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22/06/2025
💖 #योगिनी_एकादशी के अवसर पर, वृन्दावन के तीनो ठाकुर जी के दर्शन 22.06.2025 💖
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे
हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे❤️❤️
22/06/2025
**योगिनी एकादशी व्रत कथा (Yogini Ekadashi Vrat Katha in Hindi)**
**तिथि:** योगिनी एकादशी हर साल *आषाढ़ मास के कृष्ण पक्ष* की एकादशी तिथि को मनाई जाती है।
यह व्रत *सभी पापों का नाश* करने वाला माना गया है और विशेष रूप से रोगों से मुक्ति, स्वास्थ्य लाभ और मोक्ष प्राप्ति के लिए फलदायी है।
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# # # 🌿 **योगिनी एकादशी व्रत कथा**
प्राचीन काल की बात है, अलकापुरी नामक नगरी में कुबेर नामक देवता राज्य करते थे। वे भगवान शिव के परम भक्त थे और प्रतिदिन भगवान शिव की पूजा किया करते थे। उनकी पूजा की जिम्मेदारी *हेममाली* नामक एक गंधर्व को दी गई थी। वह प्रतिदिन मानसरोवर से फूल लाकर कुबेर को पूजा के लिए दिया करता था।
एक दिन हेममाली अपनी सुंदर पत्नी विशालाक्षी के प्रेम में इतना डूब गया कि वह पूजा का समय भूल गया और फूल लेकर कुबेर के पास नहीं पहुँचा। कुबेर को बहुत क्रोध आया। उन्होंने हेममाली को बुलवाया और कहा:
> "तूने मेरी सेवा में लापरवाही की है। मैं तुझे श्राप देता हूँ कि तू पवित्र गंधर्व योनि से गिरकर मर्त्य लोक में चला जाए और वहां कोढ़ रोग से पीड़ित होकर जीवन यापन करे।"
हेममाली तुरंत ही धरती पर आ गया और जंगलों में कोढ़ी के रूप में कष्ट उठाने लगा। वह बहुत दुखी और कष्टमय जीवन जी रहा था।
एक दिन वह *मुनि मार्कंडेय* के आश्रम में पहुँचा। मुनि ने उसकी दयनीय स्थिति देखकर पूछा कि वह कौन है और क्यों इतने कष्ट में है। हेममाली ने अपनी पूरी कहानी मुनि को सुनाई।
मुनि मार्कंडेय ने करुणा दिखाते हुए कहा:
> “हे गंधर्व, तूने अपराध तो किया है, लेकिन पश्चाताप भी कर रहा है। अब तू *आषाढ़ कृष्ण एकादशी* का व्रत कर और भगवंत श्रीहरि विष्णु की आराधना कर, इससे तुझे अपने पापों से मुक्ति मिल जाएगी और रोग भी समाप्त हो जाएगा।”
हेममाली ने श्रद्धा से व्रत किया। योगिनी एकादशी के प्रभाव से उसका कोढ़ रोग समाप्त हो गया और वह फिर से स्वर्ग लोक में लौट गया।
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# # # 🌼 **व्रत करने की विधि:**
1. व्रती को दशमी की रात से ही ब्रह्मचर्य का पालन करते हुए सात्विक आहार लेना चाहिए।
2. एकादशी के दिन सुबह स्नान कर भगवान विष्णु की प्रतिमा को पीले वस्त्र पहनाकर पूजा करें।
3. तुलसी, पंचामृत, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें।
4. पूरे दिन उपवास करें – केवल फलाहार या निर्जल व्रत रखें।
5. रात्रि में भगवान विष्णु के भजन-कीर्तन करते हुए जागरण करें।
6. द्वादशी के दिन व्रत समाप्त कर ब्राह्मणों को भोजन कराएं और दान दें, फिर स्वयं भोजन करें।
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# # # 🌟 **योगिनी एकादशी व्रत का महत्त्व:**
* इस एकादशी का व्रत करने से *84 लाख योनियों से मुक्ति* मिलती है।
* *भूत-प्रेत बाधा*, *रोग* और *पापों* से छुटकारा मिलता है।
* यह व्रत *कुबेर के सेवक* को कोढ़ जैसे कष्ट से मुक्त कर सकता है, तो सामान्य जन के लिए इसका फल अकल्पनीय है।
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