर जब वह घर लौटा तो दरवाज़ा खुलते ही मां की आंखों में खुशी के आंसू छलक पड़े। मां ने उसे गले लगाया और कहा, “तेरे पापा तेरा ही इंतज़ार कर रहे थे।” लड़का भागते हुए उनके कमरे में गया, लेकिन वहां सिर्फ दीवार पर टंगी पिता की तस्वीर थी। उसके कदम वहीं रुक गए।

मां ने कांपते हाथों से एक पुरानी डायरी उसे दी और कहा, “तेरे पापा ये तेरे लिए छोड़ गए हैं।”
डायरी में लिखा था —
“बेटा, मुझे पता है मेरी ज़िंदगी ज्यादा दिन की नहीं है। इसलिए मैंने तुझे खुद से दूर भेजा, ताकि तू अपने पैरों पर खड़ा हो सके। मैं चाहता था कि मेरी गैरमौजूदगी में भी तू कमजोर न पड़े। अपनी मां का हमेशा सहारा बनना।”

दोस्तों, यह भी एक कहानी है, लेकिन इससे हमें यही सीख मिलती है कि पिता भले ही कम बोलते हैं, सख्त दिखते हैं, पर उनकी हर खामोशी के पीछे हमारे भविष्य की चिंता छुपी होती है। मां हमारी आज की फिक्र करती है, और बाप हमारी पूरी ज़िंदगी की। ❤️

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