Friends Media Vision
“सच दिखाने का जुनून, हर खबर सबसे पहले – आपके साथ,“देश-दुनिया की बड़ी खबरें, ग्राउंड रिपोर्ट और सच्चाई के साथ – Friends Media Vision।”
30/05/2026
मरीज की गरिमा (عزتِ نفس) का ख्याल रखना इस्लामी शिक्षाओं का एक अहम हिस्सा है।♥️
सोए हुए मरीज की तस्वीर खींचकर दूसरों तक पहुंचाना, या उसकी कमजोरी और बेबसी को लोगों में फैलाना, नैतिकता (اخلاق) और शरिया (شریعت) दोनों के खिलाफ है। मरीज की तीमारदारी (عیادت) का मकसद उसकी दिलजोई करना, हौसला बढ़ाना और दुआ करना है, न कि उसे तकलीफ पहुंचाना या उसकी निजी स्थिति को दूसरों के सामने जाहिर करना।
रसूलुल्लाह ﷺ ने फरमाया:
"जब तुम मरीज या मैयत के पास जाओ तो अच्छी बात कहो, क्योंकि फरिश्ते तुम्हारी बातों पर आमीन कहते हैं।" (सहीह मुस्लिम: 919)
एक और हदीस में नबी करीम ﷺ मरीज की तीमारदारी के वक्त यह दुआ फरमाते थे:
"لَا بَأْسَ، طَهُورٌ إِنْ شَاءَ اللّٰهُ"
अर्थात: "कोई बात नहीं (फिक्र न करो), इन शा अल्लाह यह बीमारी गुनाहों से पाकी का जरिया बनेगी।" (सहीह बुखारी: 5662)
इसलिए जो शख्स मरीज की तीमारदारी (عيادت) के लिए जाए, उसे चाहिए कि:
मरीज को अल्लाह की रहमत और शिफा की उम्मीद दिलाए।
हौसला बढ़ाने वाली और सकारात्मक (पॉजिटिव) बातें करे।
उसके लिए दुआ करे।
बीमारियों, मौतों और खौफनाक घटनाओं का जिक्र करके उसे डराए नहीं।
मरीज की इजाजत के बिना उसकी तस्वीर या वीडियो न बनाए और न ही दूसरों में शेयर करे।
याद रखिए!
मरीज के दिल में उम्मीद, सब्र और अल्लाह पर भरोसा पैदा करना ही तीमारदारी का असल मकसद है। जबकि उसकी तस्वीरें फैलाकर या डरावनी बातें सुनाकर उसका हौसला तोड़ना इस्लामी अखलाक (नैतिकता) के खिलाफ है।
अल्लाह तआला तमाम मरीजों को कामिल (मुकम्मल) शिफा अता फरमाए। आमीन। 🤲🏻
Click here to claim your Sponsored Listing.
Contact the business
Telephone
Website
Address
167/8 Sarai Julena
New Friends Colony
110025