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04/04/2020
#क्या_है_तबलीगी_जमात??
तबलीग का मतलब है संदेश देना,इस्लाम उसके मूल, अल्लाह, कुरान, हदीस का संदेश आम लोगो को देना ही तबलीग का अर्थ है। और जमात का अर्थ आम लोगो का समूह होता है और मरकज का मतलब है स्थान। तब्लीगी जमात की शुरुआत लगभग 106 साल पहले 1926-27 में हरियाणा के मेवात जिले के नुहं नामक कस्बे में इसकी स्थापना देवबंदी इस्लामी मौलाना मोहम्मद इलीयास कांधलवी ने एक धार्मिक सुधार आंदोलन के रूप में की थी। तब्लीगी जमात का काम विशेषकर इस्लाम के मानने वालों को धार्मिक उपदेश देना होता है। कालांतर में पूरी तरह से गैर-राजनीतिक इस जमात का मकसद पैगंबर मोहम्मद के बताये गए इस्लाम के पांच बुनियादी सिद्धान्त का प्रचार करना होता है। इनका शिया, सूफी मुसलमानों और मजार पर जाने वाले सुन्नी मुसलमानों से गहरा मतभेद हैं.इनका खुदा के अलावा मजार,पीर इमाम आदि में कोई विश्वास नहीं होता. कहने को तो तब्लीगी जमात मुस्लिम धर्म का प्रचार-प्रसार करने के लिए काम करती है। मगर यह उन मुसलमानों को अपना लक्ष्य बनाता है, जिन्होंने उदार जीवनशैली को अपनाया है।
#आखिर_क्यों_हुई_थी_तबलीगी_जमात_की_स्थापना
आखिर ऐसी कौन सी जरूरत आन पड़ी थी ? अगर हम इस प्रश्न पर विचार करे तो हमे इतिहास के पन्ने पलटने पड़ेंगे जब भारत में मुगल शासन अपने चरम पे था तो उस समय यहां के हिन्दू धर्म को मनाने वाली जनता को जबरन इस्लाम कबलू कराने और इस्लाम का परचम लहराने की कवायद जग जाहिर है और इसके फलस्वरूप अनगिनत हिन्दू और गैर इस्लामी जनता को जबरन और उनके परिवार के जीवन यापन की सुरक्छा के लालच में इस्लाम धर्म को अपनाने के लिए मजबूर किया गया जिनकी संख्या अनगिनत थी,,,,जैसा अभी भी पाकिस्तान और बांग्लादेश अफगानिस्तान में हो रहा है
लेकिन उस समय भारत में एक विकट समस्या थी की बड़ी संख्या में हिंदुओं और गैर मुस्लिमो ने डर से इस्लाम कबूल तो कर लिया था मगर उनमे से बड़ी संख्या ऐसे लोग भी थे जो मुसलमान बननेके बावजदू भी अपने हिन्दू रीती-रिवाज को मानते थे। जब मगलु काल की पकड़ कमजोर पडने लगी तो धीरे धीरे इनका भी वक्त बदला।अंग्रेजो की पकड़ भारत पर मजबतू हो गया पूरे भारत से मुगल सल्तनत का सफाया हो गया और ब्रिटिश राज कायम हो गया,,,,,सन 1857 की आज़ादी क्रांति के साथ साथ सामाजिक क्रांति भी शुरू हो चली थी इसके क्रम में 1900 के शुरुआत से ही आर्यसमाज ने शुद्धिकरण आंदोलन शुरू किया जिसमें जबरन धर्म परिवर्तित लोगो को फिर से हिन्दू बनाने की कोशिश शुरू की गई और इसमें उन्हें काफी सफलता भी मिलने लगी क्योंकि आर्यसमाज के शुद्धिकरण के नियम काफी सरल और उदार थे और ये धर्म परिवर्तित लोग मुसलमान बनने के बाउजूद हिंदी रीति रिवाजों को मानते चले आ रहे थे बस उनके वापस लौटने को समाज मे स्वीकारता की जरूरत थी जिसको आर्यसमाज और आगे कुछ हद तक हिन्दू महासभा ने प्रदान कर दी थी
इस स्थिति को देखते हुए मुस्लिम धर्म गुरुओं को यह एहसास हुआ कि उन्हें भी अपनी संख्या को बढ़ाने और इन वापस हिन्दू बन रहे लोगो को रोकने के लिए अपने इस्लाम की शिक्छा दिक्छा के साथ इस्लाम का महत्व को विस्तार देने की सख्त जरूरत है और इस लिए ही इस्लाम के प्रचार प्रसार के लिए कुछ संस्थाएं देश के विभिन्न भाग में बनी और उसी क्रम में 1926 में देवबंद के एक मौलाना इलियास कंधलवी ने इस तबलीगी जमात की स्थापना की और इसका प्रचार प्रसार किया और कुछ समय बाद इसको तत्कालीन पाकिस्तान समर्थक मुस्लिम लीग का भी समर्थन सहयोग मिलता रहा जिससे इसके समर्थको में बेहताशा वृद्धि होती चली गई।
भारत में साल 1941 में तब्लीगी जमात का पहला धार्मिक कार्यक्रम या कहे जलसा हुआ था, जिसमें करीब 25,000 लोगों ने हिस्सा लिया था। बताया जाता है कि 1941 तक जमात का कामकाज केवल भारत तक की सीमित था, लेकिन देश के बंटवारे के बाद 1947 में इसकी मेन ब्रांच पाकिस्तान के लाहौर में बनी हालांकि स्थापना के 15 साल बाद इसके पहले जलसे के समय 25 हज़ार ही लोग थे मगर इसके बाद इसकी रफ्तार दिन दूनी रात चौगुनी की दर से बढ़ी इस कथित सुधार आदोलन ने ऐसी रफ़तार पकड़ी की शायद ही दुनिया में का कोई देश हो जंहा इसके सदस्य न हो,,मौजुदा समय में भारत के बाद बांग्लादेश में जमात का सबसे बड़ा संगठन है.अब इसके शाखाएं कई प्रमुख देशों में हैं। हर साल ये जमात एक बड़ा जलसा आयोजित करती है, जिसे इज्तेमा कहते हैं। जिसमें दुनियाभर के लाखों मुसलमान हिस्सा लेते हैं तबलीगी जमात का काम आज दुनियाभर के लगभग 213 देशों तक फैल चुका है और इसके करीब 25 से 30 करोड़ सदस्य है । ये जमात अमेरिका और ब्रिटेन फ्रांस रूस चीन जैसे विकसित देशों में बड़ी मात्रा में इनकी उपस्थिति है तबलीगी जमात हर साल देश में एक बड़ा इज्तेमा कार्यक्रम करता है, इसमें दुनियाभर के लाखों मुसलमान शामिल होते हैं तबलीगी जमात का सबसे बड़ा जलसा हर साल बांग्लादेश में होता है. जबकि पाकिस्तान में भी एक सालाना कार्यक्रम रायविंड में होता है. इसमें दुनिया भर के लाखों मुसलमान शामिल होते है इस जमात से दुनिया के कई बड़े लोग भी सदस्य के रूप में जुड़े है जैसे पाकिस्तानी क्रिकेटर इंजमाम उल हक़ सईद अनवर और यूसुफ योहाना जैसे
आज भारत के लगभग हर शहर व गांव में ये जमात मौजूद है तब्लीगी जमात ने भारत में अयोध्या के राम मंदिर आंदोलन के बाद अपनी जड़े काफी गहरी जमा ली हैं। हालांकि, इसकी कोई राजनीतिक संबद्धता नहीं है। फिर भी यह जमात लगभग हर शहर और गांव में हैं। जहां मुस्लिम आबादी भी कम है, वहां भी इससे जुड़े लोग मौजूद हैं यूपी में ऐसी कोई मस्जिद नहीं है, जिसमें तब्लीगी सदस्य न हों।
कैसे काम करती हैं तब्लीगी जमातें?
दक्षिण एशिया में मौटे तौर पर तब्लीगी जमातों से 10 से 15 करोड़ लोग जुड़े हुए हैं। अब जमात के सदस्य केवल मुसलमानों के बीच काम करते हैं और उन्हें पैगंबर मोहम्मद द्वारा अपनाए गए जीवन के तरीके सिखाते हैं। तब्लीग का काम करते समय जमात के सदस्यों को छोटे-छोटे समूहों में बांट दिया जाता है। हर समूह का एक मुखिया बनाया जाता है, जिसे अमीर कहते हैं। ये समूह मस्जिद से काम करते हैं। चुनिंदा जगहों पर मुसलमानों की बीच जाकर उन्हें इस्लाम के बारे में बताते हैं। तबलीगी जमात के एक जमात (समूह) में 8-10 लोग शामिल होते हैं। इनमें दो लोग सेवा के लिए होते हैं जो कि खाना बनाते हैं। जमात में शामिल लोग सुबह-शाम शहर में निकलते हैं और लोगों और दुकानदारों से नजदीकी मस्जिद में पहुंचने के लिए कहते हैं जंहा ये हदीस पढ़ते हैं और नमाज पढ़ने और रोजा रखने पर इनका ज्यादा जोर होता है।
आपको जान के हैरानी होगी कि भारत की तरह ही पाकिस्तान में भी इसी 12 मार्च 2020 को लाहौर शहर में दुनिया के 80 देशो के ढाई लाख लोग तबलीगी जमात के आयोजन में पहुंचे थे। इस बैठक में दस हज़ार मौलाना भी हिस्सा लेने पहुंचे थे। हलांकि, पाकिस्तानी अधिकारियों ने उनके धर्म गुरुओ को ये बैठक कैंसिल करने के लिए कहा था लेकिन उन्होंने उनकी एक ना सुनी और बाद में पाकिस्तान में इसी तबलीगी जमात के 147 सदस्यों में कोरोना वायरस की पुस्टि हुई थी। जिसके कारण पाकिस्तान की हालात बद से बदतर है।
तब्लीगी जमात से जुड़े कुछ दावे,,,,,,,,भारत में तब्लीगी जमात का मुख्य ऑफिस दिल्ली में हज़रत निजामुउद्दीन दरगाह के पास मरकज़ के नाम से है। जमात का प्रमुख मौलाना साद मुजफ्फरनगर का मूलत: मुजफ्फरनगर जिले का रहने वाला 55 वर्षीय मौलाना मुहम्मद साद कांधलवी तब्लीगी जमात का प्रमुख है। वह तब्लीगी जमात के संस्थापक मुहम्मद इलियास कांधलवी के बड़े पोता हैं। दिल्ली के हजरत निजामुद्दीन बस्ती में रहने वाले साद के तीन बेटे और बेटियां हैं। कुरान की आयतों की विवादास्पद व्याख्या करने के कारण दारुल उलूम देवबंद ने मौलाना साद के खिलाफ फतवा भी जारी किया था। जमात के उलेमाओं का ये भी कहना है कि जमात किसी भी तरह की सरकारी मदद नहीं लेती है। इसकी कोई भी अपनी बेवसाइट, अखबार या फिर टीवी चैनल नहीं है। जमात अपना एक अमीर यानी अध्यक्ष चुनता है, उसी के मुताबिक सारे काम या कार्यक्रम करता है।
संछेप में कहे तो आज तबलीगी जमात अपने पुराने उद्देश्य मूल इस्लाम के प्रचार प्रसार से दूर कट्टर इस्लाम को स्थापित करने की जमात के रूप में दिखती है जिसका स्पस्ट उदाहरण है निजामुद्दीन मरकज की घटना
साभार-ऐतिहासिक लेख/किताबे और एशियाई अखबार
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