Ramesh Sharma
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18/08/2022
भगवन श्रीकृष्ण जन्मको चार युग को 28 औ चक्रको द्वापरयुगको अन्त्यमा भाद्रकृष्ण पक्षक अष्टमी तिथिको मध्यरातमा मथुरा नगरीको जेलमा जन्म भएको हो । बिबहा लगतै जेलमा राखिएका मातापिताबाट आठौं गर्वको रुपमा भगवान कृष्णको जन्म भएको थियो, श्रीकृष्ण जगतका गुरु परमात्मा हुनुहुन्थ्यो, भगवानले पापाचार उन्मूलन गरी समाजमा युगीन शिक्षा दिनका लागि माता देवकि र पिता बासुदेवका सन्तानका रुपमा भगवान कृष्णको जन्म भयो । त्यसबेला अन्याय ,आत्याचार, पापाचार सङ्गै धर्मको बिनास भएकोले यस सन्सारका संचालक परमात्माले कृष्णरुपि अवतार लिएर माता देवकिको गर्वमा आएर सामान्या मानवीय स्वभावका साथ अवतरित हुनु भएको थियो जब दुनियामा पापिहरुले राज गर्दै आएको सन्सारमा पापिहरुलाइ सखाप पारेर मानव चोला लाइ सामन्य जिवन चालाउन कृष्ण भगवान जन्मिएको दिनलाइ हाम्रो परम्परागत मुल्य र मान्यातालाइ आधारित घैटो फुटाउने दिन (कृष्ण जन्माअष्टमि)को हार्दिक शुभकामना
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प्रेम क्या है ?
सिकलो
देखिये एक होता है सांसारिक प्रेम जो देह जनित होता है, एक होता है आत्मिक प्रेम जो आत्मा से आत्मा को होता है और एक होता है आध्यात्मिक प्रेम जो भक्त को ईश्वर से होता है और बहुत ही मैं कह ता हु बहुत ही विरले लोग होते हैं जिन्हें अपने ही रूप यानी प्रेमी या प्रेमिका में शरीर रूप में उस खुदा का दीदार होता है। उन्हें ईश्वर के द्वारा वो पाक नजर बख्शी जाती है कि वो अपनी दिल की जमीन पर अपने खुदा का दीदार कर सकें।
ऐसे प्रेम में कोई संकीर्णता नहीं होती, व्यापकता का भाव आ जाता है। इसमें मैं नहीं हम हो जाता है। फिर वह जो "हम" इकाई है वो उस परमात्मा की तरफ लौ लगाते हैं। उनके लिए बस एक दूसरे का होना ही संसार है।
प्रेम वो ज्योति है जो आपके जीवन को आलौकिक प्रकाश से भर देती है। यह आपके जीवन को उन चटख रंगों से भर देती, जिनकी आपने कल्पना भी नहीं की थी। सब कुछ बहुत साफ, निर्मल और पवित्र। इसमें वो जुनून होता है जो हर क्षण बढ़ता ही जाता है एक न खत्म होने वाली प्यास । जय श्री राम
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