AnAlone Krishna
Dear readers, I, Krishna Kunal use the penname AnAlone Krishna while publishing my literary works on my Blog.
18/06/2026
"क्या आपसी विश्वास के बिना कोई भी रिश्ता कभी सुरक्षित रह सकता है?" — सलोनी की खुशबू
Blogpost Link: https://krishnakunal.blogspot.com/2025/05/SaloniKiKhusbu.html
"बाहरी दुनिया तो सिर्फ तमाशा देखती है, पर जब अपना ही जीवनसाथी शक का तमाशा बन जाए... तो वो रिश्ता दम तोड़ देता है।"
"सलोनी की खुशबू" (A split story of "Life की परछाई") समाज के उस क्रूर और कड़वे सच को सामने लाती है, जहाँ पर्याप्त बातचीत, प्री-मैरिटल डेटिंग और आपसी समझ की कमी एक हँसते-खेलते परिवार को तबाह कर देती है। यह कहानी है सलोनी की, जिसके चरित्र पर जब समाज की झूठी अफवाहों ने हमला किया, तो उसके अपने पति ने उसका ढाल बनने के बजाय उन अफवाहों को ही सच मान लिया।
जब घर की चारदीवारी के भीतर ही भरोसा पूरी तरह टूट जाए, तो एक औरत अपने आत्मसम्मान और अपनी संतान को बचाने के लिए क्या करे? सलोनी एक बेहद दर्दनाक और मजबूर फैसला लेती है। वह अपनी नवजात बेटी को उसी अनाथालय के पालने में छोड़ आती है, जहाँ कभी उसने और अभिषा ने वॉलंटियर के रूप में बच्चों की सेवा की थी। गार्जियन मदर्स के सामने घुटनों के बल बैठकर फूट-फूट कर रोती हुई सलोनी वहाँ सिर्फ अपनी बच्ची को नहीं, बल्कि एक भावुक खत और एल्युमिनियम अलॉय का वो नीले-काले सिंबल वाला लॉकेट अपनी आखिरी निशानी के तौर पर छोड़ जाती है।
लेखक AnAlone Krishna का यह सोशल सटायर (Social Satire) हर उस पाठक से एक सीधा सवाल करता है—क्या आप भी समाज की उस भीड़ का हिस्सा हैं जो बिना सच जाने किसी महिला के अतीत पर उँगली उठाने लगती है? या आप सच को टटोलने की हिम्मत रखते हैं?
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"सलोनी की खुशबू" | A short story by AnAlone Krishna | Split story of "Life की परछाई" Saloni Ki Khusbu | A bilingual short story written by AnAlone Krishna | Split story of "Life की परछाई" place on literary world of "हमदर्द सा कोई".
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