Satyendra Kumar Sharma
लेखक।कवि।स्वच्छता दूत-२०२१ नगर निगम वाराणसी।संस्थापक-मेरा देश मेरा दायित्व।पर्यावरण के प्रति सक्रिय।
12/07/2026
#कलमसत्यकी ✍️©️
समय की परछाइयां:
बुजुर्गों के अनकहे दर्द और खामोश मुस्कान
उम्र का हर पड़ाव एक कहानी सुनाता है, लेकिन बुढ़ापे की कहानी अक्सर खामोशी की स्याही से लिखी जाती है।
जब शरीर की गति धीमी होती है, तब मन की हलचलें तेज हो जाती हैं।
आज के भागदौड़ भरे युग में, हमारे घर के बुजुर्ग उस 'बीते कल' की तरह हैं, जिसे हम सहेजकर तो रखना चाहते हैं, लेकिन उसे समय देने की फुरसत किसी के पास नहीं।
शरीर का दर्द: जो आँखों में दिखता है
जो हाथ कभी घर की नींव मजबूत करते थे, आज वे चाय का प्याला थामने में भी कांपते हैं।
यह केवल जोड़ों का दर्द नहीं है, यह उस सामर्थ्य के खोने का दर्द है जो कभी उनकी पहचान हुआ करती थी।
डॉक्टरी भाषा में इसे 'गठिया' या 'कमजोरी' कहा जाता है, लेकिन असल में यह उन वर्षों का थकान है जो उन्होंने दूसरों के सपनों को पूरा करने में बिता दिए।
एकांत का बोझ: सबसे बड़ा घाव
अक्सर कहा जाता है कि बुजुर्गों को केवल दवाई और भोजन की जरूरत होती है। पर असलियत यह है कि उन्हें सबसे ज्यादा जरूरत 'संवाद' की होती है।
अनसुनी बातें: जब वे पुरानी बातें दोहराते हैं, तो वह केवल यादें नहीं होतीं, वह उनका वर्तमान होता है जिसमें वे खुद को जिंदा महसूस करते हैं।
डिजिटल दीवार:
आज के दौर की स्क्रीन ने पीढ़ियों के बीच एक ऐसी दीवार खड़ी कर दी है, जहाँ बुजुर्ग अपने ही घर में 'डिजिटल रूप से बेघर' महसूस करते हैं।
'उपयोगिता' का छिन जाना
एक इंसान के लिए सबसे बड़ा दर्द है खुद को 'बेकार' महसूस करना। जीवन भर दूसरों की जरूरत बने रहने के बाद, जब उन्हें महसूस होता है कि अब उनकी सलाह या उपस्थिति को 'काम का बोझ' समझा जा रहा है, तो उनका आत्मविश्वास टूट जाता है। वह खामोशी जो आप उनके कमरे से देखते हैं, वह कोई शांति नहीं, बल्कि अपनी प्रासंगिकता खोने का एक लंबा शोक है।
हम क्या कर सकते हैं?
उनकी दुनिया को फिर से रंगों से भरने के लिए किसी बड़े निवेश की नहीं, बस थोड़ी सी संवेदना की आवश्यकता है:
"सम्मान और समय — ये दो चीजें बुजुर्गों के लिए किसी भी जीवन रक्षक औषधि से अधिक प्रभावी होती हैं।"
सक्रिय श्रोता बनें: उनके पास बैठें, उनकी वही पुरानी कहानियां फिर से सुनें। उन्हें लगेगा कि उनकी मौजूदगी अभी भी मायने रखती है।
छोटे कार्यों में भागीदारी: उन्हें घर के छोटे-मोटे फैसलों में शामिल करें। उन्हें यह एहसास दिलाना जरूरी है कि वे आज भी इस घर के 'स्तंभ' हैं।
स्पर्श की शक्ति: एक बार उनका हाथ थामकर पूछ लेना कि "आज कैसा महसूस कर रहे हैं?", उनके आधे दर्द को कम करने के लिए पर्याप्त है।
निष्कर्ष
बुजुर्ग हमारे घर की वे जड़ें हैं, जिन्हें हम देख तो नहीं पाते, लेकिन उन्हीं की बदौलत हम फले-फूले हैं।
बुढ़ापा कोई बीमारी नहीं, बल्कि जीवन का वह 'सुनहरा सूर्यास्त' है, जिसके लिए उन्हें किसी उपेक्षा की नहीं, बल्कि थोड़े से प्रेम और कृतज्ञता की दरकार है।
आइए, उनके इस सफर को थोड़ा और सहज और सम्मानजनक बनाएं।
मेरा देश मेरा दायित्व सेवा कुटीर बुजुर्गों के जीवन को बेहतरीन बनाने के लिए ही समर्पित है।
हम कोई वृद्ध आश्रम नहीं चलाते।
हम तो उनके साथ जीते हैं।
सुबह शाम उनकी आंखों को देखकर के उनके भाव को समझने का प्रयास करते हैं।
बहुत बहुत धन्यवाद।
सत्येंद्र शर्मा सत्य।
मेरा देश मेरा दायित्व।
सेवा कुटीर।
चंदापुर उदयपुर वाराणसी।
21/06/2026
योग और हम
------------++++
आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हम सब एक ऐसे चक्रव्यूह में फंसे हैं, जहां नोटिफिकेशन की आवाज हमारे दिल की धड़कन तय करती है और 'स्क्रीन टाइम' हमारी नींद को।
ऐसे में योग केवल कुछ शारीरिक मुद्राएं मात्र नहीं रह गया है, बल्कि यह मानसिक शांति और खुद से जुड़ने का सबसे आधुनिक और व्यावहारिक टूल बन चुका है।
आइए, योग को पारंपरिक परिभाषाओं से थोड़ा आगे बढ़कर आज के संदर्भ में समझने की कोशिश करते हैं।
दोस्तों योग केवल कसरत नहीं, एक 'माइंडसेट' है।
अक्सर लोग सोचते हैं कि योग का मतलब शरीर को किसी पेचीदा आकार में मोड़ लेना है।
लेकिन असल में, योग का लक्ष्य शरीर को लचीला बनाना कम और मन के भटकाव को रोकना ज्यादा है।
जब आप मत्स्यासन या शवासन में होते हैं, तब आप केवल अपनी मांसपेशियों को आराम नहीं दे रहे होते, बल्कि आप अपने दिमाग को 'वर्तमान' में रुकना सिखा रहे होते हैं।
आज के समय में, जब हमारा ध्यान हर 5 सेकंड में रील्स और शॉट्स पर भटकता है, योग हमारे 'अटेंशन स्पैन' (एकाग्रता) को बढ़ाने का सबसे बेहतरीन माध्यम है।
'डिजिटल डिटॉक्स' का सबसे अचूक उपाय....... दोस्तों हम दिनभर में न जाने कितनी बार बिना वजह अपने फोन को अनलॉक करते हैं।
यह एक तरह की मानसिक बेचैनी है।
योग हमें इस 'हमेशा उपलब्ध रहने' की होड़ से बाहर निकालता है।
प्राणायाम (अनुलोम-विलोम और भ्रामरी) हमारे पैरासिम्पेथेटिक नर्वस सिस्टम को एक्टिव करता है, जिससे स्ट्रेस हार्मोन का स्तर तुरंत गिरता है।
सजगता-
चटाई पर बिताए वो 30 मिनट आपके दिमाग के लिए एक रीबूट बटन की तरह काम करते हैं, जो आपके मानसिक 'कैश मैमोरी' को क्लियर कर देते हैं।
दोस्तों आधुनिक योग-पुरानी विधा, नया दृष्टिकोण
का संगम है।
आज की पीढ़ी योग को अपने तरीके से अपना रही है, जो कि इसकी खूबसूरती भी है।
अगर आप योग शुरू करना चाहते हैं, तो आपको किसी कठिन आसन से शुरुआत करने की बिल्कुल जरूरत नहीं है।
आप इन तीन आसान स्टेप्स से शुरुआत कर सकते हैं:
नियम 1: सांसों पर ध्यान दें
सुबह उठकर बस 5 मिनट रीढ़ की हड्डी सीधी करके बैठें और अपनी आती-जाती सांसों को महसूस करें।
यह सबसे बुनियादी योग है।
नियम 2: कंसिस्टेंसी (निरंतरता) जरूरी है, समय नहीं
हफ्ते में एक दिन एक घंटा योग करने से बेहतर है कि आप रोज केवल 15 मिनट योग करें।
नियम 3: शरीर की सुनें
योग कोई कंपटीशन नहीं है। आपका शरीर जितना इजाजत दे, उतना ही झुकें या स्ट्रेच करें।
योग की असली परीक्षा तब नहीं होती जब आप चटाई पर होते हैं, बल्कि तब होती है जब आप चटाई से उठकर अपनी सामान्य दुनिया में वापस जाते हैं।
ट्रैफिक में फंसे होने पर आपका शांत रहना, किसी की कड़वी बात पर तुरंत प्रतिक्रिया न देना और मुश्किल वक्त में भी गहरी सांस लेकर सही फैसला कर पाना ही 'सच्चा योग' है।
तो दोस्तों,अपनी व्यस्त दिनचर्या से थोड़ा समय चुराये , स्क्रीन को अलविदा कहिए और खुद को योग के जरिए एक शांत, स्वस्थ और बेहतर कल का तोहफा दीजिए।
बहुत बहुत धन्यवाद और शुभकामनाएं।
सत्येंद्र शर्मा सत्य
संस्थापक
मेरा देश मेरा दायित्व।
#योगदिवस
08/06/2026
आकाशवाणी (All India Radio - AIR):
राष्ट्र की आवाज़ के 90+ वर्ष
भारत के जन-जन तक सूचना, शिक्षा और मनोरंजन पहुँचाने वाला 'आकाशवाणी' (All India Radio) केवल एक रेडियो स्टेशन नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति और इतिहास का जीवंत गवाह है।
वर्ष 1936 में स्थापित इस गौरवशाली संस्थान ने भारत के विकास और चेतना में एक अभूतपूर्व भूमिका निभाई है।
मुझे गर्व है कि अपने सामाजिक कार्यों और अपने विचारों को कार्य,रचना और लेख के माध्यम से अपनी बात रखने का मौका समय समय पर आकाशवाणी में मिलता रहता है।
जय आकाशवाणी
जय हिंद।
आप सभी को हृदय से प्रणाम।
Akashwani Varanasi RJ Sana Saleem Ashok Panday Sir.... Ashutosh Shastri ji
ये लोग शुद्ध रूप से आतंकी है।
देश के करदाता के पैसे पर पलते हैं और काम देशद्रोही का करते हैं और जो उनके समर्थन में बोले उनको भी नहीं संकोच देशद्रोही ही मानिए।
नहीं तो न यह देश रहेगा और ना हम लोग......ये कभी मत सोचिएगा कि लोग क्या सोचेंगे....... क्योंकि यह आतंकी प्रवृत्ति के लोग कुछ भी बोल करके निकल जाते हैं और हम आप सोचते हैं कि कहीं कोई बुरा न मान जाए।
#कलमसत्यकी
Click here to claim your Sponsored Listing.
Category
Contact the business
Telephone
Website
Address
Pandeypur
Mangari
221007