Manoj mishra
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08/05/2026
#हाईकोर्ट_ने_दिया_मुआवजे_का_फरमान :चाहे पंछी या जानवर करे फसल नुकसान !
https://youtu.be/dd1yysdmIyA
तोते ले गए अनार, पर किसान ने नहीं मानी हार !
बॉम्बे हाईकोर्ट का वो फैसला, जो बन गया किसानों का हथियार !!
आज के ब्लॉग में हम आपको बताने जा रहें हैं एक ऐसे किसान की जीवटता, संघर्ष व धैर्य की दास्तान जिसने न केवल सरकार को झुका दिया है अपितु उसकी जिद ने देश के करोड़ों किसानों के लिए खुशहाली का खजाना खोल दिया है. आज करोड़ों किसानों के प्रेरणास्रोत बने सतर वर्षीय किसान महादेव ड़ेकाटे की यह प्रेरक दास्तान सुनना आपके लिए भी काफी लाभकारी साबित हो सकता है. साथ ही इस मामले में विगत चौबीस अप्रैल को बॉम्बे हाईकोर्ट का फरमान ऐसे अधिकारियों के लिए भी कड़ी फटकार है जो मासूम किसानों के मामलों को लटकाने, भटकाने व टरकाने में कोई कसर नहीं छोड़ते हैं.
#पृष्ठभूमि : आईये ! पहले आपको मामले को समझाते हैं. बात वर्ष 2016 की है. महाराष्ट्र के वर्धा जिला स्थित हिंगी गाँव के रहने वाले किसान महादेव ड़ेकाटे के कड़े परिश्रम के बदौलत उनके बगीचे में 200 अनार के पौधे फलों से लदकर तैयार हुए. तभी नजदीक ही स्थित अभ्यारण्य से तोतों का झुण्ड अनार से लदे पौधों पर धावा बोल दिया और लगभग 50 फीसदी फल चट कर गए. फल व फसल की बर्बादी से आहत महादेव ने नुकसान की भरपाई के लिए स्थानीय प्रशासन से बीस लाख रुपये की मुआवजे की गुहार लगायी. मगर प्रशासन ने कहकर मुआवजा देने से इंकार कर दिया कि केवल केवल हाथियों, जंगली भैंसों, सूअरों व नीलगायों आदि वन्य जीवों से हुये फसलों के नुकसान का ही मुआवजा देने का प्रावधान है; तोतों से हुए फसल नुकसान का मुआवजा देने का कोई प्रावधान नहीं है. मगर पीड़ित किसान महादेव ड़ेकाटे ने हार नहीं मानी व हाईकोर्ट में न्याय की गुहार लगायी.
#हाईकोर्ट_का_ऐतिहासिक_फैसला : लगभग एक दशक पुराने मामले में विगत चौबीस अप्रैल को बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर पीठ ने जो फैसला सुनाया उससे न केवल दशकों का भ्रम दूर हो गया अपितु देश के करोड़ों किसानों के लिए खुशियों का सौगात भी लेकर आया. जस्टिस उर्मिला जोशी फाल्के व निवेदिता मेहता की पीठ ने स्पष्ट किया कि ‘वन्यजीव ( संरक्षण) अधिनियम 1972’ के अनुसार जंगली जानवर व पक्षी ‘राज्य के सम्पति’ होते हैं. इसलिए ‘अपनी सम्पति’ द्वारा किये गए नुकसान से सरकार पल्ला नहीं झाड़ सकती. पीठ ने कुछ चुनिन्दा प्रजातियों द्वारा किये गए नुकसान पर मुआवजा देने के सरकार तर्क को भी असंवैधानिक करार दिया.
मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पाया कि कृषि अधिकारियों के पंचनामे में पचास फीसदी फसल नुकसान की पुष्टि हुयी थी. लिहाजा; मौजूदा परिस्थितियों व साक्ष्यों के मद्देनजर कोर्ट ने सरकार को निर्देश दिया कि प्रति पेड़ 200 रुपये की दर से 200 पेड़ों का मुआवजा पीड़ित किसान को दें.
ैसला_कैसे_बना_नजीर : दरअसल कोर्ट का यह फैसला महज एक किसान की जीत नहीं हैं बल्कि उन अनगिनत किसानों के लिए एक उम्मीद की किरण है जो अक्सर वन्यजीवों व मानव के बीच होने वाले संघर्ष में अपनी आजीविका खो देते हैं. कुदरत व क़ानूनी पेचीदगियों के बीच ठगा रह जाने वाले किसानों के लिए यह राहत भरी खबर है. और हाँ ! सरकार के लिए यह सख्त सन्देश है कि पर्यावरण संरक्षण की कीमत केवल किसानों की पसीने से ही नहीं चुकाई जानी चाहिए.
इस पुरे जीवंत दास्तान में महादेव ड़ेकाटे ने अपने अदम्य साहस व धैर्य से यह साबित कर दिया कि किसान भले ही कमजोर हो सकता है मगर उसका संवैधानिक हक कभी कमजोर नहीं होता. अब महाराष्ट्र ही नहीं अपितु कश्मीर से कन्याकुमारी तक हर किसान इस फैसले को ढाल बनाकर अपना हक हासिल कर सकता है.
#आपसे_सवाल : बहरहाल आपसे सवाल है कि क्या आप भी कभी किन्हीं सरकारी अधिकारियों के लटकाने, भटकाने व टरकाने की मानसिकता के शिकार हुए हैं ? क्या आपने कभी अपने हक की लडाई लड़कर जीत हासिल की है ? अपनी दास्तान कमेन्ट करके जरुर बताईयेगा.
और हाँ ! इस ब्लॉग को अधिक से अधिक शेयर कीजिये ताकि किसान –उद्यमियों के बीच इस ऐतिहासिक कानून की मुकम्मल जानकारी का प्रसार हो सके व आवश्यकता पड़ने पर वे इसका इस्तेमाल कर सकें.
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29/04/2026
#ये_सदाबहार_उद्यम : आपको बेशुमार मुनाफा देगें हरदम !
https://youtu.be/T93F_7nmMjc
#परिंदों को मिलेगी मंजिल एक दिन ! ..ये फैले हुए उनके पर बोलते हैं !!
#वहीँ लोग रहते हैं खामोश अक्सर ! ज़माने में जिनके हुनर बोलते हैं !!
प्रशिक्षण या भ्रमण के दौरान एफपीओ, एसएचजी, क्लस्टरों या व्यक्तिगत उद्यमियों के बीच जब मैं अलग-अलग राज्यों में होता हूँ तो इन अधिकांश संगठनों में एक कॉमन कंफ्यूजन मुझे देखने को मिलती है. ..और वह होती है कि कौन सा उद्यम या कारोबार आरम्भ किया जाय. आज की जानकारी इस तरह के कंफ्यूजन को दूर करने व स्क्रीन पर यह ब्लॉग पढ़ रहे आप सभी में सही निर्णय लेने की क्षमता विकसित करने के लिए तैयार किया गया है. ..तो मुकम्मल जानकारी के लिए पूरा ब्लॉग ध्यानपूर्वक अवश्य पढ़िए ताकि आपका कारोबारी सफ़र लाभकारी, तनावमुक्त व सदाबहार बन सके. और हाँ ! आपकी सुविधा के लिए सम्बंधित जानकारी यूट्यूब चैनल “FPO बुलेटिन” पर भी प्रसारित किया गया है.
https://youtu.be/T93F_7nmMjc
देखिये ! मौजूदा दौर में खाद्य प्रसंस्करण आधारित विविध प्रकार के उद्यमों अथवा कारोबारों को भारतीय अर्थव्यवस्था का ‘ #सनराइज_सेक्टर’ कहा जा रहा है. कहने का आशय यह है कि यदि इस सेक्टर में आप पूरी तैयारी के साथ कारोबारी कदमताल करते हैं तो दिन - दुनी रात - चौगुनी बढ़ने की अपार संभावनाएं है. आपका कंफ्यूजन दूर करने के लिए इस विडियो में आगे आपको दो सौ से अधिक फल आधारित, सब्जी आधारित, अनाज आधारित, दाल, बीज, तेल आधारित, मिठाई, शहद व गुड़ आधारित, डेयरी आधारित, मांस, मछली व अंडा आधारित खाद्य उद्यमों के आलावा बेकरी उत्पादों, पेय पदार्थों, रेडी टू ईट व रेडी टू कूक उत्पादों तथा अन्य विविध प्रसंस्कृत उत्पादों के उद्यमों की जानकारी देने जा रहें है.
आप अपने क्षेत्र में कच्चे माल की उपलब्धता, मांग, आपूर्ति, भण्डारण, बिक्री मूल्य श्रृंखला, उपलब्ध संसाधनों, निपुणता व क्षमता आदि तथ्यों को ध्यान में रखकर इनमें से किसी भी उद्यम की स्थापना व कारोबार आरम्भ करने की दिशा में कदमताल कर सकते हैं. चूँकि इनकी मांग सालों भर बनी रहती है. लिहाजा; शत-प्रतिशत कारोबारी सफलता की संभावनाएं प्रबल रहती है. आपकी सुविधा के लिए इन उद्यमों को कटेगरी के बांटकर अवलोकन कर लेते है :
200 से अधिक खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों का विवरण :
ारित_उत्पादों_के_उद्यम : आईये ! सबसे पहले फल आधारित उद्यमों की बात कर लेते हैं. आप तो जानते ही हैं भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा फल उत्पादक देश है. मगर यहाँ उत्पादित कुल फलों का महज 2% से 5% तक ही प्रोसेसिंग हो पाता है. हाल के वर्षों में सेहत सम्बन्धी जागरूकता बढ़ने से लोगों में अब सिंथेटिक कोल्ड ड्रिंक के बजाय नेचुरल फ्रूट जूस, ड्राई फ्रूट्स, फ्रूट बेस्ड स्नेक्स, जेम, जेली व पल्प आदि उत्पादों के प्रति चाहत तेजी से बढ़ी है. लिहाजा; फल आधारित उद्यमों की दिशा में कारोबारी कदमताल करना अपेक्षाकृत कम जोखिमपूर्ण व अत्यधिक लाभकारी रहेगा. आप इन उत्पादों को अजमा सकते हैं :
1. आम अचार 2. आंवला कैंडी 3. आंवला जूस 4. अनार जूस 5. लीची जूस 6. सेब स्क्वैश 7. आम पल्प 8. आम जूस 9. अमरूद जूस 10. कटहल चिप्स 11. केला चिप्स 12. केला पाउडर 13. अनानास जैम 14. जामुन सिरप 15. बेल का शरबत 16. संतरा स्क्वैश 17. नींबू शरबत 18. मौसमी रस 19. फल मिक्स जूस 20. ड्राई फ्रूट मिक्स इत्यादि.
#सब्जी_आधारित_उत्पाद_उद्यम : लोगों की तेजी से बदलती जीवनशैली व सब्जियों के मूल्य संवर्द्धन की बढ़ती परिपाटी के कारण सब्जी प्रसंस्करण उद्यम तेजी से उभरता हुआ लाभकारी कारोबारी सेक्टर बन गया है. इसके आलावा ‘रेडी टू ईट’ और ‘रेडी टू कुक’ सब्जी उत्पादों की बढ़ती डिमांड, केंद्र व राज्य सरकारों की आकर्षक अनुदान सहायता एवं प्रोत्साहन योजनाओं, अत्याधुनिक तकनीकों की सुलभता, ई-कॉमर्स व लोगों की सेहत के प्रति बढ़ती जागरूकता आदि फेक्टरों ने सब्जी आधारित उद्यमों को तेजी से कारोबारी पंख फ़ैलाने का सुनहरा अवसर प्रदान किया है. लिहाजा; आपके लिए भी इन सब्जी उद्यमों की दिशा में कारोबारी कदमताल करना अत्यंत ही लाभकारी साबित हो सकता है :
21. मिक्स वेजिटेबल अचार 22. टमाटर प्यूरी 23. टमाटर केचप 24. प्याज पाउडर 25. लहसुन पेस्ट 26. अदरक पेस्ट 27. हरी मिर्च अचार 28. शिमला मिर्च पाउडर 29. आलू चिप्स 30. भिंडी फ्राय 31. करेला चिप्स 32. मेथी पाउडर 33. मटर सूप 34. पालक पाउडर 35. सब्जी मिक्स सूप 36. सब्जी ड्राई क्यूब्स 37. सब्जी अचार 38. ड्रमस्टिक पाउडर 39. कद्दू पल्प 40. कद्दू मिठाई इत्यादि.
#अनाज_आधारित_उत्पाद : तीव्र गति से बढ़ते शहरीकरण, बदलते उपभोक्ता व्यवहार, ‘खेत से थाली तक’ की मूल्य श्रृंखला के तेजी से मजबूत होने, ‘रेडी टू ईट’ और ‘रेडी टू कुक’ उत्पादों की बढ़ती डिमांड व सेहत के प्रति बदलती सोच आदि के कारण हाल के वर्षों में देश-दुनिया में अनाज आधारित विविध प्रकार के उत्पादों की मांग में बेहताशा वृद्धि हुई है. साथ ही PMFME योजना, PLI योजना व नाबार्ड की कृषि व्यवसाय योजनाओं सहित केंद्र व राज्य सरकारों द्वारा संचालित विविध अनुदान सहायता एवं प्रोत्साहन योजनाओं ने अनाज आधारित उद्यमों की दिशा में कदमताल करना काफी लाभकारी व आसान बना दिया है. आप भी इन उद्यमों की दिशा में कारोबारी कदमताल करके मालामाल बन सकते हैं :
41. गेहूं आटा 42. मैदा 43. सूजी 44. चोकर 45. रोटी मिक्स 46. चावल पाउडर 47. चूड़ा 48. मूढ़ी 49. पोहा 50. बाजरा पाउडर 51. मक्का आटा 52. रागी पाउडर 53. रागी बिस्कुट 54. जौ आटा 55. दलिया 56. मल्टीग्रेन मिक्स 57. दलहन मिश्रण 58. मूंग दाल पापड़ 59. उड़द दाल पापड़ 60. बेसन इत्यादि.
#दाल_बीज_तेल_आधारित_उत्पाद_उद्यम : आईये ! अब दाल, बीज व तेलहन आधारित उद्यमों के कारोबारी परिदृश्य पर दृष्टिपात करते है. हाल के वर्षों में लोगों की क्रय-शक्ति बढ़ने के कारण ‘प्रोटीन रिच’ उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ी है. लिहाजा; विविध प्रकार के दालों के मूल्य संवर्द्धन करके आसानी से 20-30 फीसदी तक मुनाफा कमाया जा सकता है. इसी तरह अत्यधिक पोषक तत्व पाए जाने के कारण बीज आधारित उत्पादों का सुपरफूड्स के रूप में डिमांड तेजी से बढ़ रही है. साथ ही रिफाइंड तेल का सेहत पर पड़ने वाले कुप्रभावों से चिंतित लोग अब कोल्ड प्रेस्ड या कच्ची घानी तेल की ओर तेजी से लौट रहें है. जाहिर है आपके लिए इन उत्पादों के मूल्य संवर्द्धन व कारोबार आरम्भ करना काफी लाभकारी साबित होगा :
61. भुना चना 62. चना पाउडर 63. मूंगफली मक्खन 64. सरसों तेल 65. तिल तेल 66. अलसी पाउडर 67. भुना सोयाबीन 68. सूरजमुखी तेल 69. सोयाबीन तेल 70. नारियल तेल 71. नारियल चूर्ण 72. मूंगफली चिप्स 73. चना नमकीन 74. मसाला मूंगफली 75. सौंफ पाउडर 76. अजवाइन पाउडर 77. मैथी पाउडर 78. मसाला पाउडर मिक्स 79. गरम मसाला 80. चाट मसाला इत्यादि उद्यम.
#मिठाईयों_शहद_गुड़_आधारित_उत्पाद_उद्यम : आईये ! अब मिठाईयों, शहद व गुड़ आधारित उत्पादों के उद्यमों के कारोबारी परिदृश्य पर नजर डालते चलें. वर्तमान समय में ग्राहकों की हाईजीन व सेल्फलाइफ वाली मिठाईयों के बढ़ते डिमांड के कारण फ्यूजन स्वीट्स एवं शुगर फ्री मिठाई उद्यम एक संगठित ‘पैकेज्ड फ़ूड’ श्रेणी में बदल चूका है. जहाँ तक शहद उद्यम की बात है तो आपको बता दें कि ‘प्राकृतिक स्वीटनर’ के रूप में फ्लेवर्ड हनी, मोनो-फ्लेवर्ड हनी व इसके बाय -प्रोडक्ट्स की डिमांड पूरी दुनिया में तेजी से बढ़ रही है. इसी तरह अब ‘भेली’ की जगह गुड़ – पाउडर, क्यूब्स व लिक्विड गुड़ आदि की मांग में सालाना 15-20 प्रतिशत की दर से इजाफा हो रहा है. जाहिर है उद्यम के स्थायित्व व बम्पर मुनाफा के लिए इन उद्यमों की ओर कदमताल करना मुनाफे का सौदा साबित हो सकता है :
81. शहद प्रसंस्करण 82. गुड़ पाउडर 83. तिल पट्टी 84. मूंगफली चिक्की 85. नारियल बर्फी 86. खोया मिठाई 87. पेड़ा 88. रसगुल्ला 89. गुलाब जामुन 90. बालूशाही 91. मावे की बर्फी 92. लड्डू (बेसन, सूजी, नारियल) 93. गजक 94. हलवा मिक्स 95. खीर मिक्स 96. ड्राय फ्रूट मिठाई 97. मिल्क केक 98. बेकरी स्वीट्स 99. कलाकंद 100. काजू कतली इत्यादि उद्यम.
#डेयरी_आधारित_उत्पाद_उद्यम : आईये ! अब डेयरी सेक्टर की ओर बढ़ें. मौजूदा दौर में यह क्षेत्र ‘केवल दूध बेचने’ की परिपाटी से हटकर ‘प्रसंस्कृत उत्पादों’ की ओर तेजी से बढ़ रहा है. दरअसल डेयरी प्रसंस्करण उत्पादों में कच्चे दूध की तुलना में 30 फीसदी से 50 फीसदी तक अधिक लाभ कमाने की संभावनाएं होती हैं. फिलहाल PMFME, PMMSY, AHIDF व मुद्रा लोन सहित केंद्र व राज्य सरकारों द्वारा विभिन्न अनुदान सहायता योजनाओं ने इस सेक्टर को असीमित आय-अर्जन का अवसर प्रदान किया है. आपको इन उद्यमों पर एक बार जरुर दृष्टिपात करनी चाहिए :
101. दूध पाउडर 102. दही 103. छाछ 104. घी 105. पनीर 106. फ्लेवर मिल्क 107. दही मिक्स 108. चीज़ 109. बटर 110. क्रीम इत्यादि उद्यम.
#मांस_मछली_अंडा_उत्पाद_उद्यम : चलिए ! अब अगले सेक्टर की ओर बढ़ा जाय. आप तो जानते ही हैं कि मांस, मछली व अंडा -- जिन्हें संयुक्त रूप से “पशु-प्रोटीन” कहा जाता है – आज के दौर में सबसे टिकाऊ व उच्च मुनाफा देने वाले कारोबार में शुमार है. वास्तव में इन उत्पादों के प्रसंस्करण से मुनाफे में 40 फीसदी से 60 फीसदी तक बढ़ोतरी हो जाती है. लोगों के खानपान की आदतों में बदलाव व प्रोटीन युक्त आहार की तेजी से बढ़ती मांग ने इस सेक्टर में अनेकानेक कारोबारी अवसरों का सृजन किया है. यदि आप कोई उद्यम या कारोबार आरम्भ करने की सोच रहें हैं तो इस सेक्टर के विभिन्न उद्यमों की पड़ताल अवश्य करनी चाहिए :
111. ड्राय फिश 112. फिश पिकल 113. फ्रोजन फिश 114. चिकन नगेट्स 115. फ्रोजन चिकन 116. चिकन पिकल 117. मटन सॉसेज 118. फिश करी मिक्स 119. अंडा पाउडर 120. अंडा करी मिक्स इत्यादि उद्यम.
#बेकरी_उत्पाद_उद्यम : भारत सहित पूरी दुनिया में खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र में सबसे तेजी से बढ़ने वाले उद्यमों बेकरी उद्योग शामिल है. बेकरी उद्यमों में 25 प्रतिशत से 40 प्रतिशत तक विशुद्ध मुनाफा कमाया जा सकता है. अब केवल शहरों में ही नहीं अपितु गांवों में भी बेकरी उत्पादों की खूब खपत हो रही है. लिहाजा; यदि आप कोई उद्यम अथवा कारोबार आरम्भ करने की प्लानिंग बना रहें हैं तो आपको एक बार इन बेकरी उद्यमों पर भी अवश्य गौर कर लेनी चाहिए :
121. बिस्कुट 122. केक 123. पेस्ट्री 124. ब्रेड 125. बन 126. पिज्जा बेस 127. कुकीज़ 128. टोस्ट 129. नमकीन बिस्कुट 130. मिल्क बिस्कुट 131. अट्ठा बिस्कुट 132. फाइबर ब्रेड इत्यादि उद्यम.
#पेय_पदार्थ_उद्यम : हाल के वर्षों में तेजी से बदलती जीवनशैली व स्वास्थ्य सम्बन्धी जागरूकता के कारण लोगों का रुझान अब कार्बोनेटेड ड्रिंक्स (सॉफ्ट ड्रिंक) के बजाय ‘फंक्शनल’ और ‘नेचुरल’ पेय पदार्थों की ओर तेजी से बढ़ रहा है. अब तो ‘हाईपर – पर्सनलाइजेशन’ का दौर भी भी आरंभ हो गया है. यह स्थिति पेय पदार्थों के क्षेत्र में कार्यरत उद्यमियों के लिए बेशुमार कारोबारी अवसर लेकर आया है. लिहाजा; यदि आप कोई उद्यम अथवा कारोबार आरम्भ करने की प्लानिंग कर रहें हैं तो पेय पदार्थों से सम्बंधित इन उद्यमों के बारे में आपको एक बार अवलोकन अवश्य कर लेना चाहिए :
133. हर्बल चाय 134. ग्रीन टी 135. मसाला चाय 136. कॉफी मिक्स 137. नींबू पानी कंसन्ट्रेट 138. एनर्जी ड्रिंक 139. फलों का सिरप 140. ड्राई हर्बल ड्रिंक मिक्स 141. बेल शरबत 142. ठंडाई मिक्स 143. आम पन्ना 144. अदरक शरबत 145. रूह अफ़ज़ा जैसे ड्रिंक इत्यादि उद्यम.
#रेडी_टू_ईट / #रेडी_टू_कुक_प्रोडक्ट्स_उद्यम : आईये ! अब ‘रेडी-टू-ईट’ ( RTE) और ‘रेडी-टू-कुक’ (RTC) उत्पादों के कारोबारी परिदृश्य व लाभकारी संभावनाओं पर नजर डाल लेते हैं. आप तो भलीभांति जानते ही हैं कि बढ़ते शहरीकरण, कामकाजी जोड़ों ( Dual – income households ) की संख्या में हो रही तेजी से वृद्धि एवं भागदौड़ भरी दिनचर्या में समय की कमी के कारण लोग अब ‘त्वरित भोजन’ ( Quick Meals ) की प्राथमिकता देने लगे हैं. लिहाजा; ‘रेडी-टू-ईट’ और ‘रेडी-टू-कुक’ उत्पादों के कारोबार में तेजी से उछाल आया है. विगत वर्ष इन उत्पादों के कारोबार में 23.5 फीसदी वार्षिक वृद्धि दर्ज की गयी. फिलहाल आप यदि कोई कारोबार आरम्भ करने की प्लानिंग कर रहें हैं तो इन ‘रेडी-टू-ईट’ और ‘रेडी-टू-कुक’ उत्पादों के उद्यम अथवा कारोबार पर आपको जरुर सोच-विचार करना चाहिए :
146. रेडी-टू-कुक उपमा मिक्स 147. खिचड़ी मिक्स 148. पुलाव मिक्स 149. भिंडी फ्राई मिक्स 150. आलू मसाला मिक्स 151. रेडी टू ईट पराठा 152. इंस्टैंट सूप मिक्स 153. कटलेट मिक्स 154. स्नैक्स मिक्स 155. सेव, भुजिया 156. नमकीन मिक्स 157. नूडल्स 158. पास्ता 159. रेडी-टू-ईट इडली 160. इंस्टैंट दोसा मिक्स इत्यादि उद्यम.
#अन्य_प्रसंस्कृत_उत्पाद_उद्यम : इस विडियो में आपको अभी तक मैंने फल, सब्जी, अनाज, दाल, बीज, तेल, मिठाई, शहद, गुड़, डेयरी, मांस, मछली, अंडा, बेकरी, पेय तथा रेडी-टू ईट व रेडी-टू-कुक आधारित 160 खाद्य प्रसंस्करण उद्यमों की जानकारी दे दी हैं. इसके आलावा खाद्य प्रसंस्करण से सम्बंधित और भी बहुत सारे लाभकारी उद्यम है. जैसे 161. मुंगफली नमकीन 162. मसाला खाखरा 163. सत्तू 164. मिक्स सब्ज़ी पाउडर 165. फास्ट फूड मिक्स 166. रवा इडली मिक्स 167. बेसन चिल्ला मिक्स 168. पिज्जा मिक्स 169. बर्गर टिक्की मिक्स 170. पास्ता सॉस 171. कुकी डो मिक्स 172. सैंडविच स्प्रेड 173. टोमैटो सूप मिक्स 174. मंचूरियन मिक्स 175. फ्रेंच फ्राइज मिक्स 176. ओट्स मिक्स 177. इंस्टैंट रागी दलिया 178. हर्बल पाउडर सप्लीमेंट 179. एनर्जी बार 180. ग्रेनोला मिक्स 181. न्यूट्रीशनल पाउडर 182. हेल्थ ड्रिंक पाउडर 183. सोया बड़ी 184. टोफू 185. पनीर स्नैक्स 186. कस्टर्ड पाउडर 187. इंस्टैंट आइसक्रीम मिक्स 188. मसाला टॉपिंग 189. भुट्टा मसाला 190. भुना मक्का 191. मक्के का लावा 192. चना-जौ मिक्स पाउडर 193. भुने अनाज मिक्स 194. इंस्टैंट दलिया मिक्स 195. मिक्स दाल स्प्राउट 196. सोया मिल्क 197. काजू नमकीन 198. इंस्टैंट पोहा मिक्स 199. हल्दी दूध मिक्स 200. फूड ग्रेड पैक्ड आयुर्वेदिक पाउडर 201. मखाना आधारित विविध खाद्य उत्पाद उद्यम इत्यादि.
विडियो के समापन के पूर्व आपको इतना जरुर बता देना चाहते हैं की भारत में खाद्य प्रसंस्करण उद्यम एक व्यापक बदलाव के दौर से गुजर रहा है. यहाँ अब उपभोक्ता स्वाद के साथ-साथ सुविधा व पोषण को प्राथमिकता देने लगे हैं. लिहाजा; मौजूदा वित्तीय वर्ष में यहाँ खाद्य बाजार 113 लाख 10 हजार करोड़ रुपये (1.2 ट्रिलियन डॉलर) तक पहुँचने का अनुमान है. सरकारें, बैंक व वित्तीय संस्थाने भी खाद्य प्रसंस्करण उद्यम को बढ़ावा देने के लिए विविध प्रकार की लाभकारी योजनायें, प्रोत्साहन व सुविधाएँ प्रदान कर रहीं है. फलतः इस सेक्टर में कारोबारी कदमताल करना समझदारी भरा कारोबारी कदम साबित होगा.
बहरहाल इस ब्लॉग को पढ़ने के उपरांत आप कौन सा खाद्य प्रसंस्करण उद्यम आरम्भ करना चाहते हैं ? कमेन्ट करके जरुर बताईये. हाँ ! एक बात और ... विविध प्रकार के उद्यमों को आरम्भ करने हेतु सरकार द्वारा संचालित विभिन्न प्रकार की अनुदान सहायता योजनाओं की जानकारी के लिए हमारे यूट्यूब चैनल “FPO बुलेटिन” पर उपलब्ध सम्बंधित विडियो का आप अवलोकन कर सकते हैं.
....तब तक नियमित रूप से पढ़ते रहिये हमारा ब्लॉग. नमस्ते !
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