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23/05/2025

राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान(एनआईटी),राउरकेला के शोधकर्ताओं ने एक नवीन

सेमीकंडक्टर डिवाइस आधारित बायोसेंसर पर शोध किया है जो जटिल या महंगी प्रयोगशाला प्रक्रियाओं की आवश्यकता के बिना स्तन कैंसर कोशिकाओं की पहचान कर सकता है. यह शोध इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रो. प्रसन्न कुमार साहू के नेतृत्व में उनकी शोधार्थी डा. प्रियंका कर्माकर के साथ किया गया है. इस शोध के निष्कर्ष प्रतिष्ठित माइक्रोसिस्टम टेक्नोलॉजीज़ जर्नल में प्रकाशित हुए हैं. पिछले कुछ वर्षों में घातक बीमारियों के बढ़ते मामलों ने बायोमोलेक्यूल मूल्यांकन और पॉइंट-ऑफ-केयर परीक्षणों पर वैश्विक ध्यान केंद्रित हुआ है. इन्हीं बीमारियों में कैंसर एक प्रमुख वैश्विक सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या है। इस संदर्भ में

भारत में पिछले कुछ दशकों में स्तन कैंसर के मामलों में तीव्र वृद्धि देखी गई है। क्योंकि कैंसर कोशिकाएं अक्सर प्रगति के कोई प्रारंभिक लक्षण नहीं दिखाती हैं, इसलिए रोग को फैलने से रोकने और समय पर इलाज के लिए शीघ्र पहचान आवश्यक है। वर्तमान में, एक्स-रे, मैमोग्राफी, एंजाइम-लिंक्ड इम्यूनोसॉर्बेंट एसे
टेस्ट (एलिसा), अल्ट्रासोनोग्राफी और मैग्नेटिक रेजोनेंस इमेजिंग (एमआरआइ) जैसी कई विधियों से कैंसर की पहचान की जाती है. लेकिन इनमें से अधिकांश के लिए विशेष उपकरण और प्रशिक्षित स्टाफ की आवश्यकता होती है. इसके अलावा, यह विधियां दूरदराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के लिए सामान्यतः सुलभ नहीं होतीं

Photos from The VoiceScope's post 18/05/2025

राउरकेला इस्पात संयंत्र द्वारा राउरकेला हवाई अड्डे पर अपहरण विरोधी मॉक अभ्यास सफलतापूर्वक आयोजित

सेल, राउरकेला इस्पात संयंत्र द्वारा 16 मई 2025 को राउरकेला विमानतल पर अपहरण विरोधी मॉक अभ्यास सफलतापूर्वक आयोजित किया गया। यह अभ्यास अपहरण की स्थितियों से निपटने के लिए मौजूद आकस्मिक योजना की प्रभावशीलता का परीक्षण करने के लिए आयोजित किया गया था और इसे नागरिक उड्डयन सुरक्षा ब्यूरो (बीसीएएस) द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुरूप किया गया था।

अभ्यास का प्राथमिक उद्देश्य विमान अपहरण की स्थिति में विभिन्न हितधारकों की तैयारी, समन्वय और संकट प्रतिक्रिया क्षमताओं का आकलन करना था।
मॉक अभ्यास में अपहरण की घटना का अनुकरण, सुरक्षा और आपातकालीन प्रतिक्रिया टीमों की वास्तविक समय पर तैनाती और हवाई अड्डे के अधिकारियों और बाहरी एजेंसियों के बीच समन्वय शामिल था।

इसमें सुधार के क्षेत्रों की पहचान करने और हवाई अड्डे पर समग्र सुरक्षा ढाँचे को मजबूत करने के लिए संचार प्रणालियों, प्रतिक्रिया समय और संकट प्रबंधन प्रोटोकॉल का गहन मूल्यांकन भी शामिल था। अभ्यास के दौरान कई एजेंसियों के प्रमुख अधिकारी और प्रतिनिधि मौजूद थे।

उल्लेखनीय उपस्थित लोगों में सहायक निदेशक, खुफिया ब्यूरो (गृह मंत्रालय), श्री एस पुरोहित, श्री एम के उपाध्याय, निदेशक, आरजीएच, साथ ही राज्य पुलिस, राज्य अग्निशमन सेवा, बम डिटेक्शन और डिस्पोजल स्क्वाड (बीडीडीएस), आतंकवाद निरोधक दस्ता (एटीएस), सीएनएस, एआईएएसएल, एआईईएसएल, एएएएल और आईओसीएल के प्रतिनिधि शामिल थे। हवाई अड्डे की सुरक्षा और अग्निशमन सेवाओं के कर्मियों ने भी इसमें सक्रिय रूप से भाग लिया, जिससे एक व्यापक और समन्वित प्रयास सुनिश्चित हुआ। सावधानीपूर्वक योजनाबद्ध और क्रियान्वित किया गया पूरे कवायद का नेतृत्व महाप्रबंधक (पीएच, एसडब्ल्यू और एयरपोर्ट, आरएसपी) सह जवाबदेह कार्यकारी, राउरकेला हवाई अड्डे, श्री ज्योति प्रकाश मिश्रा द्वारा किया गया ।

Photos from The VoiceScope's post 16/05/2025

NIT Rourkela researchers have developed an effective upgrade to Electrocardiography (ECG), one of the most commonly used techniques to monitor heart activity. This new system helps in easily detecting subtle electrical signals from the upper chambers of the heart, which are often too indistinct to be seen clearly in regular ECGs. These signals play a key role in identifying abnormal heart rhythms that can lead to serious conditions such as atrial fibrillation which can further lead to stroke.

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