Anil Verma Silpara Rewa

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हम सभी को यह लगता है कि ये तो मात्र मनोरंजन के लिए है, इससे थोड़ी हमारे जीवन में कोई असर थोड़ी होता है?

जी हाँ होता है। 
दुनिया में कोई चीज़ जिसको इतने Interest और मानसिक Investment के साथ देखा जाए उसका आपके मस्तिष्क और चेतना पर असर न हो ऐसा हो ही नहीं सकता। 

Infact पढ़ाई से कई गुणा अधिक ये चीज़ हमारे जीवन में असर करती है क्योंकि पढ़ाई अधिकतर लोग मज़े से नहीं करते। पर इसमें आनंद पूरा लेते है।यदि यह चीज़ें असर नहीं करती तो कंपनियाँ करोड़ों न खर्चती इन लोगों से अपने Brand का एडवर्टिजमेंट करवाने के लिए। 

कहते है, 
‘सिनेमा समाज का आईना होता है’

वो इसलिए क्योंकि मूलभूत रूपसे सिनेमा बनाने वाले वही बनाते है जिसकी Demand सबसे अधिक हो, जिससे अधिक से अधिक लोग उसे देखे और उन्हें कमाई दे। 

और युवाओं की इस कामुकत्व और इस उमर की भावुकता का जाल बिछाकर उन्हें इस दलदल में और फसाया जाता है। और क्योंकि आज संस्कार देने में इतना ध्यान नहीं दिया जाता तो सभी युवा यहीं से अपने संस्कार पाते है। 

इसीलिए इन सभी मॉडर्न नॉनसेंस का त्याग करें, अपने जीवन में सनातन संस्कार का सिंचन करें, और भारत को पश्चिमी देशों की दिशा में जाने से रोकें। 

यदि आपको नहीं पता की शुरुआत कैसे करें, 
तो हमारी ‘B.O.S.S’ और ‘वैदिक दिनचर्या’ पुस्तक प्राप्त करें और उसे अपने जीवन में उतारकर जीवन को धर्ममय बनाएँ। 

पुस्तकें आपको हमारी वेबसाइट पर मिल जाएगी,
www.veducation.world/links (Link in @veducationn Bio)

आइए मिलकर इस भारत में पुनः वैदिक संस्कृति की स्थापना करते है और भारत को पुनः सोने की चिड़िया बनाते है।

#Indiaby23 
#ProjectGoldenBird 10/09/2023

हम सभी को यह लगता है कि ये तो मात्र मनोरंजन के लिए है, इससे थोड़ी हमारे जीवन में कोई असर थोड़ी होता है? जी हाँ होता है। दुनिया में कोई चीज़ जिसको इतने Interest और मानसिक Investment के साथ देखा जाए उसका आपके मस्तिष्क और चेतना पर असर न हो ऐसा हो ही नहीं सकता। Infact पढ़ाई से कई गुणा अधिक ये चीज़ हमारे जीवन में असर करती है क्योंकि पढ़ाई अधिकतर लोग मज़े से नहीं करते। पर इसमें आनंद पूरा लेते है।यदि यह चीज़ें असर नहीं करती तो कंपनियाँ करोड़ों न खर्चती इन लोगों से अपने Brand का एडवर्टिजमेंट करवाने के लिए। कहते है, ‘सिनेमा समाज का आईना होता है’ वो इसलिए क्योंकि मूलभूत रूपसे सिनेमा बनाने वाले वही बनाते है जिसकी Demand सबसे अधिक हो, जिससे अधिक से अधिक लोग उसे देखे और उन्हें कमाई दे। और युवाओं की इस कामुकत्व और इस उमर की भावुकता का जाल बिछाकर उन्हें इस दलदल में और फसाया जाता है। और क्योंकि आज संस्कार देने में इतना ध्यान नहीं दिया जाता तो सभी युवा यहीं से अपने संस्कार पाते है। इसीलिए इन सभी मॉडर्न नॉनसेंस का त्याग करें, अपने जीवन में सनातन संस्कार का सिंचन करें, और भारत को पश्चिमी देशों की दिशा में जाने से रोकें। यदि आपको नहीं पता की शुरुआत कैसे करें, तो हमारी ‘B.O.S.S’ और ‘वैदिक दिनचर्या’ पुस्तक प्राप्त करें और उसे अपने जीवन में उतारकर जीवन को धर्ममय बनाएँ। पुस्तकें आपको हमारी वेबसाइट पर मिल जाएगी, www.veducation.world/links (Link in @veducationn Bio) आइए मिलकर इस भारत में पुनः वैदिक संस्कृति की स्थापना करते है और भारत को पुनः सोने की चिड़िया बनाते है। #Indiaby23 #ProjectGoldenBird

votar card hai hamari pahchan anil k verma Silpara Rewa MP India 24/08/2023

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28/07/2023

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