Advocate Aditi Kumar
ADITI KUMAR. LEGAL SOLUTIONS, PRACTICING IN GURGAON DELHI.
समस्त देशवासियों को 78वें स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।
देश की स्वतंत्रता के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर देने वाले माँ भारती के वीर सपूतों को कोटि-कोटि नमन।
आपका बलिदान और समर्पण हमसबको सदैव राष्ट्रसेवा हेतु प्रेरित करता रहेगा।
जय हिन्द!🙏🏻
08/03/2024
आज महिला दिवस है और महिला सशक्तिकरण पर लंबे चौड़े भाषण देकर फॉरमैलिटी पूरा करना नही , उनके मान सम्मान और उनके अधिकारो को दिलाने का प्रण लेना चाहिए ।
आज के समय में महिलाएं पुरुषों की तरह हर क्षेत्र में अपनी अहम भूमिका निभा रही हैं ।
चाहे प्रशासन की बात करे चाहे राजनीति या फिर समाज कल्याण की बात हो ।
हर काम में महिलाएं बढ़ चढ़कर हिस्सा ले रही हैं और अपनी काबिलियत दिखा रही है।
भारतीय संविधान जिसमे महिलाओं और पुरुषों को समान अधिकार दिया गया है लेकिन सोचने की जरूरत है कि आज भी कई ऐसी परिस्थितियां हैं जहां महिलाओं के अधिकारों का हनन किया जाता है । उन्हें ना ही शिक्षा दी जाती है और ना ही अपने हिसाब से रहने की आजादी दी जाती है।
आज भी देश और राज्य के कई हिस्सों में महिलाओं को प्रताड़ित किया जाता है उन्हें घर में नजरबंद करके रखा जाता है ना ही वह घर से बाहर निकल सकती हैं और ना ही चैन की सांस ले सकती हैं।
देश के कोने कोने से लगातार दहेज उत्पीड़न के मामले आते रहते हैं।
दहेज न देने के कारण उन महिलाओं का ससुराल में उत्पीड़न किया जाता है।
आज भी कई ऐसी जगहें हैं जहां महिलाएं बाहर निकलते समय खुद को असुरक्षित समझती हैं।
आए दिन महिलाओं के साथ बलात्कार की खबरें आती रहती हैं।
इन्हीं सब समस्याओं के कारण मां बाप बेटी के पैदा होने से पहले ही उसकी भ्रूण हत्या कर देते हैं।
महिला और पुरुष ईश्वर के बनाए गए दो स्वरूप हैं भले ही उनमें लैंगिक समानता ना हो लेकिन दोनों ही मानव के अस्तित्व के लिए बनाए गए हैं।
एक पुरुष और स्त्री एक दूसरे के बगैर अधूरे होते हैं। संविधान में जो अधिकार पुरुषों को दिए गए हैं वो सभी अधिकार महिलाओं को भी दिए गए हैं।
महिलाओं को भी स्वतंत्र भावना से जीने का अधिकार है।
और महिलाओं को उनका यही अधिकार दिलाने के लिए महिला सशक्तिकरण की जरूरत पड़ रही है।
हम सबका फर्ज है कि एक साथ मिलकर महिलाओं को सशक्त करें और उनके अधिकारों के लिए उनके साथ मिलकर लड़े।
महिला सशक्तिकरण का उद्देश्य महिलाओं को उनका अधिकार ही नहीं बल्कि उन्हें अपनी रक्षा करने के लिए शिक्षित बनाना भी है ताकि वह अपने ऊपर हो रहे हर उत्पीड़न का मुंहतोड़ जवाब दे सके।
और समाज को बता सकें कि जिस आदिशक्ति से महिलाओं का जन्म हुआ वह शक्ति आज भी उनमें है और वह किसी भी परिस्थिति का सामना कर सकती हैं।
हमसब महिलाओं को भी अपनी मानसिकता बदलने की ज़रूरत है कि हमलोग कमजोर नही हैं, हमलोग भी पुरुषों की तरह ही शक्ति है और वे पुरुषों की तुलना में कुछ भी बेहतर कर सकते हैं।
मुझे लगता है महिला दिवस का औचित्य तब तक प्रमाणित नहीं होता जब तक कि सच्चे अर्थों में महिलाओं की दशा नहीं सुधरती। महिला नीति है लेकिन क्या उसका क्रियान्वयन गंभीरता से हो रहा है। यह देखा जाना चाहिए कि क्या उन्हें उनके अधिकार प्राप्त हो रहे हैं। वास्तविक सशक्तीकरण तो तभी होगा जब महिलाएं आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर होंगी और उनमें कुछ करने का आत्मविश्वास जागेगा।
प्राचीन समय मे हम देखते थे कि महिलाओं को सिर्फ उपभोग और सन्तान उत्पत्ति का जरिया समझा जाता था। परन्तु आज के समय मे महिलाएं हर एक क्षेत्र से सभी के साथ कंधे से कंधा मिलाकर कर खड़ी हैं। आजकल की स्त्रियां को हर एक क्षेत्र में आगे बढ़ने की ललक दिखती हैं। वह जीवन और समाज के प्रत्येक क्षेत्र में कुछ न कुछ अवश्य करना चाहती हैं। वह अपने परिश्रम के माध्यम से दुनिया मे एक ऐसी सक्तत इबारत लिखना चाहती हैं। जिसकी वजह से स्त्रियों को अबला ना समझा जाये।
महिला सशक्तिकरण द्वारा हम समाज और देश में कई चीजों में बदलाव ला सकते है। एक महिला को परिवार में हर चीज के लिए जिम्मेदार माना जाता है। परिवार में उनकी राय को कभी नहीं माना जाता। उन्हें किसी भी फैसले में शामिल नहीं किया जाता लेकिन अब परिवार के सदस्यों को यह सोच बदलनी होंगी।
महिला सशक्तिकरण का अर्थ सिर्फ बड़े बड़े भाषण नही, सही मायने में महिलाओं के सामाजिक और आर्थिक स्थिति में सुधार लाना है। ताकि उन्हें रोजगार, शिक्षा, आर्थिक तरक्की के बराबरी के मौके मिल सके, जिससे वह सामाजिक स्वतंत्रता और तरक्की प्राप्त कर सके और महिलाएँ भी पुरुषों की तरह अपनी हर आकंक्षाओं को पूरा कर सके।
यह महत्वपूर्ण है कि महिला दिवस का आयोजन सिर्फ रस्म अदायगी भर नहीं रह जाए। वैसे यह शुभ संकेत है कि महिलाओं में अधिकारों के प्रति समझ विकसित हुई है। अपनी शक्ति को स्वयं समझकर, जागृति आने से ही महिला घरेलू अत्याचारों से निजात पा सकती है। कामकाजी महिलाएं अपने उत्पीड़न से छुटकारा पा सकती हैं तभी महिला दिवस की सार्थकता सिद्ध होगी।
आप सब याद रखिये की इस धरती और कोई ऐसा ताकत पैदा नही हुआ जो महिलाओं का रास्ता रोक ले । महिला वो शक्ति है जो नया जीवन प्रदान करती है । नारी की शक्ति तो देवताओं ने भी मानी है । तभी तो नारी को देवी का रूप कहा जाता है।
इसके साथ ही इस महिला दिवस पर सभी भाई बंधु को महिलाओं का सम्मान करने का संकल्प लेना चाहिए और उन्हें आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करना चाहिए, तभी हमारे देश की बेटियां खुद को सुरक्षित महसूस कर सकेंगी और देश और राज्य के विकास में अपना योगदान दे सकेंगी। इसके साथ सरकार का भी ये फ़र्ज़ है की वे हमारे देश की महिलाओं को आगे बढ़ने के अवसर दे और उनकी सुरक्षा पर कार्य करे ।
याद रखिये ...
तोड़ के पिंजरा जाने कब उड़ जाऊँगी मैं ,
लाख बिछा दो बंदिशे, फिर भी आसमान मैं जगह बनाऊंगी मैं,
हाँ गर्व है मुझे की मैं नारी हूँ,
भले ही रूढ़िवादी जंजीरों से बांधे है दुनिया ने पैर मेरे,
फिर भी इसे तोड़ जाऊँगी ।
हमसब किसी से कम नहीं, सारी दुनिया को दिखाऊंगी ।
धन्यवाद 🙏
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