Ajay Kumar
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08/10/2024
ये तस्वीर लोलार्क षष्ठी के एक रोज बाद की है
बीते सितम्बर मैंने कुछ हफ्ते काशी में बिताए | किताबों और लेखों में जो काशी है फिल्मों और गीतों वही बनारस बन जाता है और मानचित्र पर वाराणसी | वही काशी जहाँ पर तुलसीदास जी ने रामचरितमानस और हनुमान चालीसा की रचना की | कथित तौर पर जिसे दुनिया का पहला और अंतिम नगर माना जाता रहा है
ये सफ़र मैंने बिना किसी expectation के किया था तो बिना Google और विकिपीडिया की मदद लिए मैं वाराणसी पहुँच गया | उमेश एक रात पहले ही मुंबई से 30 घंटो की ट्रेन लेकर काशी पहुँच चुके थे | उमेश से मैं मनाली में मिला था हमारी ढेर सारी आदतें मिलती जुलती लगी तो अजनबी से दोस्त बनाने में वक़्त ना लगा | उमेश ने ही मुझे काशी पहुँच जाने पर receive किया, आजकल मेरे cash ना रखने की आदत कभी कभी मुसीबतें खड़ी कर देती है स्टेशन पहुँच कर ऐसी ही एक मुसीबत सामने आ खड़ी हुई जब रिक्शा चालक ने UPI लेने से इंकार कर दिया, ऐसे में उमेश ने ही मुझे इस मुसीबत से उबारा और सौ रुपे रिक्शा चालक अर्जुन को cash दिये, अभी लिखते हुए याद आया की उमेश को सौ रुपे भी देने हैं |
वहाँ वो केदार घाट के नजदीक एक महँगी और मच्छरों से भरी सराय में ठहरे हुए थे सुबह सुबह पहले हमने चना कचोरी और लस्सी पेली, फ़िर दोपहर में Airbnb की मदद से अस्सी घाट के नजदीक 2 BHK जैसा एक घर हफ्ते भर के लिए rent पर ढूँढ लिया |
मंदिरों, घाट और गंगा नदी के किनारे बसे हुए इस शहर में हमारी सुबह अस्सी घाट की गंगा आरती से शुरू होती, फ़िर चच्चा की चाय, बन-मक्खन और गोल्ड फ्लैक के बाद जब हम घर लौट रहे होते तो पूरा काशी जग चुका होता | सड़को पर बेमतलब हॉर्न बजाते लोंडे हों या रास्तों पर फैले कूड़े की सफाई करती गाय, दोनों ही सुबह होते ही अपने अपने काम पर लग जाते |
काशी में कई लोग मिले और कुछ अच्छे दोस्त भी बने, उन्ही में से एक मित्र हैं आदित्य, जो की काशी हिन्दू विश्वविद्यालय उर्फ़ BHU से ज्योतिष शास्त्र में Graduation कर रहे हैं एक रोज जब हम अपनी नियमित शाम की सैर पर निकले तो आदित्य मुझे अस्सी घाट की तरफ़ ले गए उन्होंने बताया की आज रात 2 बजे से लोलार्क षष्ठी नाहन है जिसमें साल में एक दिन लाखों की तादाद में यहाँ जन सैलाब उमड़ता है
जब हम अस्सी घाट के नजदीक पहुंचे तो बीस फुट छोड़ी सड़क के अस्सी फ़ीसदी हिस्से पर सिर्फ़ लोग पड़े हुए थे सितम्बर की गर्मी में पसीने से सने हुए लोग सड़क पर चादर बिछा कर बैठे हुए थे तो बाकी वहीँ सो चुके थे बची कुची थोड़ी सी जगह पैदल चलने वाले और रिक्शा चालकों ने भर दी थी
भारत के हर कोने से लोग यहाँ संतान की चाहत लिए आते हैं खासतौर पर वो दंपति जिन्हें कई सालों से बच्चे नहीं हुए हैं मान्यता के अनुसार सूर्य देव यहाँ पर नहाने वाले लोगों को संतान का वरदान देते हैं नहान के फलस्वरूप लोग अपने सभी वस्त्र, आभूषण और हर एक चीज़ जो उनके साथ होती है मंदिर परिसर में ही त्याग कर चले जाते हैं और ऐसा करते हुए पीछे पलट कर नहीं देखते |
एक रात पहले पहुँच चुके सड़क पर गुथे हुए लोगों का ये मंजर कई किलोमीटर तक फैला हुआ था “लेकिन गंगा तो बहुत बड़ी है तो ये लोग अस्सी घाट के पास ही क्यूँ डेरा डाल कर पड़े हैं”
“क्यूंकि ये लोग गंगा में स्नान करने यहाँ नहीं आए हैं अपितु तुलसी घाट के पास बने लोलार्क कुंड में मन्नत के लिए आए हैं”
लोलार्क कुंड से जुड़ी ढेर सारी कहानियाँ और मान्यताएं हैं चार से पाँच कहानियाँ तो मुझे आदित्य ने ही बता दीं, उनमे से एक ये है की कुंड का निर्माण एक उल्का पिंड के गिरने से हुआ और लोलार्क कुंड का नाम शिव के रूप लोलार्क आदित्य से मिला है
अगले दिन जब हम लोलार्क कुंड पहुंचे तो त्यागे गए वस्त्रों और छूटे हुए सामान के ढेर के ढेर बेनाम वहाँ पड़े थे हज़ारों लाखों जोड़ी कपड़े, चप्पल-जूते और भी बहुत सारी चीज़ें सारे में बिखरी पड़ी थी और कुंड चढ़ाये गए फलों और सब्जियों से लबालब भरा हुआ था
काशी की हवा, जल और हर प्राण में महादेव बसे हैं यहाँ सुबह मिलने पर लोग Good morning नहीं महादेव कहते हैं माथे पर भस्म लगाए और सफ़ेद धोती कुर्ता पहने छोटे बच्चों से लेकर नौजवान लोगों से भरे गुरुकुल जिनसे पूरा पूरा दिन मन्त्रों के उच्चारण की ध्वनि गूंजती रहती है
काशी के शिव, शिव की काशी |
What a character, his life is no less than any magical adventures journey ❤️
Must watch Documentary 👍🙌
02/06/2023
दिल्ली में दोस्तो के साथ एक यादगार दिन ।
मित्रगण फोटोज में नहीं हैं 😁 सेल्फ फोटोग्राफी
Manoj Dhana Mehra
दिल्ली में की हुई बातें पूरी दुनिया को अपने आगोश में ले लेती हैं
चाहे वो कैलाश पर्वत हो, मारियाना ट्रेंच हो या फिर हो हिटलर के गैस चैम्बर्स ।
दिल्ली एडवेंचर्स का शहर 🎊🌊
No filters edition only on facebook 😁
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