The Light Ministry Ranchi

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21/03/2026
16/03/2026

*सूखी हड्डियों में जीवन*
शास्त्र वचन:
"तब उसकी आज्ञा के अनुसार मैंने भविष्यद्वाणी की, और उनमें प्राण समा गए, और वे जी उठे और अपने-अपने पांवों के बल खड़े हो गए; और वे एक बहुत बड़ी सेना हो गए।" — यहेजकेल 37:10
चिन्तन:
यहेजकेल का यह दर्शन उन परिस्थितियों के लिए है जो पूरी तरह निर्जीव और आशाहीन लगती हैं। कभी-कभी हमें अपना जीवन, अपने सपने या परिस्थितियाँ उन "सूखी हड्डियों" की तरह महसूस होती हैं जिनमें जीवन की कोई संभावना नहीं दिखती। लेकिन परमेश्वर का वचन स्पष्ट करता है कि हमारी सामर्थ्य हमारी स्थिति में नहीं, बल्कि उसकी आज्ञा में है।
जब यहेजकेल ने परमेश्वर के कहे अनुसार भविष्यद्वाणी की, तो असंभव संभव हो गया। "प्राण" (रूआह - आत्मा की श्वास) के प्रवेश करते ही मुर्दा हड्डियाँ न केवल जीवित हुईं, बल्कि एक महान सेना बन गईं। यह दर्शाता है कि परमेश्वर आपको केवल जीवित करने के लिए नहीं, बल्कि आपको सामर्थ्य देने और अपने उद्देश्य के लिए खड़ा करने की शक्ति रखता है। आपकी वर्तमान स्थिति चाहे कितनी भी कठिन क्यों न हो, परमेश्वर का वचन उसमें नया जीवन फूंकने के लिए पर्याप्त है।
प्रार्थना:
हे जीवित परमेश्वर, मेरे जीवन के हर सूखे क्षेत्र में अपनी आत्मा की श्वास फूंकें। मुझे अपनी सामर्थ्य में खड़ा करें ताकि मैं आपके राज्य के लिए एक योद्धा बन सकूँ। आमीन।
बिशप रोहित।।

14/03/2026

Recieved Supernatural Breakthrough in a Court Case after recieving Prayers on the Photograph Rohit

14/03/2026

नम्रता और पूर्ण भरोसा
शास्त्र वचन:
"इसलिये परमेश्वर के बलवन्त हाथ के नीचे नम्रता से रहो, जिससे वह तुम्हें उचित समय पर बढ़ाए। और अपनी सारी चिन्ता उसी पर डाल दो, क्योंकि उसको तुम्हारा ध्यान है।" — 1 पतरस 5:6–7
चिन्तन:
यह वचन हमें शांति का मार्ग दिखाता है। पहला कदम है नम्रता। जब हम परमेश्वर के "बलवन्त हाथ" के नीचे आते हैं, तो हम स्वीकार करते हैं कि उसकी योजना और समय हमारे लिए श्रेष्ठ है। नम्रता का अर्थ है अपनी चिंताओं को ढोने के बजाय उसकी सामर्थ्य पर भरोसा करना।
दूसरा कदम है चिन्ता छोड़ना। पतरस कहता है कि अपनी "सारी" चिन्ता उस पर डाल दें। हम ऐसा इसलिए कर सकते हैं क्योंकि वह हमारी परवाह करता है। जब हम बोझ स्वयं उठाते हैं, तो हम थक जाते हैं, लेकिन जब हम उन्हें परमेश्वर को सौंपते हैं, तो हमें उसकी अलौकिक शांति मिलती है। आज अपनी चिंताओं को प्रभु के चरणों में रखें; वह आपको कभी नहीं छोड़ेगा।
प्रार्थना:
प्रभु, मुझे अपने सामने नम्र होना सिखाएं। मेरी सारी चिन्ताएँ आप संभाल लें। आमीन।
बिशप रोहित ।।

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