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21/07/2024
Sawan Maas 2024
देवशयनी एकादशी की पूजा कैसे करे
देवशयनी एकादशी व्रत की शुरुआत दशमी तिथि की रात्रि से ही हो जाती है। दशमी तिथि की रात्रि के भोजन में नमक का प्रयोग नहीं करना चाहिए.
अगले दिन प्रात: काल उठकर दैनिक कार्यों से निवृत होकर सूर्य भगवान को जल अर्पित करें.
एकादशी की पूजा के लिए एक लकड़ी की चौकी पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की मूर्ति या फोटो को स्थापित करें.
इसके बाद दीपक प्रज्वलित कर हाथ में तिल और फूल लेकर व्रत का संकल्प लें विधिवत भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा करें.
सर्वप्रथम गंगा जल या पंचामृत से स्नान करवाएं, हल्दी,चंदन का टीका करें, पीले फल फूल अर्पित करें. धूप दीप करें. नैवेद्य के रूप में पीली मिठाई या खीर का भोग लगाएं.
भोग के साथ तुलसीदल अवश्य अर्पित करें क्योंकि बिना तुलसीदल के श्री हरि विष्णु भोग स्वीकार नहीं करते हैं.
भगवान विष्णु के मंत्र ओम नमो भगवते वासुदेवाय नमः मंत्र की एक माला जरूर करें. इस दिन विष्णु चालीसा, विष्णु सहस्त्रनाम व गजेंद्र मोक्ष का पाठ करना अत्यंत श्रेष्ठ माना जाता है.
इसके बाद आरती करें, जाने अनजाने गलतियों की क्षमा याचना जरूर करें. इस दिन देवशयनी एकादशी की व्रत कथा पढ़नी या फिर सुननी चाहिए.
शाम को भी भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विधि विधान से पूजा करें. संभव हो तो रात्रि जागरण करें भजन कीर्तन करें इससे विष्णु जी अत्यंत प्रसन्न होते हैं और भक्तों की समस्त कामनाएं पूर्ण करते है.
अगले दिन यानि द्वादशी तिथि पर ब्ब्राह्मण को भोजन कराएं, दान दक्षिणा दें इसके पश्चात ही स्वयं भोजन या पारण करना चाहिए.
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