Deep Politics
Between the lines
12/11/2025
वो रण्डी हैं
जो लड़कियां अपने नाक पर मक्खी भी ना बैठने देती
उन जैसी और लड़कियां उन शोहदों के लिए रण्डी थी
उनके चक्कर पैसों वालों से थे
वो रसूखों के तलवे चाटती थी
बस इन शोहदों के काम नहीं आती थी
पत्रिकाओं के पहले पेज पर अपनी जवानी से मसे फड़का दें ऐसी फिल्मी बालाएं रण्डी थी
क्योंकि वो दूर दराज बैठे इन दिल फेक आशिकों के सपने तक में नहीं आती
रण्डी ही रही वो लड़की
जिसके स्कूल टीचर का बड़ा बेटा उसे अंग्रेजी ट्यूशन पढ़ाने घर आता
और कमरे का दरवाजा एक घंटे तक बंद रहता
जो लड़कियां हाथ ना आई उनकी बड़ी छातियों के चित्र कॉलेजों के बेंच पर इन कॉपियों से उन कॉपियों तक घूमते रहे
लड़के मसलते रहे छातियां और कहते
भैंस सा थन और रानियों सा मन है इसका
देखते हैं कौन से घर के बिस्तर पर प्यार के खातिर एड़ियां रगड़ेगी
पत्रिकाओं में छपी लड़कियों की नथ कब कितने लोगों ने उतारी यह रस का विषय रहा
और ऐसे विष भरे लड़कों ने उन चेहरों पर दाढ़ी और मूंछ बनाये
वो चुप रही रण्डी
वो बोलती रही तब भी रण्डी
उसने कपड़े उतारे तब भी
और नखरे दिखाए तब भी
उसे सेक्स की जानकारी है तब भी
उसे तर्क से बोलती बंद करने की बीमारी है तब भी वही रण्डी
लड़की ने व्याह तोड़ना चाहा
लड़की अलग हुई
लड़की बच्चा नहीं चाहती
लड़की नौकरी में खुश है
लड़की कुलीग के साथ बाहर है
लड़की रात देर से लौट रही
लड़की खुल कर हंस रही
लड़की आधे पहन रही
पूरे पहन रही
यह सब और इनके जैसी तमाम रण्डी लड़कियां ही हैं
जो अपने मन का कर रही करवा रही
और तुम्हारी मर्दानगी को बिल्कुल रास नहीं आ रही
देखे उसके दो बटन खुले हैं
ये जो देह दिखा ललचा रही और तुम्हारे हाथ नहीं आ रही
तुम इनकी लिस्ट बनाओ और बनाते जाओ
तुम्हारे घर की लड़कियां भी इसी लिस्ट में आ रही
सोचना जरा
किसी के लिए वो भी रण्डी कहला रही....
मोदीजी को देशहित में इस्तीफ़ा दे देना चाहिए जब दिल्ली ही सुरक्षित नहीं है
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