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16/09/2022
पूर्वी भारत का पहला वाइन मॉल कोलकाता में बनेगा
1. दक्षिण कोलकाता में पांच मंजिला केंद्र बनेगा
2. दुनिया के हर ब्रांड की शराब उपलब्ध होगी
3. प्रस्ताव को सरकार की स्वीकृति का इंतजाम
4. शराब की आमदनी को पर्यटन से जोड़ने की कवायद
राष्ट्रीय खबर
कोलकाताः कोलकाता में शीघ्र ही एक पूरा मॉल ही शराब के लिए बनने जा रहा है। मिली जानकारी के मुताबिक इस पांच मंजिली व्यापारिक भवन में सिर्फ शराब की ही बिक्री होगी। इस प्रस्ताव पर अभी विचार चल रहा है और अगर इसे मंजूरी मिल जाती है तो यह पूर्वी भारत का पहला वाइन मॉल बनेगा।
वैसे इस किस्म के मॉल भारत में मुंबई और बेंगलुरु में हैं। बेंगलुरु के इस वाइन मॉल का नाम टनिक है, जिसे एशिया का सबसे बड़ा शराब मॉल माना जाता है। अब पश्चिम बंगाल सरकार शराब के कारोबार से होने वाले राजस्व की आमदनी को बढ़ाने के साथ साथ इस विदेशी पर्यटन के साथ जोड़ने के प्रस्ताव पर विचार कर रही हैं। अगर इस प्रस्ताव को सरकार की मंजूरी मिल जाती है तो देश के अलावा विदेश मे मिलने वाले सारे ब्रांड के शराब यहां शौकिनों के लिए उपलब्ध होंगे। इस जरिए देश और विदेश के पर्यटन भी यहां आना चाहेंगे। इससे सरकार के खजाने में अतिरिक्त आमदनी होगी। वैसे पश्चिम बंगाल सरकार यह जानती है कि पहले बिहार की शराब बंदी की वजह से उसके खजाने में अधिक आमदनी आती रही है। अब झारखंड सरकार की नई शराब नीति की वजह से भी उसे और फायदा हो रहा है। शराब के शौकिनों को अलग अलग किस्म के शराब के ब्रांडों की जानकारी होती है। यह सक्षम लोगों के बीच बांटा जाने वाला एक बेहतर उपहार भी माना जाता है। अंदरखाने से मिली जानकारी के मुताबिक कोलकाता के ही एक बड़े शराब कारोबारी ने देश विदेश का दौरा करने के बाद राज्य सरकार को यह प्रस्ताव दिया है। सरकार तक प्रस्ताव पहुंचने के बाद आबकारी विभाग में इस पर चर्चा सार्थक रही है लेकिन अपने किस्म का नया प्रयोग होने की वजह से इसके लिए राज्य सरकार की मंजूरी जरूरी है। खबर के मुताबिक अगर यह प्रस्ताव स्वीकार होता है तो अगले साल के मध्य तक कोलकाता के दक्षिणी हिस्से में इस पांच मंजिली शराब मॉल को खोला जाएगा। देश-विदेश के अनेक शहरों में कपड़ा सहित अन्य उपयोग सामानों के मॉल पहले से हैं, जहां एक ही छत के नीचे उस किस्म के सारे सामान उपलब्ध होते हैं। इसी व्यापारिक पद्धति को अब बेंगलुरु की तर्ज पर कोलकाता में आजमाने की कोशिश हो रही है। इसके लिए दुनिया भर के प्रसिद्ध ब्रांडों को यहां उपलब्ध कराना कोई आसान काम नहीं होगा। लेकिन इसकी शुरुआत होने पर तमाम विदेशी पर्यटक भी अपनी पसंद के ब्रांड की तलाश में यहां आयेंगे, जो राजस्व की आमदनी को बढ़ाने का नया रास्ता बनायेगा। प्रस्तावित योजना के मुताबिक पांच मंजिले इस मॉल के हर तल्ले पर एक बार सह रेस्टोरेंट भी होगा, जहां लोग अपने हिसाब से सुरापान करने के साथ साथ भोजन ले सकेंगे।
इस बीच यह भी खबर आय़ी है कि पिछले साल विदेशी शराब की कीमतों में कमी किये जाने के बाद इस बार दाम बढ़ाने की तैयारी चल रही है। वैसे राज्य के आबकारी विभाग के सूत्र बताते हैं कि कीमतों में बढ़ोत्तरी होने के बाद भी उनकी कीमत पिछले नवंबर के पहले से काफी कम रहेंगे और नया रेट आगामी 15 सितंबर से लागू कर दिया जाएगा।
27/08/2022
इस ग्रह के पास दो सूर्य और एक बहुत ही गहरा समुद्र भी है
1. हमारी धरती से करीब एक सौ प्रकाश वर्ष दूर है
2. टेस सैटेलाइट ने पहली बार इसे देखा है
3. वजन में पृथ्वी से पांच गुणा अधिक है
4. दो सूर्यों की परिक्रमा अलग अलग है
राष्ट्रीय खबर
रांचीः पृथ्वी के जैसे ग्रहों की तलाश लंबे समय से जारी है। इस क्रम में कई ऐसे ग्रहों का पता भी चला है जहां के मौसम के बारे में अनुमान है कि वे पृथ्वी के जैसे ही हो सकते हैं। लेकिन यह सिर्फ वैज्ञानिक आकलन भर है।
अब तक का खगोल विज्ञान इतना विकसित नहीं हुआ है कि वहां तक कोई अंतरिक्ष यान भेजकर उसकी वास्तविक जांच कर सके। इसके बाद भी पृथ्वी के जैसे ग्रहों को खोजने का क्रम जारी है और उसके साथ ही यह सिलसिला भी जारी है कि क्या धरती के बाहर भी कहीं किसी रुप में कोई और जीवन मौजूद है। इस कड़ी में एक और पृथ्वी के जैसे ग्रह का पता चला है। आकार में यह शायद पृथ्वी से बड़ा है। प्रारंभिक अनुमान के मुताबिक इस ग्रह के दो दो सूर्य हैं और उसके पास एक बहुत ही गहरा समुद्र भी है।
यहां से करीब एक सौ प्रकाश वर्ष की दूरी पर स्थित इस ग्रह का नाम टीओआई-1452 बी रखा गया है। यह ग्रह एक साथ दो तारों का चक्कर लगा रहा है। यह शायद धऱती से सत्तर प्रतिशत अधिक बड़ा है। इसका पता चलने के बाद अब खगोल दूरबीनों के सहारे इस पर और अनुसंधान किया जा रहा है। इसके दो सूरज होने की वजह से भी वैज्ञानिकों की उत्सुकता बढ़ी है। हमारी धरती सिर्फ एक ही सूर्य के चक्कर लगाती है। इसलिए सूर्य के मामले में यह हमारी धरती से थोड़ा भिन्न है। यूनिवर्सिटी ऑफ मॉंट्रियल के शोध दल ने कहा कि अभी पक्के तौर पर यह नहीं माना जा सकता है कि वहां का समुद्र बहुत ही गहरा है लेकिन वहां के बाकी आंकड़े वहां पानी मौजूद होने का संकेत देते हैं और वजन में पृथ्वी से पांच गुणा अधिक भारी होने की वजह से ही उसमें ढेर सारा पानी होने का यह अनुमान लगाया गया है।
इस बारे में नासा द्वारा जारी विज्ञप्ति में बताया गया है कि कई अन्य ग्रहों पर भी पानी मौजूद होने की जानकारी मिली है जो दूसरे स्वरुप में है। यहां तक कि चांद की गहराई में भी बर्फ के रूप में पानी है। यह ग्रह अपने एक तारे का चक्कर मात्र ग्यारह दिनों में लगाता है। यानी धरती के नियमों के मुताबिक वहां का एक साल मात्र 11 दिन का होता है। यह ग्रह जिस तारे का चक्कर ग्यारह दिन में लगाता है उसकी गर्मी सूर्य से कम है और उस तारा से जो ताप इस ग्रह तक पहुंचता है, वह शायद हमारे सूर्य से शुक्र ग्रह तक पहुंचने वाले ताप के बराबर हो सकता है। इसलिए वहां पानी अगर रहा था तो अब भी मौजूद है।
मजेदार बात यह है कि यह ग्रह जिस दूसरे तारे का चक्कर लगाता है वह चक्कर चौदह सौ वर्षों में पूरा होता है। इसलिए यह भी माना जा रहा है कि यह शायद एक बड़ा पत्थऱ जैसा हो, जिसमें कोई वायुमंडल ही नहीं हो अथवा यह पत्थरों का खंड हो जो हाईड्रोजन और हिलियम गैस से भरा हो। टेस सर्वे सैटेलाइट से मिले आंकड़ों के बाद धरती पर स्थापित वेधशालाओं से उसे देखा गया है। अब उम्मीद की जा रही है कि जेम्स वेब टेलीस्कोप से इसके बारे में और अधिक जानकारी मिल सकेगी।
26/08/2022
भीषण सूखे की चपेट में चीन के कारखाने बंद और लोडशेडिंग जारी
बीजिंगः चीन के कुछ इलाकों में भीषण गर्मी पड़ रही है, यह अब पुरानी बात है। अब जो कुछ पानी वहां के जलागारों में बचा है, उसे बचाये रखने के लिए जलविद्युत केंद्र बंद कर दिये गये हैं। ऐसा इसलिए किया गया है ताकि लोगों को कमसे कम पीने का पानी उपलब्ध कराया जा सके। अब बिजली उत्पादन बंद होने की वजह से हजारों कारखानों को भी बंद करना पड़ा है क्योंकि उनमें उत्पादन करने के लिए बिजली ही उपलब्ध नहीं है। कोरोना वायरस के लॉकडाउन के बाद यह चीन के कई इलाकों के लिए अब सबसे बड़ा संकट लेकर सामने आ गया है। फिलहाल वहां गर्मी से मुक्ति अथवा बारिश की कोई उम्मीद नहीं है। इससे पहले वहां कृत्रिम बारिश कराने की भी कोशिश हुई थी लेकिन बादल बहुत कम होने की वजह से यह प्रयोग असफल साबित हुआ है। इससे चीन की अर्थव्यवस्था पर फिर से चोट पहुंच रहा है क्योंकि उसकी उत्पादकता तेजी से घटती जा रही है। यहां के शिचुआन प्रारंत में सबसे अधिक औद्योगिक गतिविधियां होती हैं। अब यह प्रांत पूर तरह सूखे की चपेट में है। अब वहां के डैमों में जो थोड़ा पानी बचा है, उसे लोगों के पीने के लिए सुरक्षित रखा गया है। इसी वजह से अनेक जलविद्युत केंद्र बंद होने की वजह से अब सभी इलाकों में लगातार लोडशेडिंग की जा रही है। इसका असर चीन के सबसे बड़े व्यापारिक शहर शंघाई तक पहुंच रहा है। नदियों के लगातार सूखते चले जाने की वजह से डैमों में पानी की आमद भी तेजी से कम हो रही है जबकि तेज गर्मी की वजह से हर स्थान पर पानी तेजी से भाप बन रहा है। शिचुआन के अलावा चोंगक्विंग और हुबेई प्रांत तक इसका असर हो रहा है। चीन के इस इलाके की सबसे प्रमुख नदी यांग्टेज में कम बारिश की वजह से 45 प्रतिशत कम पानी एकत्रित हुआ था। अब अगले एक सप्ताह तक यही स्थिति कायम रहने की आशंका है। इस बीच सरकार की तरफ से बताया गया है कि वहां की 66 नदियां पूरी तरह सूख चुकी है। अब जिन नदियों से नौ परिवहन होता था, वह भी कम पानी की वजह से बंद करना पड़ा है। उम्मीद की गयी है कि एक सप्ताह के भीतर बारिश होने के बाद ही स्थिति में कुछ सुधार संभव है।
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