Mera Ramnagar

Mera Ramnagar

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Ramnagar,west champaran ,Bihar Bhitiyaharwa ashram where Gandhi ji started Satyagrah andolan.

25/03/2026

मेरे गृह नगर रामनगर , पश्चिमी चंपारण ( बिहार ) से अनेक ऐतिहासिक , प्राकृतिक और पर्यटन स्थलों पर जाया जा सकता है । इसे इन दर्शनीय स्थलों का " बेस - कैंप " भी कहा जा सकता है ।

सबसे पहले यह शहर खुद में हीं बहुत से ऐतिहासिक और सांस्कृतिक धरोहरों को अपने आप में समेटे हुए है । रामनगर का प्राचीन और भव्य नर्मदेश्वर महादेव मंदिर , बैकुंठवा देवी मंदिर , अष्टभुजी माई मंदिर , सबूनी पोखरा मंदिर , राजमहल और यहां की साहित्यिक - बौद्धिक संस्कृति देखने और महसूस करने योग्य है ।

रामनगर " चंपारण के लोग हंसेला " के अमर कवि स्व. ब्रजबिहारी प्रसाद ' चूर ' ; कवि स्व . सरयू सिंह ' सुंदर ' ; कवि , रंगकर्मी , संगीतकार , गायक , शिक्षाविद् और मशहूर फुटबॉलर स्व. दीपक एंथोनी ; मान्यताप्राप्त रेफरी श्री नरसिंह यादव ; स्व. कवि कामेश्वर सिंह ' विद्रोही ' ; मशहूर चिकित्सक और संस्कृति कर्मी स्व. डॉ. बी . एन . झा ; राजनीतिज्ञ , फुटबॉलर , रंगकर्मी और हरदिल अजीज स्व. अर्जुन विक्रम शाह ; नेता जी सुभाषचंद्र बोस के बेहद करीबी और नेता जी की पार्टी " फॉरवर्ड ब्लॉक " के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष , कवि , शिकार कथा लेखक और स्वतंत्रता सेनानी स्व. महंत धनराज पूरी ; पूर्व केंद्रीय रेल मंत्री तथा बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री स्व. श्री केदार पाण्डेय ; अद्भुत प्रतिभा के धनी रंगकर्मी स्व. रामचंद्र बारी , श्री रामजी प्रसाद , स्व. श्री सत्यनारायण बाबू , स्व. श्री सीता बाबू आदि । ये सारी विभूतियां मिलकर रामनगर की हवा और मिट्टी को साहित्य और संस्कृति से सुवासित करते थे । आज इनमें से एक - दो को छोड़ कर कोई इस दुनिया में नहीं हैं लेकिन इन्होंने जो रामनगर को पहचान दी है , उसे भुलाया नहीं जा सकता ।

रामनगर के उत्तर में शिवालिक का विस्तृत रेंज और घने जंगल हैं । यहां से गोबर्धना रेंज , मगुराहां रेंज , जंगल - सफारी और सोमेश्वर पर्वतमाला की सबसे ऊंची चोटी पर स्थित मां कालिका स्थान है । मां कालिका स्थान पहुंचने का ट्रैक बहुत खूबसूरत और मनोहारी तो है हीं , बहुत दुरूह भी है ।

साल में केवल एक बार चैत्र नवरात्र में यहां का रास्ता खुलता है और श्रद्धालुओं की भारी भिंड जुटती है । आज कल यह यात्रा चल रही है और बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं । यद्यपि सरकार द्वारा श्रद्धालुओं के लिए अभी पर्याप्त सुविधाएं नहीं मुहैया कराई गई है लेकिन " सीमा सुरक्षा बल " के जवान पूरी यात्रा की मुस्तैदी से देखरेख करते हैं और शीतल जल , गुड़ और चना की मुफ्त व्यवस्था रखते हैं ।

- शेष दो - चार दिन बाद

11/03/2026

मेरे गृह नगर रामनगर , जिला - पश्चिमी चंपारण ( बिहार ) में दो थियेटर थे । एक " हिंद सिनेमा " और एक "श्यामज्योति सिनेमा " ।

" हिंद सिनेमा " को पुरनका सिनेमा और " श्यामज्योति " को नयका सिनेमा कहा जाता था । पुरनका पिछले साल मालिकों द्वारा जमींदोज कर दिया गया और नयका कोविड के समय से हीं बंद है ।

अब हम कह सकते हैं कि हमारे शहर में एक भी थियेटर नहीं है और सिनेमा घरों में जाकर तीन घंटे मगजमारी करने का हमारे पास समय भी नहीं है । हम ' रील ' देख कर मजे में हैं ।

लेकिन आज मैं जब नयका के सामने से गुजरा तो बरबस मेरे कदम रुक गए । ऐसा लगा नयका कुछ कहना चाहता था । लेकिन मैं सुन कर कर भी क्या सकता था ।

' रील ' के जमाने में कुछ ' फील ' करना बेमानी है 😔

बस कुछ दिन , और तुम भी गिरा दिए जाओगे
नयके 😔

Photos from Mera Ramnagar's post 10/01/2026
09/01/2026

श्री सुजल सिंह के पोस्ट से , साभार ।

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