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19/05/2026
एक गरीब बेटी की कहानी — “मिट्टी से उठकर आसमान तक”
उत्तर प्रदेश के एक छोटे से गांव में राधा नाम की एक लड़की रहती थी। उसका घर मिट्टी का था, छत टूटी हुई थी और बरसात के दिनों में पानी टपकता रहता था। उसके पिता खेतों में मजदूरी करते थे और मां लोगों के घरों में बर्तन मांजती थी। घर की हालत इतनी खराब थी कि कई बार रात का खाना भी नसीब नहीं होता था।
लेकिन राधा के सपने बहुत बड़े थे।
वह हमेशा कहती थी,
“गरीबी मेरी मजबूरी हो सकती है, लेकिन मेरी पहचान नहीं।”
गांव के लोग उसकी बात सुनकर हंसते थे। कुछ कहते,
“लड़कियां पढ़-लिखकर क्या करेंगी?”
तो कुछ कहते,
“गरीब की बेटी है, आखिर में चूल्हा ही संभालना है।”
इन तानों ने राधा को कमजोर नहीं किया, बल्कि और मजबूत बना दिया।
राधा रोज सुबह चार बजे उठती। सबसे पहले घर का पानी भरती, फिर मां के साथ काम में हाथ बंटाती और उसके बाद लगभग पांच किलोमीटर पैदल चलकर स्कूल जाती। उसके पास पहनने के लिए सिर्फ दो जोड़ी कपड़े थे और स्कूल बैग की जगह पुरानी थैली थी। कई बार उसके चप्पल टूट जाते और वह नंगे पैर स्कूल पहुंचती।
स्कूल में भी बच्चे उसका मजाक उड़ाते थे।
“देखो, गरीब लड़की आ गई…”
“इसके पास तो किताबें भी पुरानी हैं…”
राधा चुप रहती, लेकिन उसके अंदर एक आग जल रही थी। वह जानती थी कि अगर जिंदगी बदलनी है तो पढ़ाई ही रास्ता है।
एक दिन स्कूल में शिक्षक ने पूछा,
“बड़े होकर क्या बनना चाहते हो?”
किसी ने डॉक्टर कहा, किसी ने पुलिस।
जब राधा की बारी आई तो उसने धीरे से कहा,
“मैं अफसर बनना चाहती हूं।”
पूरी क्लास हंसने लगी।
एक लड़के ने कहा,
“पहले पेट भरने का इंतजाम कर लो, फिर अफसर बनना।”
उस दिन राधा बहुत रोई। लेकिन उसी रात उसने खुद से वादा किया—
“एक दिन यही लोग मेरी सफलता पर ताली बजाएंगे।”
समय बीतता गया। घर की आर्थिक हालत और खराब हो गई। पिता बीमार रहने लगे। मां अकेले काम करके घर चलाने लगी। कई रिश्तेदारों ने सलाह दी कि राधा की शादी कर दो।
मां ने भी एक दिन डरते हुए कहा,
“बेटी, हम ज्यादा पढ़ा नहीं पाएंगे।”
राधा ने मां का हाथ पकड़कर कहा,
“मां, बस थोड़ा साथ दे दो। मैं सब बदल दूंगी।”
उसकी आंखों में ऐसा विश्वास था कि मां ने हार नहीं मानी।
राधा दिन में पढ़ाई करती और शाम को बच्चों को ट्यूशन पढ़ाकर थोड़े पैसे कमाती। रात में जब पूरा गांव सो जाता, तब वह लालटेन की रोशनी में पढ़ती रहती। कई बार भूखे पेट भी पढ़ाई करती, लेकिन उसने कभी शिकायत नहीं की।
एक दिन उसके स्कूल में जिले की परीक्षा हुई। राधा ने पूरे जिले में पहला स्थान हासिल किया। पहली बार गांव वालों ने उसकी तारीफ की। लेकिन सफर अभी बहुत लंबा था।
कॉलेज जाने का समय आया तो सबसे बड़ी समस्या फीस की थी। घर में इतने पैसे नहीं थे। राधा ने हार मानने के बजाय शहर जाकर छोटे-मोटे काम करने शुरू किए। वह सुबह कॉलेज जाती, दोपहर में एक दुकान पर काम करती और रात में कॉल सेंटर में पार्ट टाइम जॉब करती।
कई बार थककर उसकी आंखों से आंसू निकल आते। उसे लगता शायद वह टूट जाएगी। लेकिन फिर उसे अपनी मां के फटे हाथ और पिता की मेहनत याद आती। वही उसकी ताकत बन जाते।
शहर में भी लोगों ने उसे कम नहीं आंका।
कुछ लोग उसके कपड़ों को देखकर मजाक उड़ाते।
कुछ कहते,
“गरीब लोग बड़े सपने नहीं देखते।”
लेकिन राधा ने एक बात सीख ली थी—
“लोगों की बातें अगर दिल पर लगाओगे तो आगे नहीं बढ़ पाओगे।”
कॉलेज खत्म होने के बाद उसने सरकारी नौकरी की तैयारी शुरू कर दी। उसके पास महंगे कोचिंग के पैसे नहीं थे, इसलिए उसने लाइब्रेरी में बैठकर खुद पढ़ाई की। दिन-रात मेहनत करती रही।
पहले प्रयास में वह असफल हो गई।
पूरा गांव फिर हंसने लगा।
“कहा था ना, ये सब गरीबों के बस की बात नहीं।”
उस दिन राधा टूट गई थी। उसने खुद को कमरे में बंद कर लिया। उसे लगा शायद किस्मत सच में गरीबों का साथ नहीं देती।
तभी उसकी मां ने उसके सिर पर हाथ रखकर कहा—
“बेटी, अगर मेहनत करने वाले हार मान जाएं, तो दुनिया में कोई सफल नहीं होगा।”
मां की ये बात उसके दिल में उतर गई।
राधा ने फिर से शुरुआत की। इस बार उसने पहले से ज्यादा मेहनत की। उसने अपनी कमजोरियों को समझा और हर दिन खुद को बेहतर बनाया।
आखिरकार वह दिन आया जिसका उसे सालों से इंतजार था।
सरकारी नौकरी का रिजल्ट आया और राधा का चयन प्रशासनिक अधिकारी के पद पर हो गया।
पूरा गांव खुशी से झूम उठा। वही लोग जो कभी उसका मजाक उड़ाते थे, आज उसकी तारीफ कर रहे थे। गांव की लड़कियां उसे प्रेरणा मानने लगीं।
राधा जब अफसर बनकर पहली बार अपने गांव लौटी, तो उसकी मां की आंखों में आंसू थे। पिता गर्व से उसे देख रहे थे।
राधा ने गांव के बच्चों से कहा—
“सफलता अमीर या गरीब देखकर नहीं आती। सफलता सिर्फ मेहनत, हिम्मत और धैर्य देखकर आती है।”
उसने गांव में गरीब बच्चों के लिए मुफ्त शिक्षा की व्यवस्था शुरू की ताकि कोई और बच्ची सिर्फ गरीबी की वजह से अपने सपने न छोड़े।
राधा की कहानी हमें सिखाती है कि हालात कितने भी कठिन क्यों न हों, अगर इंसान के इरादे मजबूत हों तो वह अपनी किस्मत खुद लिख सकता है।
गरीबी इंसान की पहचान नहीं होती।
पहचान होती है उसके संघर्ष की, उसकी मेहनत की और उसके हौसले की।
जो लोग आज आपका मजाक उड़ाते हैं, वही लोग कल आपकी सफलता की कहानी सुनाएंगे।
इसलिए कभी हार मत मानो।
क्योंकि अंधेरी रात के बाद ही सबसे खूबसूरत सुबह आती है।
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