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लोहा कैसे बनाया जाता है ?

लोहा सीधे ज़मीन से “लोहे” के रूप में नहीं निकलता। ज़मीन से हमें लौह अयस्क (Iron Ore) मिलता है, यानी ऐसी चट्टानें जिनमें लोहे के यौगिक मिले होते हैं। इन अयस्कों से अशुद्धियाँ हटाकर और रासायनिक प्रक्रिया करके लोहा बनाया जाता है।

सबसे आम तरीका है: ब्लास्ट फर्नेस (Blast Furnace) में लौह अयस्क से लोहा निकालना।

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1. लोहे का कच्चा माल क्या होता है?

लोहा बनाने के लिए मुख्य रूप से तीन चीज़ें चाहिए होती हैं:

1. लौह अयस्क (Iron Ore)

इसमें लोहे के ऑक्साइड होते हैं, जैसे:

हेमेटाइट (Hematite): Fe₂O₃
मैग्नेटाइट (Magnetite): Fe₃O₄

यही असली लोहे का स्रोत होता है।

2. कोक (Coke)

कोक एक तरह का लगभग शुद्ध कार्बन होता है, जो कोयले को गर्म करके बनाया जाता है।
इसका काम दो होता है:

कोक भट्टी को बहुत गर्म करता है।
साथ ही यह लोहे के ऑक्साइड से ऑक्सीजन हटाने में मदद करता है।

3. चूना पत्थर (Limestone): CaCO₃

यह अशुद्धियों को हटाने के लिए डाला जाता है।
यह मिट्टी, रेत जैसी अशुद्धियों से मिलकर स्लैग (Slag) बनाता है।

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2. ब्लास्ट फर्नेस क्या होती है?

ब्लास्ट फर्नेस एक बहुत बड़ी, ऊँची और मजबूत भट्टी होती है।
इसमें नीचे से बहुत गर्म हवा तेज़ दबाव से भेजी जाती है, इसलिए इसे Blast Furnace कहा जाता है।

इस भट्टी का तापमान लगभग 1500°C से 2000°C तक पहुँच सकता है।

ऊपर से इसमें डाला जाता है:

लौह अयस्क
कोक
चूना पत्थर

नीचे से गर्म हवा भेजी जाती है।

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3. भट्टी के अंदर क्या होता है?

अब सबसे जरूरी बात समझिए।

लौह अयस्क में लोहा अक्सर ऑक्सीजन के साथ जुड़ा हुआ होता है।
उदाहरण के लिए:

Fe₂O₃ = Iron Oxide

इसमें Fe यानी Iron है और O यानी Oxygen है।

हमें ऑक्सीजन हटाकर शुद्ध लोहा चाहिए।

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4. कोक जलता है और कार्बन मोनोऑक्साइड बनती है

ब्लास्ट फर्नेस के नीचे कोक गर्म हवा से जलता है।

पहले कार्बन ऑक्सीजन से मिलकर कार्बन डाइऑक्साइड बनाता है:

C + O₂ → CO₂

फिर यह कार्बन डाइऑक्साइड और अधिक गर्म कोक से मिलकर कार्बन मोनोऑक्साइड बनाती है:

CO₂ + C → 2CO

अब यह कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) बहुत महत्वपूर्ण है।

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5. कार्बन मोनोऑक्साइड लोहे के ऑक्साइड से ऑक्सीजन हटाती है

कार्बन मोनोऑक्साइड, लौह अयस्क में मौजूद लोहे के ऑक्साइड से ऑक्सीजन खींच लेती है।

सरल समीकरण:

Fe₂O₃ + 3CO → 2Fe + 3CO₂

मतलब:

लौह ऑक्साइड + कार्बन मोनोऑक्साइड
→ लोहा + कार्बन डाइऑक्साइड

यही मुख्य प्रक्रिया है, जिससे लोहे का अयस्क असली लोहे में बदलता है।

इस प्रक्रिया को कहते हैं:

अपचयन (Reduction)

क्योंकि इसमें लौह ऑक्साइड से ऑक्सीजन हटाई जाती है।

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6. पिघला हुआ लोहा नीचे जमा हो जाता है

ब्लास्ट फर्नेस में तापमान बहुत अधिक होता है, इसलिए बना हुआ लोहा पिघल जाता है।

यह पिघला हुआ लोहा भारी होता है, इसलिए भट्टी के नीचे जमा हो जाता है।

इस लोहे को कहते हैं:

पिग आयरन (Pig Iron)

पिग आयरन में कार्बन की मात्रा ज्यादा होती है, लगभग 3–4% तक।
इसलिए यह बहुत कठोर तो होता है, लेकिन भंगुर यानी जल्दी टूटने वाला भी हो सकता है।

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7. चूना पत्थर अशुद्धियाँ कैसे हटाता है?

लौह अयस्क में मिट्टी, रेत और सिलिका जैसी अशुद्धियाँ होती हैं।

चूना पत्थर गर्म होकर टूटता है:

CaCO₃ → CaO + CO₂

यहाँ CaO यानी Calcium Oxide बनता है।

अब Calcium Oxide, सिलिका जैसी अशुद्धियों से मिलकर स्लैग बनाता है:

CaO + SiO₂ → CaSiO₃

यह स्लैग पिघले हुए लोहे के ऊपर तैरता है, क्योंकि यह लोहे से हल्का होता है।

फिर इसे अलग निकाल दिया जाता है।

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8. पिग आयरन से स्टील कैसे बनता है?

ब्लास्ट फर्नेस से निकला पिग आयरन सीधे हर काम के लिए उपयोगी नहीं होता, क्योंकि इसमें कार्बन और अशुद्धियाँ ज्यादा होती हैं।

इसे आगे प्रोसेस करके स्टील (Steel) बनाया जाता है।

स्टील बनाने के लिए पिग आयरन से अतिरिक्त कार्बन, सल्फर, फॉस्फोरस जैसी अशुद्धियाँ हटाई जाती हैं।

इसके लिए आजकल सबसे ज्यादा इस्तेमाल होता है:

Basic Oxygen Furnace (BOF)
या
Electric Arc Furnace (EAF)

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Basic Oxygen Furnace में क्या होता है?

पिघले हुए पिग आयरन में तेज़ गति से शुद्ध ऑक्सीजन फूंकी जाती है।

ऑक्सीजन अतिरिक्त कार्बन से मिलकर गैस बना देती है:

C + O₂ → CO₂

इससे कार्बन की मात्रा कम हो जाती है।

जब कार्बन नियंत्रित मात्रा में रह जाता है, तो हमें स्टील मिलती है।

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9. लोहा और स्टील में अंतर क्या है?

बहुत लोग लोहा और स्टील को एक ही समझ लेते हैं, लेकिन दोनों में अंतर होता है।

लोहा (Iron) मूल धातु है।
स्टील (Steel) लोहे में थोड़ी मात्रा में कार्बन और कभी-कभी अन्य धातुएँ मिलाकर बनाया जाता है।

स्टील ज्यादा मजबूत, टिकाऊ और उपयोगी होती है।
इसीलिए इमारतों, पुलों, गाड़ियों, मशीनों और औजारों में स्टील का बहुत उपयोग होता है।

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10. पूरी प्रक्रिया को आसान भाषा में समझिए

लोहे की चट्टान यानी लौह अयस्क जमीन से निकाली जाती है।
उस अयस्क को साफ करके छोटे टुकड़ों में बदला जाता है।
फिर उसे कोक और चूना पत्थर के साथ ब्लास्ट फर्नेस में डाला जाता है।
नीचे से बहुत गर्म हवा भेजी जाती है।
कोक जलकर कार्बन मोनोऑक्साइड बनाता है।
कार्बन मोनोऑक्साइड लौह अयस्क से ऑक्सीजन हटाती है।
इससे असली लोहा बनता है।
लोहा पिघलकर नीचे जमा हो जाता है।
अशुद्धियाँ स्लैग बनकर ऊपर तैरती हैं।
फिर पिघले हुए लोहे को निकाल लिया जाता है।
बाद में इसे और शुद्ध करके स्टील बनाया जाता है।

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11. एक छोटा उदाहरण

मान लीजिए लौह अयस्क में लोहा ऐसे बंद है जैसे किसी चीज़ पर जंग लगी हो।
जंग भी लोहे और ऑक्सीजन का यौगिक होती है।

ब्लास्ट फर्नेस में कार्बन मोनोऑक्साइड उस ऑक्सीजन को हटाने का काम करती है।
जैसे ही ऑक्सीजन हटती है, लोहे का ऑक्साइड असली लोहे में बदल जाता है।

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निष्कर्ष

लोहा बनाने की प्रक्रिया असल में लौह अयस्क से ऑक्सीजन और अशुद्धियाँ हटाने की प्रक्रिया है।
ब्लास्ट फर्नेस में लौह अयस्क, कोक और चूना पत्थर डाला जाता है। कोक से बनी कार्बन मोनोऑक्साइड लौह अयस्क से ऑक्सीजन हटाती है और पिघला हुआ लोहा बनता है। फिर इस लोहे को और शुद्ध करके स्टील बनाया जाता है।

सरल शब्दों में:
लौह अयस्क से ऑक्सीजन हटाकर लोहा बनाया जाता है, और उसी लोहे को नियंत्रित कार्बन के साथ मजबूत बनाकर स्टील बनाया जाता है।

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