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13/10/2015

आप अपने आप से क्या चाहते हैं (-------------------------)
आप आने बाले समय मैं ------- या ------- साल के अंदर अपने आप को कहाँ पर देखना चाहते हैं क्या आपके पास अपने सपनो को पूरा करने के लिए कोई रास्ता है (----------------------.)
आपके द्वारा कमाई हुई इनकम से जो खर्चे आज पूरे हो रहे हैं क्या बो कल हो पाएंगे (----------------)
आप जो भी काम कर रहे हैं उसके ऊपर आपको कितना विश्वास है (-------------)
क्या आप अपने द्वारा की गई कमाई आपके सपनो को पूरा करने मैं सहायक सिद्ध हो रही है (----------------------)
क्या आप अपने आप को फाइनेंसियल फ्री देखना चाहते है(-----------------)
इसके लिए आप क्या कर रहे हैं (----------------------)
इन सारे सवालो सवालो के उत्तर आप भी जानते होंगे

22/09/2015

ऎसा प्रेम हाेता है ...
एक फकीर बहुत दिनों तक बादशाह के साथ रहा बादशाह का बहुत प्रेम उस फकीर पर हो गया।
प्रेम भी इतना कि बादशाह रात को भी उसे अपने कमरे में सुलाता।
कोई भी काम होता, दोनों साथ-साथ ही करते।
एक दिन दोनों शिकार खेलने गए और रास्ता भटक गए।
भूखे-प्यासे एक पेड़ के नीचे पहुंचे।
पेड़ पर एक ही फल लगा था।
बादशाह ने घोड़े पर चढ़कर फल को अपने हाथ से तोड़ा।
बादशाह ने फल के छह टुकड़े किए और अपनी आदत के मुताबिक पहला टुकड़ा फकीर को दिया।
फकीर ने टुकड़ा खाया और बोला, 'बहुत स्वादिष्ट ऎसा फल कभी नहीं खाया।
एक टुकड़ा और दे दें।
दूसरा टुकड़ा भी फकीर को मिल गया।
फकीर ने एक टुकड़ा और बादशाह से मांग लिया।
इसी तरह फकीर ने पांच टुकड़े मांग कर खा लिए।
जब फकीर ने आखिरी टुकड़ा मांगा, तो बादशाह ने कहा, 'यह सीमा से बाहर है।
आखिर मैं भी तो भूखा हूं।
मेरा तुम पर प्रेम है, पर तुम मुझसे प्रेम नहीं करते।'.
और सम्राट ने फल का टुकड़ा मुंह में रख लिया।
मुंह में रखते ही राजा ने उसे थूक दिया, क्योंकि वह कड़वा था।
राजा बोला, 'तुम पागल तो नहीं, इतना कड़वा फल कैसे खा गए?'
उस फकीर का उत्तर था,
'जिन हाथों से बहुत मीठे फल खाने को मिले, एक कड़वे फल की शिकायत कैसे करूं?
सब टुकड़े इसलिए लेता गया ताकि आपको पता न चले।
जँहा प्रेम हो वँहा संदेह मत
करो

18/09/2015

~1 मिनट लगेगा जरूर पढेँ ~
अच्छा लगे तो Share करना न भूलेँ ।
एक डॉक्टर को जैसे ही एक
urgent सर्जरी के बारे में फोन करके बताया गया.
वो जितना जल्दी वहाँ आ
सकते थे आ गए.
वो तुरंत हि कपडे बदल
कर ऑपरेशन थिएटर की और बढे.
डॉक्टर को वहाँ उस लड़के के पिता दिखाई दिए
जिसका इलाज होना था.
पिता डॉक्टर को देखते ही भड़क उठे,
और चिल्लाने लगे.. "आखिर इतनी देर तक कहाँ थे आप?
क्या आपको पता नहीं है की मेरे बच्चे की जिंदगी खतरे में है .
क्या आपकी कोई जिम्मेदारी नहीं बनती..
आप का कोई कर्तव्य है
या नहीं ? ”
डॉक्टर ने हलकी सी मुस्कराहट के साथ कहा- “मुझे माफ़
कीजिये, मैं
हॉस्पिटल में नहीं था.
मुझे जैसे ही पता लगा,
जितनी जल्दी हो सका मैं
आ गया..
अब आप शांत हो जाइए, गुस्से से कुछ नहीं होगा”
ये सुनकर पिता का गुस्सा और चढ़ गया.
भला अपने बेटे की इस नाजुक हालत में वो शांत कैसे रह सकते थे…
उन्होंने कहा- “ऐसे समय में दूसरों
को संयम रखने का कहना बहुत आसान है.
आपको क्या पता की मेरे मन में क्या चल रहा है.. अगर
आपका बेटा इस तरह मर रहा होता तो क्या आप
इतनी देर करते..
यदि आपका बेटा मर जाए
अभी, तो आप शांत रहेगे?
कहिये..”
डॉक्टर ने स्थिति को भांपा और कहा- “किसी की मौत और
जिंदगी ईश्वर
के हाथ में है.
हम केवल उसे बचाने का प्रयास कर सकते है.. आप ईश्वर से
प्राथना कीजिये.. और मैं अन्दर जाकर ऑपरेशन करता हूँ…” ये
कहकर डॉक्टर अंदर चले गए..
करीब 3 घंटो तक ऑपरेशन चला..
लड़के के पिता भी धीरज के साथ बाहर बैठे रहे..
ऑपरेशन के बाद जैसे
ही डाक्टर बाहर निकले..
वे मुस्कुराते हुए, सीधे पिता के पास गए..
और उन्हें कहा- “ईश्वर का बहुत ही आशीर्वाद है.
आपका बेटा अब ठीक है.. अब आपको जो
भी सवाल पूछना हो पीछे आ रही नर्स से पूछ लीजियेगा..
ये कहकर वो जल्दी में चले गए..
उनके बेटे की जान बच
गयी इसके लिए वो बहुत खुश तो हुए..
पर जैसे ही नर्स उनके पास आई.. वे बोले.. “ये कैसे डॉक्टर है..
इन्हें किस बात का गुरुर है.. इनके पास हमारे लिए
जरा भी समय नहीं है..”
तब नर्स ने उन्हें बताया..
कि ये वही डॉक्टर है जिसके
बेटे के साथ आपके बेटे का एक्सीडेँट हो गया था.....
उस दुर्घटना में इनके बेटे
की मृत्यु हो गयी..
और हमने जब उन्हें फोन किया गया..
तो वे उसके क्रियाकर्म कर
रहे थे…
और सब कुछ जानते हुए भी वो यहाँ आए और आपके बेटे का इलाज
किया...
नर्स की बाते सुनकर बाप की आँखो मेँ खामोस आँसू
बहने लगे ।
मित्रो ये होती है इन्सानियत ""
जो भी मित्र शेयर करे वो GROUP मेँ अपना नाम जरुर बताए ।।
जन्म लिया है तो सिर्फ साँसे मत लीजिये,
जीने का शौक भी रखिये..
शमशान ऐसे लोगो की राख से...
भरा पड़ा है जो शेयर नहीं करते

28/05/2015

मुस्कराहट का मूल्य

इसमें कुछ खर्च नहीं होता , पर इससे मिलता बहुत है। जिन्हे यह मिलती है वे समृद्ध हो जाते हैं , परन्तु जो देते हैं वे गरीब नहीं होते।

यह एक पल मैं हो जाती है और इसकी याददाश्त कई बार हमेशा कायम रहती है।
कोई भी इतना अमीर नहीं , कि इसके बिना जी सके और कोई भी इतना गरीब नहीं कि इसका लाभ ना उठा सके।

यह घर मैं सुख लाती है, और बिज़नेस मैं सदभावना भरती है और यह दोस्ती का हस्ताक्षर है।

यह थके हुओं के लिए आराम है, निराश लोगो के लिए आशा की किरण है, दुखी लोगो के लिए सूर्य की किरण और कष्टों के लिए प्रकृति की सबसे बेहतरीन दवा है।

परन्तु इसे ख़रीदा या चुराया नहीं जा सकता, उधार नहीं लिया जा सकता, यह भीख मैं नहीं मिलती क्योंकि इसका तब तक कोई मोल नहीं है जब तक इसे किसी दूसरे को नहीं दिया जाता।

कयोंकि मुस्कराहट की उसी ब्यक्ति को सबसे ज्यादा जरूरत होती है जिसके पास देने के लिए मुस्काने नहीं बची हैं।

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