RPI-Ambedkar
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29/05/2026
* #माईसहाब #आंबेडकर की #पुण्यतिथि पर #विनम्र #अभीवादन*
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आज दिनांक 29 #मई को माईसहाब आंबेडकर जी की पुण्यतिथि है।भारतीय दलित पैंथर / आरपीआई में *माईसहाब आंबेडकर जी के साथ डा मोहनलाल पाटील ने 20 वर्ष (1979 से 2000) तक निरंतर कार्य किया*। भोपाल आगमन पर पाटील सहाब के निवासस्थान जाकर परिवार से मिलती थी।
माईसाहेब डॉ. #माईसहाब (सविता) #आंबेडकर के बारे में #कुछ और #ज़रूरी #बातें:
*1. बाबासाहेब की हेल्थ केयर*
1940 के बाद, बाबासाहेब को डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, न्यूराइटिस और आर्थराइटिस की दिक्कत थी। उन्हें रात में दर्द होता था। क्योंकि माईसाहेब खुद एक डॉक्टर थे, इसलिए उन्होंने बाबासाहेब के खाने-पीने, दवाइयों और फिजियोथेरेपी का ध्यान रखा। *बाबासाहेब ने _द बुद्धा एंड हिज़ धम्म_ के इंट्रोडक्शन में लिखा था: *अगर मेरी पत्नी सविता ने मेरी सेवा नहीं की होती, तो मैं 8-10 साल* पहले मर गया होता।
*2. ज़रूरी ऐतिहासिक घटनाओं में हिस्सा*
- *संविधान लिखना 1947-1950*: बाबासाहेब ड्राफ्टिंग कमेटी के चेयरमैन थे। उस दौरान, माईसाहेब दिन-रात काम, स्ट्रेस, बीमारी, इन सब में उनके साथ थीं।- *धम्मदीक्षा 14 अक्टूबर 1956*: बाबासाहेब ने नागपुर में 3.65 लाख फॉलोअर्स के साथ बौद्ध धर्म अपना लिया। माईसाहेब ने भी उसी दिन दीक्षा ली थी।
- *बाबासाहेब का महापरिनिर्वाण 6 दिसंबर 1956*: उसके बाद माईसाहेब अकेली हो गईं।
*3. बाद में #संघर्ष और #काम*
बाबासाहेब की मौत के बाद, कुछ पॉलिटिकल एक्टिविस्ट ने माईसाहेब को साइडलाइन कर दिया। 1970 के बाद, वह पब्लिक लाइफ में लौट आईं।
*उनके किए गए काम:*
1. * #मराठवाड़ा #नामांतर #संघर्ष 1978*: मराठवाड़ा यूनिवर्सिटी का नाम डॉ. बाबासाहेब *अंबेडकर* के नाम पर रखने के आंदोलन में सक्रिय भागीदारी
2. * #रिडल्स #मूवमेंट*: बाबासाहेब की _*रिडल्स इन हिंदुइज्म_ *किताब* पर बैन के खिलाफ लड़ाई
3. * #अयोध्या #केस*: सुप्रीम कोर्ट में एक पिटीशन फाइल की गई जिसमें कहा गया कि अयोध्या की जमीन बौद्धों की है। 4. *अंबेडकर म्यूज़ियम, पुणे*: 1982 से, बाबासाहेब का सामान, चिट्ठियां, किताबें *सिम्बायोसिस सोसाइटी* को दान कर दी गईं। वे 2001 तक हर साल 14 अप्रैल और 6 दिसंबर को म्यूज़ियम जाते थे।
*4. #माईसाहेब की #किताब*
*नाम*: _*डॉ.अंबेडकर का साथ*_ - मराठी ऑटोबायोग्राफी, 1990 में पब्लिश हुई।
*इंग्लिश ट्रांसलेशन*: _बाबासाहेब: डॉ. अंबेडकर के साथ मेरी ज़िंदगी_, नदीम खान की। यह किताब बाबासाहेब का एक अलग पहलू दिखाती है - वे रोमांटिक चिट्ठियां लिखते थे, माईसाहेब को बताते थे कि क्या कपड़े पहनने हैं, मटन करी बनाते थे, वायलिन बजाते थे, स्कल्पचर ट्राई करते थे।
*5. #परिवार के बारे में एक दिलचस्प बात*
माईसाहेब के पिता कृष्णराव कबीर खुद बहुत प्रोग्रेसिव थे। उनके 8 बच्चों में से 6 ने इंटर-कास्ट शादी की - यह 1940 के दशक में बहुत बड़ी बात थी। इसीलिए शारदा कबीर और बाबासाहेब की शादी परिवार के किसी विरोध के बिना हो गई।
*याद*: माईसाहेब का देहांत *29 मई 2003 को हुआ*। उन्हें "माईसाहेब" के नाम से जाना जाता है।
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