Humraaz

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Hustle

01/06/2026

मैं इक परिंदे को अपना ग़म सुना रहा था, और
जब वो मेरे ग़म को सुन रहा था,
तब उसे अपना ग़म मेरे ग़म के बराबर लग रहा था ।

पर जैसे ही मेरी बात ख़त्म होने को थी,
उसने मुझे संभालने के बजाए
अपने ग़म को मेरे सामने रखना ज़रूरी समझा ।

मैं भी क्या करता ,
मन ही मन,
बस उसके ग़म को
अपने ग़म से कम आंकने की कोशिश करता रहा ,
और उसका ग़म मेरे ग़म से काफ़ी कम निकला भी ,
लेकिन सिर्फ़ मेरे नज़रिये से ।

उसका ग़म अब भी मेरे ग़म से ज़्यादा था, उसके नज़रिए से।

फिर हमने ग़म को कम और खुशी को ज़्यादा तवज्जो देने की ठानी

और निश्चय किया कि एक दूसरे के ग़म को हम अपने तक ही रखेंगे ।

अगले दिन मैं फिर इक परिंदे से मिला और उसको अपना ग़म सुनाया और फिर जब वो .......

अब मैं रोज़ इक नए परिंदे से अपना ग़म बांटता हूँ।

ताकि दुनिया के सारे परिंदों के ग़म मुझे पता हों,
और मुझे सबसे ज़्यादा भारी अपना ग़म लगे।

:-Humraaz 🙂

28/04/2026

She'r by Dagh Dehlvi

Photos from Humraaz's post 19/02/2026

बस एक ख़्याल👇👇👇

किताबें कभी दोस्त नहीं बन पाई मेरी, दोस्त तो वो होते हैं ना जो आपको सुने और सुनाए । और किताबें ना तो सुनती है ना सुना पाती है ।
किताबें दरअसल शायद कभी दोस्त बन भी नहीं पाएंगी मेरी , क्योंकि किताबों को जब छोड़ दो वो तुम्हारे पीछे नहीं आते , दोस्त तो आपका पीछा नहीं छोड़ते न ,हां किताबें हमारे साथ चलती है , साथ चलने का अर्थ उसकी सीख से है ।

किताबें तो हर पल आपको सिखाती है तो किताबें हमारी गुरु हो सकती हैं। गुरु , गुरु इसलिए क्योंकि गुरु का काम आपको वो संवेदनाएं और समझ देना है जो शायद किसी दोस्त के जरिए आपको ना मिल पाएं हो ।

दोस्त तो वो होता है न जो आपकी गलती पर आपको बताने आए और गुरु आपकी गलती पर आपको शायद सजा दे या ना दें पर उस गलती को सुधारना उसका काम है ।

दोस्त तो वो होता है जो आपको संभाले आप जब गिर जाओ और किताबें आपको संभालती नहीं , उठाती भी है हर उस जगह से जहां आप गिरे हो या कभी गिर सकते हैं आने वाले समय में ।

किताबें दोस्त और गुरु शायद बस उस जगह हो पाई - जब बात रोने की आई तो दोस्तों ने तो रुलाया ही दोस्तों ने तब रुलाया जब बात दोस्ती निभाने की आई और किताबों ने लेखक की भावना को महसूस करा कर रुलाया ।

हम किताबों से इश्क़ कुछ इस तरह निभाते रहे
कि पन्ने पोछते रहे और धूल से बचाते रहे
:हमराज़

Photos from Humraaz's post 05/01/2026

ढ़लने लगी है शाम तो घर जाना चाहिए
घर ही नहीं तो कहिए किधर जाना चाहिए !

मुश्किल सही ये इश्क़ में कर जाना चाहिए
मरने पै बात आए तो मर जाना चाहिए

ऐसे बचेगी तेज़ हवाओं की आबरू
फूलों की पत्तियों को बिखर जाना चाहिए

ताक़त नहीं, वजूद नहीं, हौसला तो है
ज़ालिम से किस लिए हमें ड़र जाना चाहिए !

रौनक़ तो अंजुमन की हमारे ही दम से है
ये नश्श - ए - ग़ुरूर उतर जाना चाहिए

अब मेरी उँगलियों से टपकने लगा लहू
ए ज़ुल्फ़ेयार ! तुझको सँवर जाना चाहिए

'परवाज़' लोग देख के हँसते हैं तो हँसें
उसकी गली में दीद: - ए - तर जाना चाहिॆ़ए

🙏

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